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प्रेमक्षुधा
प्रेमक्षुधा
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© Kavi Vijay Kumar Vidrohi

Others Romance

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प्रीत संग नवजीवन कलरव

कसमस सौरभ प्रेम विभव

झिम रिमझिम उन्मद कानन

आ प्राणपवन महकाती जा

आजा, आ, अब, आ भी जा

 

पल पल अविकल सरस भाव

ज्यों शीतज्वार से तर अलाव

उपवन चेतन कर नय भर दे

तू छनन छनन मदमाती जा

आजा, आ, अब, आ भी जा

 

मधुबेला कर दे मुक्तपाश

है शशिप्रभा उन्मन उदास

जुल्फ़ खोल आदेश थमा

ये मेघमाल सरकाती जा

आजा, आ, अब, आ भी जा

 

चिरवियोग पतझड़ जीवन

आयुताप शापित तन-मन

निज यौवनघट की मधुर धार

इस जीवन में बरसाती जा

आजा, आ, अब, आ भी जा

 

- ओजकवि विजय कुमार विद्रोही

 

 

 

प्रेम प्यार श्रृंगार विद्रोही

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