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Arunima Thakur

Abstract


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Arunima Thakur

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तीसरा कौर

तीसरा कौर

10 mins 201 10 mins 201

मैं अपनी ननिहाल वर्षों बाद शायद मेरी जानकारी में जीवन में पहली बार आया था। नहीं नहीं कोई पुश्तैनी दुश्मनी नहीं। हुआ यूँ कि मेरे जन्म के कुछ वर्षों बाद ही मामा की नौकरी एक बड़े शहर में लग गई और नाना नानी सब, कुछ सालों में वहीं जाकर बस गए तो जब भी छुट्टियाँ होती हम मामा के घर जाते। अभी माँ के चचेरे भाई की बेटी की शादी है तो हम सब यहाँ आए हुए हैं I अब मेरी माँ अपने सब भाइयों की इकलौती बहन है तो शादी पर उसका होना तो जरूरी है I वैसे तो वह हर बार आती थी पर मैं अपनी परिक्षाओं और पढ़ाई के कारण नहीं आ पाया था। नाना नानी अक्सर आते रहते थे इसलिए यह घर भी अच्छी हालत में है I पर माँ के चचेरे भाइयों की सख्त गुजारिश थी कि हम उनके साथ ही रहें। दोनों घर पास पास ही है तो हम रहते यहाँ थे और खाना नाश्ता और सब काम करने के लिए वहाँ जाते थे। वहाँ मेरे उम्र के बहुत से बच्चे थे। पहली बार मिलने के बाद भी हम सब एक दूसरे से खूब घुल मिल गए थे और मॉनी दीदी जिनकी शादी होने वाली है उन्हें खूब तंग कर रहे थे। लड़का होने के कारण तैयारियों में हाथ भी बटाना पड़ रहा था। बड़े शहरों जैसा नहीं था कि हर काम ऑनलाइन हो जाए। यहाँ तो हर थोड़ी देर बाद फूल वाले को बोल कर आओ। दोना पत्तल वाले के पास से पत्तल लेकर आओ। कुल्हड़ और मंगा लो खत्म हो गयें हैं। हलवाई ने फलाँ सामान मंगवाया है, तो भाइयों के साथ बाइक पर शहर घूमने में बहुत मजा आ रहा था। रात को महफिल जमती अंताक्षरी होती दमशेराट खेलते।

एक दिन की बात है उस दिन शायद दीदी की हल्दी हुई थी I दीदी थोड़ा उदास थी। यह वह पल था जो उन्हें एहसास दिला रहा था कि अब तो यह सब छोड़ कर जाना पड़ेगा। हम सब ने काफी कोशिशें कि उन्हें मनाने की पर भाभी, नानी, मामी इन सब की आँखें भी नम थी। तभी भैया को याद आया की मॉनी को आइसक्रीम बहुत अच्छी लगती है। चल उसके लिए आइसक्रीम लेकर आते हैं। इतनी रात गए ? वह हँसे, हाँ वह चौक में कोने पर की जो दुकान है ना, वह शायद अभी खुली होगी। हम दोनों फटाफट निकल गए। दुकान पर जाकर देखा तो उतने कोन नहीं थे जितने हमें चाहिए थे। तो हमने ब्रिक फैमिली पैक खरीद लिए।

