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हरि शंकर गोयल

Comedy Romance

4  

हरि शंकर गोयल

Comedy Romance

सबसे बड़ा झूठ

सबसे बड़ा झूठ

6 mins
351



यह कहानी "थाली का बैंगन" मुहावरे को ध्यान में रखकर लिखी गई है । 


चार दोस्त थे । सुरेश, दिनेश, महेश और नरेश । चारों ही पक्के जिगरी थे । रोजाना शाम को चारों दोस्त एक बार जरूर मिलते थे । मिले बिना उन्हें चैन नहीं आता था । मिलने के बाद जाम के दौर चलते और चलता साथ में हंसी मजाक का दौर । जिंदगी का असली आनंद इसी मीटिंग में आता था उन्हें । चार शरीर एक जान नजर आते थे वे लोग । उनमें कभी आपस में झगड़ा तो क्या , मन मुटाव भी नहीं हुआ था । इस बात का उन्हें गुमान भी था । लोग उनकी दोस्ती की मिसाल पूरे गांव में दिया करते थे । 


एक दिन शराब के दौर और हंसी मजाक की महफिल के बीच अपनी पुरानी यादों का तरन्नुम छिड़ गया । स्कूल और कॉलेज की लाइफ सबको "बेस्ट" लाइफ लगती है । इस विषय पर कितनी ही बात कर लो, कम ही लगती है । 


सब यार दोस्तों में जब कॉलेज के दिनों का जिक्र छिड़ जाये और "गर्लफ्रेंड" की बात ना हो तो फिर क्या मजा है । सब दोस्त अपनी अपनी गर्लफ्रेंड्स के किस्से सुनाने लगे । मजे की बात ये थी कि शादी किसी की भी नहीं हुई अपनी किसी गर्लफ्रेंड के साथ । इस बात पर सब लोग खूब हंसे पर सुरेश खामोश ही रहा । 

"तू चुप क्यों बैठा है यार" ? दिनेश ने सुरेश को कुरेदा । सुरेश फिर भी चुप ही रहा । 

"क्या तेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं थी ? अगर ऐसा था तो फिर तेरी कॉलेज की लाइफ भी क्या लाइफ थी" ? महेश उसे चिढाते हुए बोला । सुरेश फिर भी खामोश ही रहा 

"तुझे किसी ने घास ही नहीं डाली थी क्या ? वैसे तेरे चेहरे पर हमेशा बारह ही बजे रहते हैं तो कौन सी लड़की तुझे घास डालेगी" ? इस बार नरेश ने छक्का जड़ दिया । 


इन सब बातों से सुरेश उकता गया था । चिढ़कर बोला 

"कोई जरूरी तो नहीं है कि कॉलेज में सबकी गर्लफ्रेंड हो ही । मैं किसी गर्लफ्रेंड में विश्वास नहीं करता । और कोई जरूरी तो नहीं कि शादी गर्लफ्रेंड से ही हो । तुम सबकी शादी कौन सी अपनी गर्लफ्रेंड से हो ही गई थी । मेरा मानना है कि जिससे शादी करो, प्रेम भी उसी से करो । गर्लफ्रेंड का कोई चक्कर ही मत रखो । इसलिए मैंने कभी कोई गर्लफ्रेंड बनाई ही नहीं । मैं तो केवल अपनी पत्नी से ही प्रेम करता हूं । और किसी लड़की की ओर आंख उठाकर भी नहीं देखता" । 

सुरेश की इस बात पर बाकी तीनों दोस्त खिलखिला कर हंस पड़े । हंसते हंसते उनके पेट में बल पड़ गये तो इससे सुरेश और चिढ गया और गुस्से से बोला 

"तुम लोगों को मेरी बात पर यकीन नहीं है ना ? तो जाओ, मेरी पत्नी से पूछकर आ जाओ" । उसके चेहरे पर गजब का आत्मविश्वास था । 

तीनों दोस्त कहने लगे "तू सरासर झूठ बोल रहा है साले, पुरुष की तो फितरत ही ऐसी है कि वह हसीनों के पीछे भागता ही है । सौन्दर्य के सामने सभी नतमस्तक होते हैं । आदमी तो थाली का बैंगन होता है । जहां भी कोई सुंदर स्त्री देखी, उधर ही लुढ़क जाता है । तू कोई स्पेशल है क्या ? अपने मुंह मिंया मिठ्ठू बन रहा है साला" । 

"मत मानो तुम लोग , मगर सच यही है" । सुरेश ताव में आ गया । 

"ऐसे कैसे मान लें ? ये दुनिया का सबसे बड़ा झूठ है कि आदमी केवल अपनी पत्नी से ही प्यार करता है । पुरुषों का दिल तो इतना विशाल है कि उसमें दुनिया की हर सुंदरी निवास करती है । यह एक कटु सत्य है , तुम इसे मानो चाहे मत मानो" नरेश बोला 

