Quotes New

Audio

Forum

Read

Contests


Write

Sign in
Wohoo!,
Dear user,
बादल
बादल
★★★★★

© Arun Arnaw Khare

Others Comedy

1 Minutes   13.6K    8


Content Ranking

साँझ-सकारे उमड़े बादल।
गरज-गरज कर लौट गए फिर
लगते उखड़े-उखडे बादल।

सोचा था तुम आओगे तो
देह-देह का ज्वर उतरेगा।
बूँदों के घुँघरू बाँधे कोई
अंश तुम्हारा पाँव धरेगा।
कितना छलना सीख गए हो
लेकर दो-दो मुखड़े बादल।

बनी नदी जो रेख रेत की
पता नहीं कब चल पायेगी।
गोने की बाट जोहती जो
पता नहीं कब मुसकायेगी।
अग्नि-वर्षा सी कर जाते हो
होकर सौ-सौ टुकड़े बादल।

साँस-सॉंस तक क़र्ज़दार है
मौसम के साहूकारों की।
ख़ून-पसीने का मोल नहीं 
मनमर्ज़ी है सरकारों की।
आश्वासन जैसे कोरे हो
दिखते चिकने-चुपड़े बादल।

गीत बादल वर्षा

Rate the content


Originality
Flow
Language
Cover design

Comments

Post

Some text some message..