भैया बोले पर मॉनी को तो कॉर्नेटो कोन ही पसंद है। चल उसके लिए एक कोन ले लेते हैं। तो मैंने बोला भैया मुझे भी। तो वह हँसे और बोलें ठीक है तो फिर तू अभी खा ले। घर पर लेकर गया तो सब लोगों के बीच में तुझे इस एक कोन को भी साझा करना पड़ेगा। जब से भैया आइसक्रीम पैक करवा कर पैसे वगैरह दे रहे थे। मैं कोन खोल कर खाने लगा। तभी मेरे फोन पर किसी का मैसेज आया तो मैं कोन खाते हुए और मैसेज पढ़ते हुए बेध्यानी में चलता चला जा रहा था। तभी शायद भैया ने आवाज दी तो मैं पीछे मुड़ा और मेरे बिल्कुल पीछे आ रही लड़की से टकरा गया। हे भगवान लड़की ! अब तो गया काम से, अब यह एक घंटे लेक्चर देगी, मुझे गालियाँ देगी। मैंने हड़बड़ाकर सॉरी बोला I पर उसे देखते ही मेरी और मुझे देखते ही उसकी हँसी छूट गई। हुआ यूँ था कि शायद टकराते समय फोन को गिरने से बचाने के चक्कर में हमने ध्यान नहीं दिया कि मेरी आइसक्रीम उसके मुँह पर और उसकी आइसक्रीम मेरे मुँह पर लग गई थी। हम जोकर लग रहें थे। उसने हँसते हुए बोला बहुत अच्छे लग रहे हो। मैं बोला तुम भी। वह बोली एक सेल्फी हो जाए। मैं तो उसका मुँह ही देखने लगा। कैसी अजीब लड़की है, गाली देने के बजाय सेल्फी। मैंने कहा, क्या यह आपका शौक है ? हर टकराने वाले के साथ सेल्फी निकालती है। वह पहले तो मुझे घूर कर देखी, फिर हँसते बोली नहीं पहली बार टकरायी हूँ इस लिए सेल्फी निकाल रही हूँ। फिर हम दोनों ने मजेदार पाेज (मुख मुद्रायें) बनाते हुए सेल्फी खींची l तभी भैया वहाँ आ गए और वह भी मुझे देखकर हँस पड़े और उसकी ओर देखकर बोले और तान्या कैसी हो ? तनय कैसा है ? शादी में आ रही हो ना ? उन दोनों ने आपस में कुछ देर बातें की और हम वहाँ से निकल गए। रास्ते में भैया ने मुझे खुद से बताया यह तनय और तान्या जुड़वा भाई बहन है और रीमा के सहपाठी हैं। रीमा मेरे मझंले मामा की बेटी, शायद मेरी उम्र की ही होगी। फिर रास्ते भर मैं तान्या के बारे में सोचता रहा। कितनी प्यारी, शायद वह भी मेरी उम्र की होगी। चलो अच्छा है शादी में मुलाकात तो होगी। यह उम्र ही ऐसी थी उस समय हर लड़की अच्छी लगती थी I

दो दिन बाद संगीत था सब बहनों और भाइयों की सहेलियाँ और दोस्त आए थे। खूब नाच गाना हो रहा था। वह और तनय भी आए थे। हमने खूब गप्पे मारी। मजे की बात हमारी रुचियाँ, पसंद, नापसंद सब लगभग एक जैसे ही थे। हम बातें कर रहे थे तभी उनकी माँ वहां आई। मैंने पता नहीं क्यों शायद शिष्टतावश झुक कर उनके पाँव छुए। तान्या ने हँसते हुए बताया, माँ यह वही आइसक्रीम वाला लड़का। उसकी माँ ने मुझे गले से लगा लिया, सिर पर हाथ फेरा तो तान्या व तनय हँसते हुए बोले माँ यह तुम्हारा तीसरा कौर नहीं है। तीसरा कौर. . ? तबसे किसी ने हमें बुलाया और हम सब वापस डांस करने चले गए। बाद में लगातार मुझे लग रहा था मानो वह मुझे देख रही हैं। सबसे मेरे बारे में पूछ रही है। किशोर मन खुश होने लगा कहीं वह तान्या के लिए मेरे बारे में तो नहीं सोच रही है I चलते समय भी उन्होंने मेरे सिर पर हाथ फेरा और बोला बेटा तुमने अपनी माँ से नहीं मिलवाया। मेरा दिल तो खुशी के मारे झूमने लगा। मतलब बात लगभग तय है। मैंने इधर उधर देखते हुए कहा रूकिये मिलवाता हूँ। पर मुझे माँ कहीं दिखाई नहीं दी तो वह बोली कोई बात नहीं कल मिलवा देना। मैंने माँ को बताया तो उन्होंने कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखाई ना मेरी बातों में ना ही उनसे मिलने में। मैंने सोचा हाँ भाई लड़के की माँ है तो थोड़ा एटीट्यूट दिखाएंगी ही। कोई नहीं मैं भी उन्हें मना ही लूंगा।

