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हमे जन्नत मिल जाये.....
हमे जन्नत मिल जाये.....
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© Jigisha Raj

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ऐ मेरी जुस्तजू की हर एक कहानी
पलकों पे याद करके आ जाता पानी...

यूंही बदला सा लग रहा है हर एक अफसाना
मौत की दस्तक से पहले मेरा यूंही घबराना

बात चन्द लम्हों की उस दिन जो की थी हमने
दिल और पलकों के बीच रुक सी गई है ...

हम न कह पाएंगे, तुम न भूल पाओगे
बस यूंही दिल से तेरे बंदिश हो रही है…

तू यहाँ रहे या वहां बसे दिल के आरपार है
न अब मै मुझ में हूँ ये मेरा कसूर नहीं

सौ बाते सौ अफसाने दिल के यूंही बिखर के रह गए
न बिखरा तेरा चेहरा न तेरी वो यादें

बस दिल में एक कसक रह गयी तेरे नाम से
न उम्मीद हो के गुजरेंगे इस जनम में

बस दिल में एक कसक रह गयी तेरे नाम से
न उम्मीद हो के गुजरेंगे इस जनम में

अब तो ये वादा कर ले अगले जनम तक का
की फिर न कहना कि हमने तुम्हें माँगा नहीं था

वही रातें वही गलियां वही तेरा चेहरा हो
हम तेरी बाहों में हो और रात गहरी हो...

वो ख्वाब इस जनम का उस जनम तक रहे
दिल में एक तू ही हमेशा मेरे अक्स तक रहे

न जाम गहराए, न शब्-ए-बारात आए,
आए तो बस तेरी बाहों में हमें मौत आए...

बस इतना सा ख्वाब हकीकत बन जाये
तेरी बाहों में हमे जन्नत मिल जाये...

बस दिल में एक कसक रह गयी तेरे नाम से ना उम्मीद होके गुजरेंगे इस जनममें

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