STORYMIRROR

Vikash. Sahu

Romance Inspirational Others

5  

Vikash. Sahu

Romance Inspirational Others

वो दिन जो आज भी याद रह गए…

वो दिन जो आज भी याद रह गए…

5 mins
3

  वो दिन जो आज भी याद रह गए…


 वो दिन आज भी मुझे ठीक से याद है—1 जनवरी। नया साल था, और मैं पहली बार उसके पास एक चॉकलेट लेकर गया था।
 दिल बहुत तेज़ धड़क रहा था। न जाने क्यों डर भी था और उम्मीद भी। मैंने हिम्मत करके उसके सामने चॉकलेट बढ़ाई और कहा, “हैप्पी न्यू ईयर…” उसने हल्की मुस्कान के साथ चॉकलेट ले ली और बोली,

 “थैंक यू… हैप्पी न्यू ईयर टू यू।” बस इतना ही हुआ था उस दिन, लेकिन मेरे लिए वो सिर्फ़ एक मुलाकात नहीं थी… एक शुरुआत थी। धीरे-धीरे हमारी बातें बढ़ने लगीं। फोन पर बातचीत शुरू हुई, जो कभी कुछ मिनटों से शुरू होकर घंटों तक पहुँच जाती थी। हम एक ही कॉलेज में थे, इसलिए कभी-कभी मिल भी जाते थे। लेकिन लोगों की नज़रों और बातों की वजह से हम खुलकर ज़्यादा नहीं मिल पाते थे। कॉलेज के दिनों में मैं उसे अक्सर खिड़की से देखा करता था। वो अपनी क्लास में होती और मैं चुपचाप उसे देखता रहता। कभी-कभी उसकी नज़र मुझसे मिल जाती और वो मुझे देखकर हल्की-सी मुस्कुरा देती, उस मुस्कान में बहुत कुछ छुपा होता था—शर्म भी, अपनापन भी और एक अनकहा सा एहसास भी। कॉलेज में एक और आदत जो हमारे बीच खास बन गई थी—हम दोनों पानी पीने एक साथ जाया करते थे। वो अक्सर पहले निकलती थी, और मैं उसे देखकर उसके पीछे-पीछे चला जाता था। ये छोटी-सी बात हमारे दिन का हिस्सा बन चुकी थी। मेरे दोस्तों को भी हमारे बारे में पता चल चुका था। वो सब उसे जानते थे और मज़ाक में उसे “भाभी-भाभी” कहकर बुलाते थे। उस समय हम दोनों बस मुस्कुरा देते थे, लेकिन अंदर ही अंदर एक अलग-सी दुनिया बन चुकी थी। कॉलेज खत्म होने के बाद भी हमारा रिश्ता खत्म नहीं हुआ। हम एक ही शहर में थे, इसलिए कभी-कभी मिलना होता था। हम साथ घूमने भी जाते थे। उसने मेरी बात मानकर कंप्यूटर क्लास भी जॉइन कर ली थी। धीरे-धीरे वो मेरी आदत बन चुकी थी। लेकिन समय के साथ चीज़ें बदलने लगीं। उसकी ज़िंदगी में काम बढ़ गया और वो एक हॉस्पिटल में काम करने लगी। मैं भी कभी-कभी उससे मिलने वहाँ जाता था। वहाँ के लोग मुझे अच्छे से समझते थे और अपनापन भी दिखाते थे। उसकी मासूमियत… उसकी बचकानी बातें… और उसका यूँ बिना वजह हँस देना… उसका मुझे प्यार से ‘फुग्गा’ बोलना… सब कुछ मुझे उसकी तरफ और खींचता था… वो कभी बच्चों जैसी ज़िद करती थी… कभी अचानक रूठ जाती थी… और अगले ही पल खुद ही हँस पड़ती थी… जैसे गुस्सा भी उसका खेल हो… और प्यार भी… लेकिन उसके अंदर एक तूफान भी था… उसका गुस्सा बहुत तेज़ था… जब वो नाराज़ होती थी, तो शब्द भी तेज़ हो जाते थे… कभी-कभी वो चीज़ें भी तोड़ देती थी… एक बार