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Akanksha Gupta

Drama


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Akanksha Gupta

Drama


सुखद संयोग

सुखद संयोग

2 mins 240 2 mins 240

कुछ समय से उत्तर को बुखार आया था, उसके गले में जकड़न हो रही थी। उसे ना तो किसी चीज की सुगंध आ रही थी और ना ही किसी चीज का स्वाद। सभी लोग चिंता में थे कि इस महामारी का प्रकोप कही उनके परिवार पर तो नहीं गिरने वाला है।


समाचार पत्रों और चैनलों पर दिखाई जा रही मृत्यु की हृदयविदारक खबरें और दिन-ब-दिन इस बीमारी के बढ़ते हुए मामलों को देखकर सभी की चिंता और बढ़ गई थी।

फिर सभी लोगों के कहने पर जब उत्तर टेस्ट कराने के लिए अस्पताल गया तो वहाँ की हालत देखकर उसके होश उड़ गए। मरीजों की लंबी कतार, फर्श पर बीमार लोगों की भीड़ उसे अंदर ही अंदर डरा रहे थे। फिर भी उसने हिम्मत करके टेस्ट कराया और अपने घर आ गया।

रिपोर्ट आने में तीन चार दिनों का वक्त था। परिवार के सभी लोग रिपोर्ट के नॉर्मल आने की प्रार्थना कर रहे थे लेकिन जब रिपोर्ट आई तो सभी के होश उड़ गए। उत्तर को बीमारी लग चुकी थीं। फिर आनन फानन में उसे सबसे अलग कमरे में शिफ्ट करने का फैसला लिया गया।

अब उत्तर को भी डर लगने लगा। वो एक बार रिपोर्ट अपनी आँखों से देखकर खुद को तसल्ली देना चाहता था। जैसे ही उसने रिपोर्ट देखी तो उसकी आँखों में चमक आ गई। 

दरअसल रिपोर्ट में उसके नाम के बाद किसी और घर का पता लिखा था जिसपर किसी का भी ध्यान नहीं गया। जब उसने यह बात परिवार के सभी सदस्यों को बताई तो उनके चेहरे ऐसे थे जैसे उन्होंने कोई चुटकुला सुन लिया हो।

खैर सभी खुश थे कि भगवान ने उन्हें इस बीमारी से सुरक्षित कर दिया था लेकिन उत्तर सोच रहा था कि जो उसके लिए सुखद संयोग हैं और किसी के लिए दुखद समाचार होने वाला था।


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