Kanchan Jharkhande

Abstract


Kanchan Jharkhande

Abstract


इतनी गहराई मेरे इश्क़ में

इतनी गहराई मेरे इश्क़ में

1 min 237 1 min 237

मैं गर रोऊँ तो,

सहरा को समुन्दर कर दूँ


मैं गर हँस दूँ तो

फ़िज़ा को भी सिकन्दर कर दूँ

खाक हो जाये जहान


मैं गर जो आह भरूँ

आसमां टूट पड़े

मैं गर जो फरियाद करूँ। 


Rate this content
Originality
Flow
Language
Cover Design