ज़माना नहीं रहा
ज़माना नहीं रहा
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जैसे ही उसके कंधे पर किसी ने हाथ रखा, उसने घबराकर हाथ झटक दिया, मुड़कर देखा तो प्रभा थी।
"मैंने तो बड़े प्यार से हाथ रखा था, पर तुम तो ऐसे चौंकी जैसे करंट लग गया हो।" सुमन की तेज़ चलती साँसों को भाँपते हुए प्रभा ने कहा।
"यानी तुमने मुझे...।"
