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दिन सार्थक है
दिन सार्थक है
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© Hasmukh Amathalal

Comedy

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सुबह-सुबह ज़िन्दगी की शुरुआत होती है

पुण्य कृपा से आशीर्वाद की बरसात होती है 

हम उसको प्रसाद मानकर स्वीकार करते है 

सहे दिल से प्रभुजी का आभार व्यक्त है।

दिन सार्थक है

 

अब दिन का चयन हमारे हाथ में है 

जब ऊपरवाले का हाथ हमारे साथ है!

सही कार्य करने की इच्छा मन में प्रज्वलित होती है 

मन सहज ही पल्लवित हो उठता है।

दिन सार्थक है

 

धन उपार्जन हमारा कर्तव्य है 

यह सब का मंतव्य है 

पर वो कैसे किया इसका मतान्तर है 

सही मायने और कार्यविंत करने में अंतर है।

दिन सार्थक है

 

जैसे कसाई दिन में कितने पशु काटा जाए उसकी चिंता करता है 

पर चूँकि उसको जीवन निर्वाह करना है इसलिए वो सोचता है 

मन उसका निर्मल और प्रभु के प्रति समर्पित है 

पर उसका कर्म उसको शापित करता है।

दिन सार्थक है दिन सार्थक है

 

किसी को अपमानित करना हमारा निज कार्य नहीं है 

यह दलील किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है 

अंतर्मन से देखो तो सब का "अपना अपना कर्म है"

मानवमात्र को समझने के लिए "उसमे मर्म है" दिन सार्थक है

पूरा दिन हमारा कैसे व्यतीत हो?

मान लो कल वो अतीत बनने जा रहा हो 

हमारा काम निज ज़रुरत के मुताबिक अनुरूप हो 

किसी के मार्ग मे हानिरूप ना हो और सुखदायी हो। दिन सार्थक है

हानि पहुंचाना बहुत आसान है  

किसी को मदद करना महान कार्य है 

हर कोई ये नहीं कर सकता है 

यदि आपके मन में भावना है तो समझ लो दिन सार्थक है।

दिन सार्थक है

sarthak din

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