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शोर ए दिल
शोर ए दिल
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© Shashi Mehra

Romance

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दिल से उसको गर पुकारोगे, तो आयेगा ज़रुर ।

प्यार से उसको मनाना, मान जायेगा ज़रूर ।।

नफ़रतों की आग को आकर बुझायेगा ज़रूर ।

दरम्यां के फ़ासले को, वो मिटाएगा ज़रूर ।।

खूब वाकिफ़ हूँ मैं उसकी, आदतों से देखना ।

रूठ जाओगे अगर तुम, वो मनायेगा ज़रूर ।।

अपने साये पे भी करता, वो नहीं बिल्कुल यकीं 

उसकी फ़ितरत है तुझे वो, आज़मायेगा ज़रूर ।

उसका दावा जाँचना हो, दूर जाकर देख लो ।

ग़म भरे नग़मे, शब ए हिज्रां में, गायेगा ज़रूर ।।

कह रहा था वो भरी महफ़िल में, फ़ख़्र-ओ-शान से ।

ज़िन्दगी की दास्ताँ, सब को सुनायेगा ज़रूर ।।

प्यार करना जिसकी आदत, है 'शशी' वो एक दिन ।

गुल मुहब्बत के चमन में, वो खिलायेगा ज़रूर ।

दिल मोहब्बत चमन

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