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शीशा ए रियासत नहीं
शीशा ए रियासत नहीं
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© Shashi Panday

Romance

1 Minutes   6.6K    2


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कोई  विकल्प नहीं 
कोई  संकल्प नहीं 
तुम होगे धारा तीन सत्तर 
मै बेचारी सियासत नहीं ॥

साझा हुई थी नज़र 
फिर लगी थी ख़बर 
भूखे थे  हम  यार 
भुखमरी कोई नफासत नहीं॥

तुम  तुम्ही  हो तो 
हम, हम  ही  हैं !
ठोकरों से हुये हैं मज़बूत 
हम कोई शीशा ए रियासत नहीं ॥

खुद को रखना बचाकर
हँसे कोई जब गिराकर 
देखना उठना सम्भलकर 
आदमीयत है कोई भगवान नहीं ॥

जा छोड़ दिया हमने 
दफन किया इकरार 
तुमसे हुआ था प्यार 
कोई  विरासत एग्रीमेंट नहीं ॥

 

शीशा ए रियासत नहीं

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