Quotes New

Audio

Forum

Read

Contests


Write

Sign in
Wohoo!,
Dear user,
प्रेम की पराकाष्ठा
प्रेम की पराकाष्ठा
★★★★★

© Upasna Siag

Abstract

1 Minutes   13.5K    10


Content Ranking

मन भागता है

अनन्त की ओर

अनदेखे -अनजाने

पथ की ओर

निर्वात की ओर !

देखता है

प्राणों का देह से

विलग होना

और

देखता है

देह को विदेह होते !

यह देह का

विदेह हो जाना

मन का अनन्त की ओर

भटकना,

प्रेम की पराकाष्ठा है।

शायद !

निर्वात देह प्राण

Rate the content


Originality
Flow
Language
Cover design

Comments

Post

Some text some message..