दूसरे दिन सब तैयार हुए। हॉल पर पहुँचे। बहनों की सारी सहेलियाँ खूब सज सवंर कर आई थी।तान्या भी बड़ी खूबसूरत लग रही थी। अजीब एहसास था वह सुंदर तो थी पर उसे देखकर सीटी मारने का मन नहीं करता था, चाँद की तरह स्निग्ध।लड़कियों के बारे में यह मेरा पहला अनुभव था तो मुझे समझ में नहीं आ रहा था। वह लोग जो बोलते हैं ना कि पत्ते उड़ने लगते हैं, मधुर संगीत बजता है, दिल में कुछ होता है, वैसी कोई भावना नहीं आ रही थी। पर कुछ तो था जो उसकी ओर खींच रहा था। शाम को मेरे बहुत जोर देने पर भी माँ तान्या की मम्मी से मिलने के लिए समय ही निकाल नहीं पा रही थी। उन्होंने मुझसे वादा किया हम उनके घर जाकर मिल लेंगे। बात भी सही थी माँ अपने भाइयों की इकलौती बहन जो ठहरी और लड़की की इकलौती बुआ, तो उनको ही सब काम देखना था। जयमाल हो गया था। खाना खाते समय तान्या और तनय आपस में कुछ तीसरा कौर कहकर हँसे तो मैंने पूछा यह तीसरा कौर का क्या चक्कर है ? उस दिन भी जब आँटी ने मुझे गले लगाया था तो तुम यही बोल कर हँसे थे। वह बोले जाने दो कुछ लंबी कहानी है, हमारे जन्म से जुड़ी हुई।

रात को शादी लगने पर जब हम सब बैठे थे। सब लड़कियाँ दीदी को घेर कर जीजा जी के साथ चुहल कर रही थी और लड़के उस पक्ष की लड़कियों के साथ मजाक कर रहे थे। मैं और तनय साथ ही बैठे थे, थोड़ा बोर हो रहे थे। तो मैंने वापस पूछा, यह तीसरा कौर की कहानी क्या है ? भाई बता दे क्योंकि आज के बाद तो हम वापस शायद कभी मिलेंगे नहीं। तो तनय बोला, अरे यार कुछ नहीं, जब हम होने वाले थे तो पुराना जमाना था और हम पहले गाँव में रहते थे तो माँ ने सोनोग्राफी वगैरह नहीं करवाया था। बस गाँव के डॉक्टर ने अंदाजे से बताया था कि शायद जुड़वा बच्चे हैं। आप शहर में चेकअप करवा लीजिए। जुड़वा बच्चों के नाम से तो माँ डर गई कि भगवान दो-दो बच्चे को एक साथ कैसे संभालूगी। दादी के इंकार करने पर और अन्य कारणों के चलते सोनोग्राफी भी नहीं करवा सके। जब माँ प्रसव के लिए शहर गयी तो उनको तीन बच्चे हुए। वह घबरा गयी तीन तीन बच्चों को एक साथ कैसे पालूंगी ? तभी आपरेशन थियेटर में उनके बगल वाली टेबल पर औरत का बच्चा मरा हुआ पैदा हुआ। औरत बहुत रो रही थी। तो पता नहीं किस भावना के वशीभूत होकर माँ ने अपना एक बच्चा उसे दे दिया। बाद में पिताजी को पता चला तो पहले तो वह बहुत गुस्सा हुए फिर जाकर बच्चा वापस लाने की कोशिश भी की। पर वह औरत शायद जानती थी ऐसा हो सकता है इसलिए वह बच्चा लेकर चली गई थी I चूँकि डाक्टर व नर्स की उपस्थिति में माँ अपनी स्वीकृति दी थी इसलिए पिताजी कुछ भी नहीं कर पाए। पता नहीं उस औरत को बचाने के लिए या ना जाने क्यों अस्पताल ने भी उसका पता हमें नहीं दिया। पिताजी ने तो हम दोनों को पा कर संतोष कर लिया और यह बात घर में किसी को भी नहीं बताई। पर शायद माँ का अपराध बोध माँ पर हावी होने लगा था। माँ हमेशा तीन थालियाँ लगाती। हमें अपने हाथ से खाना खिलाते समय भी एक तीसरा कौर निकालती जाती जिसे बाद से शायद खुद खाती या चिडियो को डाल देती ,खिलौने भी तीन ही लाती थी यहाँ तक कि कपड़े भी। फिर बाद में उन कपड़ों और खिलौनों को पिताजी गरीबों में बाँट देते और खाना किसी गरीब को खिला देते। इसीलिए तान्या माँ को हमेशा परेशान करती है। वैसे हम लोग हमेशा कहते हैं कि माँ आपने अच्छा किया, किसी को खुशियाँ देकर। पर माँ को लगता है अगर उस औरत को खुद का बच्चा हुआ होगा और वह हमारे भाई को प्यार नहीं दे पा रही होगी तो ? माँ यही सब सोचती है और घुटती रहती है।

