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आसिफा
आसिफा
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© Anushree Goswami

Crime Drama Tragedy

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न समझ किसी मज़हब की,

न समझ अखबारों की,

छप गयी उन्हीं में तस्वीर,

एक नहीं हज़ारों की !


उसको क्या पता,

किस मुल्क की वो,

इंसान में ही फिर,

इंसान ढूँढती वो !


रह रह कर आवाज़ कांपती है,

जब भी तस्वीर सामने आती है,

पिता के दिल की दास्ताँ,

घर की खामोशी सुनाती है !


जिसकी हँसी में जन्नत थी,

अब सन्नाटा उसे पुकार रहा,

नम आँखों से हर इंसान,

फिर उसकी नज़र उतार रहा !


जिसमें खुद ईश्वर रहता है,

कण - कण में जिसके बहता है,

और लोग परेशान हो कह रहे,

मंदिर में ऐसा कौन करता है ?

Assault Child Crime

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