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माँ
माँ
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© Himanshu Sharma

Drama

1 Minutes   355    16


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बच्चा जब पाँव पे आता है,

निर्बाध धावक वो बन जाता है !

उसकी माता भी दौड़ लगाती है,

ममता में वो ड़ुबकी लगाती है !


उसकी अबोध चाल को माता,

निहारती चुपके से और मुस्का के !

अबोध शिशु को वक्ष लगाती,

लेकर आती प्यार से और फुसला के !


आँचल में भरकर मैय्या फिर,

शिशु को गया लोरी वो सुलाती है !

खाना खिलाने से पहले मैय्या,

ख़ुद गरम-ठन्डे को नापती है !


जो गलती से जल जाए मुख शिशु का,

हो बेसुध पानी लाने वो भागती है !

वो गर्मी से जलती जीभ मानो,

रह-रह उसके उर को जलाती है !


वैसे भी मैय्या के ह्रदय की,

थाह आज तक कौन जान पाया है ?

बेटा भले ही फेर ले आँखें,

पर माँ नेहमेशा अपना फर्ज़ निभाया है !


दूर रहती है माँ मेरी आँखों से पर,

रह-रहकर यादों में वो आती है !


माँ बच्चा आँचल

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