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कुछ पल की मोहलत
कुछ पल की मोहलत
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© Mani Aggarwal

Romance Tragedy

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मै तेरे साथ चल दूँगा, 

दो घड़ी को ठहर जाना,

है वादा यार का मेरे, 

वो मुझसे मिलने आएगा l

बस इसी आस में दिल मेरा, 

अब भी राह तकता है, 

जिस्म बेजान हो कर भी, 

यही फरियाद करता है l

कुछ घड़ी और मेरी रूह को, 

ए मौत तू दे दे, 

शांत इस देह को मेरी, 

गले उसको लगाने दे l

साथ उसके नहीं हैं आज, 

जंजीरें जमाने की, 

आज न बंदिशें होंगी, 

गले मुझको लगाने की l

आज वो मिल के मुझसे, 

अपना भी तो गम बहाएगा, 

चूम कर मेरे होंठों को, 

प्यार अपना लुटाएगा l

बाद मरने के ही, 

दिल की ये हसरत, 

पूरी होने दे, 

के मुझको बाहों में भरकर, 

मेरे दिलबर को रोने दे l

खुशी से साथ तेरे, 

मै चलूँगा तू कसम ले ले, 

बस उसके आने तक, 

रुकने की मोहलत रूह को दे दे l

जान जिस्म महबूब

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