Quotes New

Audio

Forum

Read

Contests


Write

Sign in
Wohoo!,
Dear user,
दर्द और ख़्वाहिश
दर्द और ख़्वाहिश
★★★★★

© Vivek Mishra

Tragedy

1 Minutes   13.8K    8


Content Ranking

तुम बिंधी पड़ी थीं सुईयों से

बिस्तर पर तुम लथपथ थी

और मैं पास तुम्हारे बैैठा था

हाथों में नन्हा हाथ लिये

माथे पर सहलाता था मैं

चूमता था पागल की तरह

तुम अपनी निस्तेज आँखो सें

मुझे देख रही थी एकटक

जैसे कहती हो मुझसे

पापा, मैं अभी भी ज़िन्दा हूँ।

तुम कोई तो जतन करो

मुझ को तुम यूँ तो न जाने दो।

मैं हूँ वही तुम्हारी प्यारी

जिसे भगवान से तुमने मांगा था।

पर हाय तुम्हारा ये बाप अभागा

कुछ भी तो न मैं कर सका

जिस गोद में खेली थीं

अंत भी उसी की गोद में हुआ

बहुत ही बेबस मैं लाडली

क्या करता बस इंसान ही था

इक इक पल तुमको खुद से

जाते दूर बस देखना ही था

तुम फिर आना मेरी बच्ची

हम नयन द्वार पर रखे है

तेरे आने की ख़्वाहिश में

जीवन सम्हाल रखे है। 

निस्तेज अभागा लाडली

Rate the content


Originality
Flow
Language
Cover design

Comments

Post

Some text some message..