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टंगी निगाहें
टंगी निगाहें
★★★★★

© Dr Sangeeta Gandhi

Romance

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ठहरे रास्तों पर ठहरी निगाहें

प्रेम पिपासा में पगी निगाहें

रुक कर चलतीं चल कर रुकतीं

कहीं न पहुंचतीं

कहीं न थमती

आशाहस्त की रज्जु से लिपटीं

मुड़ते मोड़ों पर कदम पटकतीं

पलकों की कारा को तोड़ प्रतीक्षा द्वार पर ठिठकी निगाहें

सुनो ,कभी आओ ! तो उतार लेना

निम्बू -मिर्ची सी खूंटी पर

टंगी निगाहें ।

#love

निगाहें प्रेम ठिठकी

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