गुस्से में उसने मेरी स्मार्टवॉच तक तोड़ दी… मैं कुछ पल चुप रह गया… फिर हम दोनों ही हँस पड़े… और अजीब बात ये थी… आज भी वो वही टूटी हुई स्मार्टवॉच संभालकर रखे हुए है… जैसे उसमें हमारी कहानी बंद हो… उसे बिल्कुल पसंद नहीं था कि मैं किसी और लड़की से बात करूँ… अगर मैं किसी से सामान्य सी बात भी कर लेता… तो वो चुप हो जाती… और उसकी चुप्पी… हज़ार सवाल कह जाती थी… “क्यों किया ऐसा?” उसका रूठना और मेरा मनाना ऐसे ही चलता रहा। फिर तीन साल ऐसे ही बीत गए—कभी हँसी, कभी झगड़े, कभी नाराज़गी और फिर वापसी। हमारा रिश्ता आसान नहीं था, लेकिन खास ज़रूर था। हम एक-दूसरे के बिना रह भी नहीं पाते थे और साथ भी पूरी तरह नहीं रह पाते थे। धीरे-धीरे एक ऐसा समय आया जब उसने मुझे बताया कि उसके लिए रिश्ते देखे जा रहे हैं। मैं अंदर से टूट गया, लेकिन उसे रोक भी नहीं सकता था। हम अलग-अलग जाति से थे, और यह सच्चाई धीरे-धीरे हमारे बीच एक दीवार बनने लगी थी। मैंने हिम्मत करके उससे कहा कि वह अपने घरवालों की पसंद से शादी कर ले। उस दिन के बाद हमारी बातें और कम हो गईं। फिर कुछ समय बाद मुझे पता चला कि उसकी सगाई तय हो गई है। सगाई में मैं भी अपने दोस्तों के साथ गया। वहाँ सब खुश थे, लेकिन मेरे अंदर एक अजीब-सा सन्नाटा था। वो मुझे देखकर मुस्कुराई—लेकिन उसकी मुस्कान में खुशी से ज़्यादा दर्द छुपा हुआ था। उस दिन मैं घर लौट रहा था, तो उसने मुझे कॉल करके सीधे घर जाने को कहा। उसकी आवाज़ में अपनापन भी था और आख़िरी फ़िक्र भी। कुछ समय बाद मैं उसकी शादी में भी गया। वो अब किसी और की हो चुकी थी। लेकिन जब भी उसकी नज़र मेरी तरफ जाती, एक अनकहा सा एहसास दोनों के बीच रह जाता था। उसका वो चेहरा आज भी मेरी नज़रों में याद है। शादी के बाद मैं चुपचाप वहाँ से निकल आया… वो दिन जो आज भी याद रह गए। रास्ते में सिर्फ़ यादें थीं—पहली मुलाकात, कॉलेज के दिन, पानी पीने साथ जाना, दोस्तों की “भाभी” वाली मस्ती, फोन की लंबी बातें, झगड़े, मस्ती, और वो हर पल जो हमें जोड़ता था। आज भी मेरे दोस्त मुझसे पूछते हैं कि तुम उसकी शादी कैसे देख पाए… कैसे सह लिया वो पल, जब सब कुछ मेरी आँखों के सामने बदल रहा था। मैं मुस्कुरा तो देता हूँ, लेकिन अंदर कहीं एक सन्नाटा आज भी जवाब देता है—कि कुछ रिश्ते सिर्फ़ याद बनकर रह जाते हैं। आज वो अपनी ज़िंदगी में आगे बढ़ चुकी है… और मैं अपनी यादों के साथ रह गया हूँ। “कई बार सोचता हूँ कि अगर हालात थोड़े अलग होते, तो शायद कहानी का अंत भी अलग होता…” लेकिन सच यह है कि कुछ रिश्ते खत्म नहीं होते… वो बस कहानी बन जाते हैं। और हमारी कहानी भी ऐसी ही थी— अधूरी, लेकिन हमेशा दिल में ज़िंदा। — एक गुमनाम शायर जो आज भी उसे याद करता है…  


Rate this content
Log in

Similar hindi story from Romance