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प्रेम अनंता
प्रेम अनंता
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© Sanjay Shepherd

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जब तुमसे प्रेम करना चाहता 

दुनिया से डरता था 

अब तुमसे प्यार करने लगा हूँ तो 

दुनिया डरने लगी है 

 

मैं बस इस दुनिया से इतना कहना चाहता हूँ 

ये चूहे- बिल्ली की तरह से डरने- डराने का खेल छोड़ो 

मैं बस प्रेम करना चाहता हूँ 

प्रेम में इस दुनिया को जीना चाहता हूँ

 

फिर यह पहरे, बंदिशें क्यों ?

बेड़ियाँ खोलो मुझे उन्मुक्त उड़ने दो 

इस अनंत का कोई तो छोर होगा ?

कटे पंखों के बावजूद 

तुम्हारे प्रेम में अंतत: उसी अनंत तक पहुँचना है। 

 

sanjay poetry

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