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कुछ कहना है मुझे
कुछ कहना है मुझे
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© Vikram Singh Negi 'Kamal'

Drama Fantasy Inspirational

1 Minutes   13.2K    7


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ये धरती चुप - सी है

गगन भी खामोश - सा

मगर व्याकुल - सा है मन मेरा

कुछ कहना है मुझे।


हवाएँ सर्द - सीहैं

रात भी ठंड के आगोश में

मगर घुमड़ते बादल चित्त के

कुछ सहना है मुझे।


बातें रुकी - सी हैं

नज़रें जाने किस रोष में

ठहर जाता हूँ रह - रह के

कुछ बहना है मुझे।


कलम बेफिक्र - सी है

भावों के असीमित जोश में

पर कहीं हो असमंजस के

कुछ रहना है मुझे।


उम्मीदें धूमिल - सी हैं

विश्वास भी नही अब होश में

फिर भी चल पड़ता हूँ रुक - रुक के

कुछ कहना है मुझे।



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