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Tanhayiaan
Tanhayiaan
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© Dinakshi Arora

Inspirational

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जाती हैं तनहाइयाँ कि और ठहर जाती हैं

वक्त की ये लहरें देखो ले के किधर जाती हैं

 

अंधेरा ही अच्छा है कि एक सा तो है

जलती बुझती किरणें और भी मायूस कर जाती हैं

 

बार बार बड़ी हसरत से झोली फ़ैलाती हूँ

ख़ाली रह जाती है तो आँखें भर जाती हैं

 

हैरां किया ज़िंदगी ने इतना कि हैरत नहीं होती

ख़ुशी की घड़ियाँ भी अब रुला के अगर जाती हैं

 

अच्छी हैं वो यादें जो कभी याद न आएँ

एक लम्हे को तबस्सुम बन के बिखर जाती हैं

 

यहाँ तो परेशाँ ज़ुल्फ़ों की उलझन नहीं सुलझती

जाने कैसे लोगों की तकदीरें संवर जाती हैं

 

बस तरसती रहती हैं मंज़िल को हमेशा

राह भूली हुई पगडंडियाँ कहाँ अपने घर जाती हैं

 

रह जाते हैं टूटी शाख़ों पर आशियानों के निशां

तूफ़ान निकल जाते हैं आँधियाँ ग़ुज़र जाती हैं

 

सोचते हैं कि मिटा दें दिल से माज़ी के निशान

ख़ालीपन के ख़ौफ़ से उंगलियाँ डर जाती हैं

 

छोड़ आए हैं जो पीछे जहाँ जाना नहीं दोबारा

नामुराद नज़रें रह रह के उधर जाती हैं

 

वो आदत थी मेरी कि जीना मुहाल था बिन मेरे

शौंक छूट जाते हैं सभी आदतें सुधर जाती हैं

 

आती हैं ख़ुशियाँ तो बरसाती हैं फूल राहों में

जाती हैं तो बरसा के कहर जाती हैं

 

काबिल–ए–तारीफ़ है शऊर–ए–तवाज़ुन ख़ुदा का

पूरी होती हैं ख़्वाहिशें जब वो मर जाती हैं

 

लोग कहते हैं कि अच्छा लिखती हो 'सहर'

दर्द की स्याहियाँ जब काग़ज़ पे बिख़र जाती हैं

तनहाइयाँ दिल ज़ख्म

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