Audio

Forum

Read

Contests

Language


Write

Sign in
Wohoo!,
Dear user,
मैं अब इस दिल की क्यों ना मानूं...
मैं अब इस दिल की क्यों ना मानूं...
★★★★★

© shobhana shukla dubey 'ritu'

Others

1 Minutes   13.5K    6


Content Ranking

जो कहता है दिल वो करती हूँ मैं अब इस दिल की क्यों ना मानूं

किसी को सही लगे या फिर लगे गलत मैं इस दुनिया के भरम अब क्यों पालूँ

है जीवन मेरा और ये मेरा अधिकार है रहूं बंधन में मैं या नीलगगन में पंख पसारुं

मैं हूँ खुद मेरे लिए बस इतना ही काफी है क्यों आँचल अब मैं फैलाऊं क्यों भीख दया की मैं मांगू

तेरे ही तरह मेरे भी कुछ अरमान हैं, हैं मेरे भी कुछ ख्वाब मेरी भी हौसलों की उड़ान है

नारी होना वरदान है ये अभिशाप नहीं

क्यों करूँ मैं हर बार खुद को साबित, क्यों अग्नि परीक्षा की कसौटी पर परखी जाऊं

है ये मेरी ही ज़िन्दगी मेरे ही जीने के ये अंदाज़ हैं

क्यों सोचूं ये की कोई क्या कहेगा क्यों मैं कोई बोझ सिर पर अब उठाऊं

जो कहता है दिल वो करती हूँ, मैं अब इस दिल की क्यों ना मानूं  

मेरी ज़िन्दगी#मेरेफैसले#कविता

Rate the content


Originality
Flow
Language
Cover design

Comments

Post

Some text some message..