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Hilal Saeed

Abstract


4.0  

Hilal Saeed

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वक़्त गुज़ारि

वक़्त गुज़ारि

2 mins 505 2 mins 505

एक लड़का जो बड़ी तमन्ना अपने दिल मन लेकर बड़ा होता है और सबकी तरह अपनी भी कुछ ख्वाहिशें अपने दिल में छुपा कर रखता है।

पर यह बेरहम ज़िन्दगी शायद ही कभी आपको सुनती है।


वो रफ्ता रफ्ता बड़ा होता है ख्वाहिशें पूरी होंने का वक़्त आता है, वो भी चाहता है कि कोई आए उसको रूठने पर मनाए उसको खुशियों से रू बरूह कराए, हलकी सी मुस्कान उसके चेहरे पर भी कभी कोई लाए पर कोई करीब नहीं आता।

इस बेरहम ज़िन्दगी के साथ चलता है, कुछ साथ छूट ते है, कुछ अपने रूठते है और फिर यह होता है कि वो तन्हा ही बड़ा हो जाता है।


एक खाली कमरा, अंधेरा और खामोशी, इन्हीं चीजों की फकत अब उसको तमनाह रह जाती है।

खैर छोड़ो।

कहानी यहीं खत्म नहीं होती जनाब।

 फिर उसकी ज़िन्दगी म एक शक्स आता है जो उसको एहसास दिलाता है कि वो उसके साथ है, यकीन कराता है की हमेशा साथ रहेगा।

अंधेरे म तो अपनी परछाई भी साथ छोड़ देती है तो यह शकस क्या साथ निभाता।

अब सोचता हू तो हसी आती है उन फिजूल बातों पर।


फिर उसके साथ उसको सरी दुनिया दिखाने का, साथ अपनी एक अलग दुनिया बनाने का वादा किया जाता है,

उसको उस अंधेरे से, उस कमरे से, उस तन्हाई से बाहर दुनिया म लाया जाता है। 

खामोशी उसकी ज़िन्दगी से निकाल कर उसको दुनिया की गुफ्तुगु मन उलझाया जाता है, यह रंग बदलती दुनिया से रूबरू कराया जाता है।

वह आपने सुना ही होगा।

"Different is always attractive"


बस इस बेरंग दुनिया म फिर वो रंग ढूडने लगता है फिर रफ्ता रफ्ता वक़्त गुजरता है वक़्त के साथ वो यकीन दिलाने वाला शक्स बदलता है।

और फिर,

उस तन्हा लड़के को उसके कमरे से निकल कर इस दुनिया के बीच लाकर छोड़ दिया जाता है जहां शायद इस दुनिया में आपका कभी कोई हुआ है।

जिसको कभी झूठ बोलना भी ना आता था उसको झूट बोलना भी सिखाया जाता है, यकीन तोड़ना, तन्हा छोड़ ना और बीच रास्ते पर छोड़ ना भी बड़े प्यार से सिखाया जाता है।


"खुद को ढूंडिये जनाब, खुद से कीजिए मुहब्बत;

यहां करते है लोग फ्कत वक्त गुज़ारी"

एक बार मिलकर देखिए खुद से किसी दूसरे को पाने कि ख्वाहिश 

ना रहेगी बाखुदा। 


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