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प्रेम
प्रेम
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© Shalini Shalu

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वो प्रेम कहां, वो तो धोखा है,

जो उद्दीप्त लालसा का भूखा है।

प्रेम तो है ह्रदय की फुव्वार,

प्रेम ही प्रकृति का आधार॥

 

प्रेम में न लालसा, न हो अत्याचार ,

प्रेम में गर वासना ,तो है घृणित व्यवहार।

लालसा से ना जुड़ सकेंगे, ह्रदय के तार,

प्रेम तो है, निशच्छलता का व्यवहार॥

#poetry #hindipoetry

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