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बेरोजगारी
बेरोजगारी
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© Raman Sharma

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बेरोजगारी है हर तरफ
बेरोजगार हैं आज के लोग ,
करना चाहते हैं बहुत कुछ
मगर हैं हालात से मजबूर ,
हो भी गये अगर सेलेक्ट
तो देनी पड़ती है रिश्वत ,
देखा होता है जो सपना
हो जाता है चकनाचूर ,
हैं जो कुछ अमीर लोग
उठा लेते हैं सब लाभ ,
पैसे की कोई कमी नहीं
 रिश्वत देते हैं भरपूर,
यही है भ्रष्टाचार
यही है भ्रष्टाचार ,
हो कहीं एक पद
तो पहुंचते हैं हजार ,
हो गये अगर असफल
तो आ जाते हैं वापस ,
आँखों में नमी लिए ,
और जाग उठता है-
एक नफरत,एक भ्रष्टाचार ,
जनसंख्या है डेढ़ सौ  करोड़
कहाँ से पाओगे तुम आरक्षण ,
यही से पनपता है
एक भ्रष्टाचार,एक नफरत ,
है ये कलयुग मेरे दोस्त
है ये कलयुग !
कुछ ऐसा करना होगा ,
जिससे बने अपनी पहचान ,
ऊँचा हो  नाम ,
और घर बालो का भी 
हो जाये  मसहूर नाम !
फिर कहाँ रहेगा तू बेरोजगार, 
मेरे दोस्त ! कहाँ रहेगा  तू  बेरोजगार I
 

raman sharma

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