Audio

Forum

Read

Contests

Language


Write

Sign in
Wohoo!,
Dear user,
याद आती हो क्यों
याद आती हो क्यों
★★★★★

© Habib Manzer

Drama Romance

1 Minutes   7.1K    7


Content Ranking

बहुत याद आती हो क्यों तुम बताओ

सनम याद से तुम ना दिल को दुखाओ

तमन्ना मेरी गुफ्तगू तुमसे कर लूं

मरासिम मेरे दिल से तुम भी बढ़ाओ


तुझे देख लूं जब खुले मेरी आँखे

सनम सामने अब नज़र के तो आओ

यही सोचकर बंद करता हूँ आँखें

है दिल मुन्तज़िर तुम ना इसको सताओ


मेरे दिल की हालत समझते नही तुम

क्यों दूरी है इतनी वजह तुम बताओ

तुझे दिल में अपने सनम कैद कर लूं

मेरे दिल में तुम भी सनम घर बनाओ


मेरे ख्वाब में अब तुम्ही रात भर हो

कदम मेरे जानिब सनम तुम बढ़ाओ

कोई गैर हो जब नज़र बंद कर लूं

सनम अपनी चाहत मुझे तुम बनाओ


मेरी मंज़िलों पर सनम नाम तेरा

कभी अपनी मंज़िल मुझे तुम बनाओ

सफर ज़िंदगी भर तेरे साथ कर लूं

मुझे अपनी चाहत का जलवा दिखाओ


तुम्ही ने सिखाया सब्र मुझको करना

मेरे ख्वाब अब सनम तुम कराओ

कयामत की जानिब नज़र मैं भी कर लूं

अगर मेरा वादा वफा तुम निभाओ


कसम आजतक तुमने मुझको दिया ना

क्यों दिल चाहता है कसम अब खिलाओ

बसर ज़िंदगी चाहतों पर मैं कर लूं

मगर पल हसीन साथ कुछ तुम बिताओ...।

Love Memories Life

Rate the content


Originality
Flow
Language
Cover design

Comments

Post

Some text some message..