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‘ख़त’
‘ख़त’
★★★★★

© Adhiraj Jain

Others Romance

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देखो मैं छोड़कर जा रहा हूँ तुम्हें
नहीं पता फिर कब मिलूँगा तुम्हें
मुमकिन है कि अब मैं लौटूँ नहीं
रुकूँगा पलटूँगा देखूँगा पर लौटूँ नहीं
वैसे तुम चाहो तो अभी भी रोक लो, मैं रुक जाऊँगा
तुम प्यार से बोली तो लगाओ, मैं फिर बिक जाऊँगा

दिल की कहूँ तो मैं जाना नहीं चाहता
मैं फिर नया गमगुसार ढूँढना नहीं चाहता
पर यकीन मानो ये फ़ैसला मेरी मजबूरी है
मेरा ये ख़त-ए-जुदाई आज बेहद ज़रूरी है
यूँ तो सचमुच सपनों सी दुनिया है हमारी
हर ज़ख़्म का ईलाज हैं दो आँखें तुम्हारी
पर डर लगता है इस सपने के टूटने का
जिंदगी का फिर मुझसे रूठने का
इसलिए हक़ीक़त में लौटना चाहता हूँ
सपने से दूर भाग जाना चाहता हूँ
पर फिर भी तुम चाहो तो रोक लो, मैं रुक जाऊँगा
तुम प्यार से बोली तो लगाओ, मैं फिर बिक जाऊँगा

सच तो ये है कि मेरा रोम रोम खुद ही रुकना चाहता है
ये जो बच्चा नुमा दिल है ये तुम्हें देखते रहना चाहता है
पर मेरे ‘मैं’ के अंदर एक और ‘मैं’ रहता है
वो डर डर के मुझसे बार बार ये कहता है
कि ये दुनिया जो आज इतनी ख़ूबसूरत है कल नहीं होगी
तुम जो आज मेरा इश्क मेरी हमसफ़र हो कल नहीं होगी
अकेलेपन की तीखी धूप में तब में अकेला खड़ा रहूँगा
बेजान जज़्बात  की गरम लू के थपेड़े मैं अकेला ही सहूँगा
अगर सपने में और जिया तो शायद हक़ीक़त सहन ना कर पाऊँ
सपने के टूटते ही काँच की तरह मैं भी टूट कर बिखर जाऊँ
तो बेहतर तो यही हुआ ना कि मैं आज ही चला जाऊँ
इंतज़ार करने की जगह बर्बादी की तैयारी में लग जाऊँ
शायद तैयार रहूँगा तो वक्त के बेरहम हमले को झेल जाऊँ
इस बार बेरंग होकर अगली बहार में फिर गुलज़ार हो जाऊँ
पर बावजूद इसके तुम रोकोगी तो सच मैं रुक जाऊँगा
तुम प्यार से बोली तो लगाओ, मैं फिर बिक जाऊँगा

जानती हो क्यूँ ?
क्योंकि मेरे इश्क के आज और कल में बर्बादी ही लिखी है
क्योंकि मैंने तुमसे बर्बाद हो जाने वाली ही मोहब्बत की है
वो वाली मोहब्बत जिसके पूरे होने में भी बर्बादी है और अधूरे रहने में भी
तो फिर क्यूँ ना तुम्हारे साथ ही बर्बादी का जश्न मनाएँ
साथ साथ पतझड़ देखें और साथ ही वीरान हो जाएँ
लेकिन मैं तो जाने का फ़ैसला कर चुका हूँ
कुछ क़दम सेहरा की तरफ़ बढ़ा भी चुका हूँ
तुम तो जानती हो आगे बढ़ कर पीछे लौटना मेरी फ़ितरत नहीं है
फ़ैसला ले लेने के बाद पलट जाना मुझे आता ही नहीं है
पर ये भी तो सच है कि तुम्हारी हर फ़रमाइश पूरी करता हूँ मैं
ये भी सच है कि तुम्हारी एक आवाज़ पर दौड़ा चला आता हूँ मैं
तो सोच लो, तुम रोकोगी तो मैं क़सम से रुक जाऊँगा
तुम प्यार से बोली तो लगाओ, मैं फिर बिक जाऊँगा।

#छोड़कर #तुम्हें #मिलूँगा रोक #लो #रुक #जाऊँगा #प्यार #बोली #बिक #गमगुसार #ख़त-ए-जुदाई

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