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ढलती शाम
ढलती शाम
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© Manoj Bhardwaj

Drama Romance

1 Minutes   6.8K    4


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जब शाम ढलती है,

तेरी याद आती है

घर के आंगन में,

तेरी पायल की आवाज़ आती है|


घर के चौखट पे बैठे,

राह निहारे रहता हूँ ||

न जाने तुम कब आओगी,

ये आस लगाये रहता हूँ ||


ओ मेरी प्यारी सजनिया !

जब तुम रात पकवान बनाती,

अपने बालों को यू सहलाती||


नैनो को यू तिरछा कर,

दिल पे मेरे तीर चलाती||

ये जो तेरे दो नैना है,

बड़े ही कातिलाना हैं ||


बस ये रात यूं ही सिमट जाये,

जब तू मुझसे यू ही लिपट जाये ||

ओ मेरी प्यारी सजनिया !

Sunset Life Love

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