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दिल की गली से
दिल की गली से
★★★★★

© Sunil Yadav

Romance

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मुझे रहने दो चैन से मेरी झोपड़ी में

दिखाकर महलों की रौशनी न जलाया करो

कहीं चुभ न जाये पांव में निगोड़े कांटे तुम्हें

यूँ पैदल न मेरे घर को आया करो

बिक रही है बाज़ारों में फूल जैसी मुहब्बत

हो रही है बर्बाद कितनी कलियाँ न बताया करो

उम्र बित जाती है महज़ एक दोस्ती निभाने में

ना दौलत का घमंड मुझे दिखाया करो

फंसे रहने दो मुझे दुनियादारी में सुनो

मुहब्बत क्या मुझे न बताया करो

मुबारक हो तुझे शान-ए-शोहरत सभी

कभी गरीबों का मज़ाक न उड़ाया करो

दर-दर की ठोकरें खाकर जो हँसता रहा

मुझ ''कवि '' को तुम न समझाया करो

मुहब्बत दोस्ती घमंड

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