Quotes New

Audio

Forum

Read

Contests

Language


Write

Sign in
Wohoo!,
Dear user,
अकेलापन
अकेलापन
★★★★★

© Swapnil Jha

Others

1 Minutes   13.9K    3


Content Ranking

झुक गया वहां आसमां

जहाँ पलछिन किनारा था

सूरज की लालिमा का वो

अद्भुत नजारा था |

क्या उसे मैं भूल जाऊँ ?

जिसको मैं निहारा था,

जहाँ किनारे पर खड़ा

वो बेचारा था |

फटे वसन में लिपटा हुआ

वो दर्द हमारा था

क्यूँ मिला अभिशाप

उसने क्या बिगारा था ?

सूरज को नहीं , मैंने उस

लचर को निहारा था ,

सुनी पड़ी थी आँखें

फूटा भाग्य का पिटारा था |

अपने नहीं थे जिनके

लहरों का सहारा था,

दुःख – दर्द बाँटने हेतु वो

पलछिन किनारा था |

वो टूट चूका था दिल से

जिंदगी से हारा था

क्या अकेलेपन को ही

ये जन्म दुबारा था |

 

akelapan hindi poetry hindi poem swapnilpoems

Rate the content


Originality
Flow
Language
Cover design

Comments

Post

Some text some message..