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कल से
कल से
★★★★★

© Pramod Mevada

Romance

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रुकी हुई है बात कल की कल से,

कारवाँ बढ़ ही नहीं पाया उसके दर से।

जुस्तजू थी दीदार - ए - यार की,

पल वो भी रुक गया है कल से।।


काफिले होते नहीं इन यादों के

है कुछ फसाना सा इन यादों में।

निगाहे करम पर मुस्तक़बिल कहा !

ठहरा सा है बस ये मंजर कल से।।


है गर ख्वाहिशे ! जिंदा हो तुम,

गर कुछ नही तो क्या फायदा कल से ?

मिसाल - ए - महबूब देखो तो जरा

पाबंद कर गई है नजरो को बस कल से।।


[ © प्रमोद मेवाड़ा ]

Lover Ghazal Love

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