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मुक्तक
मुक्तक
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© Narendra Aatish

Drama

1 Minutes   1.2K    8


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देखा हैं मैंने बच्चो के मुख पर मुस्कान नहीं हैं,

फुटपाथों पर सोते रहने को उन्हें मकान नहीं हैं||


पाँव के छाले बोलते लहु छलकना लिखा नसीब में,

रोटी मिले सुकून से ऐसा कोई विधान नहीं हैं||


Poverty Poor Children

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