मैंने अपने मन में राहत की साँस ली। चलो मैं तो पक्का वह तीसरा कौर नहीं हूँ। मैं तो अपने माँ पापा का बेटा हूँ। नहीं तो तान्या मेरी बहन . . . हे भगवान . . . I फिर दिल ने कहा हाँ तो. . . ? हर्ज ही क्या है ? वह है ही इतनी प्यारी। वह तुझे अच्छी भी लगती है वह तेरी बहन जैसी भी तो हो सकती है। वैसे भी तुझे बहन भी तो नहीं है। हाँ यार बात तो सही है। पर नहीं . . . |

शादी-वादी निपट गई। एक दिन रीमा से पता पूछ कर माँ अपने वादे के अनुसार मुझे लेकर उनके घर गयी। आँटी ने दरवाजा खोला I तनय और तान्या बैठकर आइसक्रीम खा रहे थे। मैंने उन्हें हाथ से विश किया। माँ तो आंटी के पैरों पर ही गिर पड़ी बोली, तुम्हारी गुनहगार हूँ जो चाहो सजा दो। इतनी बड़ी खुशी पाकर खुदगर्ज हो गई थी। इसलिए नाम पता बगैर बताए चली गई थी। यह हो क्या रहा है ? माँ ऐसी कैसी बातें कर रही हैं ? आँटी ने उठाकर माँ को गले से लगा लिया और बोली देने का निर्णय तो मेरा ही था। मैं खुद कमजोर पड़ गई थी कि तीन - तीन बच्चे कैसे पालूँगी। तुमने तो मेरी मदद ही की थी। आज मैं निश्चिंत हो गई तुम्हारी परवरिश देखकर। अब मुझे कोई भी पछतावा नहीं है। मैं तनय तान्या यह सब देख सुन रहे थे। तान्या तो भागती हुई आई और मेरे गले लग गयी , तो तुम हो माँ का तीसरा कौर। हे ब्रो वी आर सिबलिंग। तनय तान्या बचपन से जानते थे उनके लिए यह स्वीकार करना आसान था। मुश्किल तो मेरे लिए भी नहीं था। पर आइसक्रीम पार्लर में हुई उस लड़की से मुलाकात मुझे मेरे बिछड़े भाई-बहन से मिला देगी किसे पता था। उस दिन वह ना मिली होती तो शायद मेरे जीवन का यह राज राज ही रह जाता।

क्या अच्छा होता ना राज राज ही रहता या. . . . . . यह तो वक्त ही बताएगा अभी तो हम पाँचों बहुत खुश है I


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