"मैं नहीं मानता इसे । मेरे दिल में केवल मेरी पत्नी निवास करती है और कोई नहीं । कोई कितनी भी सुंदर स्त्री हो, वह मुझे आकर्षित नहीं कर सकती है" । उसने गर्व से कहा । तीनों दोस्तों ने यह चुनौती स्वीकार कर ली । 


कुछ दिनों बाद सुरेश की पत्नी मायके चली गई । नरेश ने एक दिन उसे अपने घर पर खाने के लिए बुलाया । ठीक आठ बजे सुरेश नरेश के घर पहुंच गया । दरवाजा एक अति सुंदर स्त्री ने खोला । उसे देखकर सुरेश हतप्रभ रह गया । इतनी सुन्दर स्त्री भी हो सकती है क्या जमाने में, वह सोचने लगा । उसके बाद सुरेश और नरेश ड्राइंग रूम में बैठ गए । नरेश ने घंटी बजाई तो एक सुंदर लड़की हाजिर हो गई । सुरेश उसे देखकर भौंचक्का रह गया । यह लड़की पहली वाली लड़की से भी ज्यादा खूबसूरत थी । उसने बहुत टाइट वस्त्र पहन रखे थे जिससे उसके समस्त अंग स्पष्ट दिखाई दे रहे थे । उसके वस्त्र भी बहुत छोटे और लगभग पारदर्शी थे । उसे देखकर सुरेश की हालत खराब होने लगी । 


वह लड़की वहीं बैठकर उन दोनों को जाम पिलाने लगी । सुरेश पहले ही उसके हुस्न के नशे में मदहोश था ही, अब शराब के नशे में मदमस्त हो गया था । जब वह लड़की जाम पकड़ा रही थी तो सुरेश ने जाम के बजाय उसका हाथ पकड़ लिया । वह लड़की इससे जरा भी विचलित नहीं हुई बल्कि उसने सुरेश को बड़ी दिलकश अदा से देखा । उसकी इस अदा पर सुरेश रीझ गया और उसने उस लड़की का हाथ चूम लिया । 


यह देखकर नरेश कहने लगा "यह तेरे काबिल नहीं है सुरेश । तेरे लिए तो मैंने विशेष इंतजाम किया है । पहले खाना खा लेते हैं फिर तू उसके साथ मौज मस्ती करना" । सुरेश को विश्वास ही नहीं हुआ कि उससे भी बेहतर कोई और लड़की हो सकती है । वह खाने की मेज पर बैठ गया । 


एक हुस्न परी उन दोनों के लिए खाना लगाने लगी । उसके सौन्दर्य के सामने उर्वशी और मेनका का सौन्दर्य फीका लग रहा था । उसका अनावृत ऊपरी तन सुरेश की जुगुप्सा बढ़ाने के लिये पर्याप्त था । सुरेश से अब सहन नहीं हो पा रहा था । उसने नरेश से कहा "मुझसे और अधिक सहन नहीं हो रहा है यार । मुझे पहले इस सुंदर लड़की को "खाना" है, ये खाना तो मैं बाद में खा लूंगा" । 

"थोड़ा सब्र तो रख मेरे भाई । तू तो थाली के बैंगन की तरह जो भी लड़की देखी, उधर ही लुढ़क जाता है । इससे भी बेहतर लड़की की व्यवस्था कर रखी है खास तेरे लिये" । नरेश मुस्कुराता हुआ बोला और उसने जोर से ताली बजाई । उसके ताली बजाते ही एक संगमरमरी बदन की लड़की पूर्ण नग्न अवस्था में उनके सामने हाजिर हो गई । उसकी मादकता और सुंदरता को देखकर सुरेश पागल सा होकर उससे बुरी तरह लिपट गया । 


इतने में दूसरे कमरे से उसके दोनों दोस्त भी निकल कर उसके सामने आ गये और कहने लगे "तू उस दिन तो बड़ी बड़ी डींगें हांक रहा था साले । आज क्या हो गया तुझे ? तू तो कह रहा था कि अपनी पत्नी के अतिरिक्त और किसी स्त्री की ओर देखता भी नहीं है तू । पर यहां तो तुझे एक एक पल दूर रहना भारी पड़ने लगा था । इसीलिए हमने उस दिन कहा था कि मर्दों की फितरत ही ऐसी है कि वे सुन्दर स्त्री की ओर अवश्य ही आकर्षित होते हैं । उनसे बच नहीं सकते हैं । सुंदरियों के आकर्षण से तो बड़े बड़े ॠषि मुनि और देवता भी नहीं बचे हैं, इंसान की तो औकात ही क्या है । इसलिए अगर कोई यह कहता है कि वह इस आकर्षण से दूर है तो यह संसार का सबसे बड़ा झूठ है और कुछ नहीं" । 


सुरेश को अपनी गलती पता चल गई थी । वह इस परम सत्य को समझ गया था कि सुंदर स्त्री सबसे बड़ा आकर्षण का केन्द्र है । 


 



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