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 दिल का भार
दिल का भार
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© Raman Sharma

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आज मैं अपने दिल का भार ।
कम करने निकल पडा ।।
जो करना था बहुत पहले ।
वही आज करने चल पडा ।।
क्या पाया उसे चाह करके ।
खुश था,गमों से मिला दिया ।।
बडी हिम्मत के बाद मैं ।
उसे भुलाने चल पडा ।।
जो करना था बहुत पहले ।
वही आज करने चल पडा ।।
इस कोमल सी चाहत में ।
हर बार उसका साथ दिया ।।
सच्चा प्यार रास ना आया उसे ।
चाहने के बाद ज्ञात हुआ ।।
जो सपना देखा था मैने ।
उसे सखी बनाने का ।।
वही आज दिल से ।
निकालने निकल पडा ।।
जो करना था बहुत पहले ।
वही आज करने चल पडा ।।
जिसे हर पल देखा मैंने ।
उसी से नजरें चुराने लग पडा ।।
दिल से चाहता रहा जिसे ।
उसी से नफरत करने लग पडा ।।
जो करना था बहुत पहले ।
वही आज करने चल पडा ।।

raman sharma himachali

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