Quotes New

Audio

Forum

Read

Contests


Write

Sign in
Wohoo!,
Dear user,
एक पेट की और खेत की कविता
एक पेट की और खेत की कविता
★★★★★

© Sushil Sharma

Inspirational Comedy

1 Minutes   6.3K    6


Content Ranking

पेट की कविता में
कांधे पर बीबी का शव
रखे दाना मांझी है।
अस्पताल में
मौत से लड़ता 
आम आदमी है।
कूटनीति के गलियारों में
लटकती गरीब की रोटी है
सैनिकों की पतली दाल है
गोदामों में सड़ता अनाज है।
सड़कों पर फिकती सब्जियां है।
दूध के लिये बिलखता बच्चा है।
सड़कों पर बहता दूध है।
खेत की कविता में
जमीन हड़पते बड़े किसान है।
तड़पते भूमिहीन किसान है।
साहूकारों के चुंगल है।
बैंकों का विकास है।
कर्जमाफी के लिए चिल्लाते
अपनी फसलों को जलाते
जहर खाते मरते किसान है।
कविता खेत का दर्द गाती है।
कविता भूखे पेट सुलाती है।
पेट की कविता में 
दर्द है अहसास है।
भूख है भाव है।
खेत की कविता में
किसान है सूखा है।
कर्ज है फांसी है।
मंडी हैं बोलियां है।
निर्दोषों पर गोलियां है।
कविता चाहे खेत की हो
या पेट की हो।
दोनों में दुख है दर्द है।
आहत भरी गर्द है।

किसान क़र्ज़ बदहाली

Rate the content


Originality
Flow
Language
Cover design

Comments

Post

Some text some message..