Hansa Shukla

Inspirational


4.4  

Hansa Shukla

Inspirational


रोशनी

रोशनी

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तुलसी चिंतित थी आज ननकू दीवाली के पहले दिन अकेले बाजार गया है तुलसी को डर था शाम को शहर से गाँव आते समय दारू की दुकान में ननकू रुक ना जाये उसे पता था ननकू खुद पीने नहीं जाता लेकिन गांव के आदमी मिल जाये और ननकू को पीने के लिये कहे तो वह मना नहीं कर पाता, बल्कि पीते-पीते अपने कमाये सारे रुपये पीने में खर्च कर देता है और घर के जरूरी सामान लेना भी भूल जाता है बस यही एक ननकू की कमजोरी थी। तुलसी को याद हैं पिछले वर्ष दीवाली के दो दिन पहले छोटा बेटा सूरज बुखार में तप रहा था वह ननकू के साथ बाजार नहीं जा पायी थी बेटे के पास घर में रुक गई थी और वह ननकू को बार-बार समझाकर भेजी थी कि सब्जी, फल बेचकर शहर के डॉक्टर से सूरज के लिए दवा लेते आना, गाँव का कोई भी आदमी भट्टी चलने कहे तो मत जाना सीधे घर आना अपने और बच्चों की कसम देकर उसे विदा की मन ही मन देवी माँ से प्रार्थना की ननकू को सदबुद्धि देना माँ उसका समान जल्दी बिक जाये और सूरज की दवा लेकर वह सीधे घर आये लेकिन कहते है ना कि आदमी का मन जिस आशंका से डरे वह काम जरूर होता है ननकू भी पूरी सब्जी बिक जाने पर खुश था डॉक्टर से मिलकर सूरज के लिए दवा लेकर जल्दी-जल्दी घर आ रहा था। चौराहे में गाँव के महेंद्र और सोनू को देखकर भी अनदेखा करते हुए साइकिल आगे बढ़ाया ही था कि दौड़ते हुए सोनू ने आवाज दी ननकू आज नाराज हो क्या हमारे साथ नहीं चलोगे ननकू ने बेटे की तबीयत की बात बताकर साइकिल फिर बढ़ा दी सोनू ने पीछे से साइकिल को रोककर कहा अरे जल्दी चल महेंद्र ने तो दारू की दो बोतल ले ली है बस दोस्तों के साथ दो-चार घुट पी लेना फिर तो तुम्हारी साइकिल हवा से बात करेगी पहुंच जाना जल्दी घर और बेटे को दवा खिला देना।                                                                 ननकू सोनू की बात में आकर उसके साथ चल दिया फिर पीने का जो दौर चला वह रात नौ बजे खत्म हुआ ननकू लड़खड़ाते हुए जब दस बजे घर पहुंचा तो तुलसी सूरज को लेकर डॉक्टर के पास शहर गई थी और बेटी राधा दरवाजे में अकेले बैठी थी घर में चूल्हा नहीं जला था राधा का फूल से चेहरा डर और भूख से पीला पड़ गया था। ननकू नशे में बार -बार तुलसी से माफी मांग रहा था और सूरज को दवा खाने कह रहा था सहमी हुई राधा पिता को नशे में ऐसे बड़बड़ाते देखकर चुपचाप सो गई। सवेरे ननकू का नशा उतरा तब उसे रात की बात समझ आई उसे पश्चाताप हो रहा था कि राधा ने शाम से कुछ भी खाया नहीं है और तुलसी अकेले शहर में बेटे को लेकर किस डॉक्टर के पास गई होगी किसी ने उसकी मदद की होगी या नहीं उसे तुलसी और सूरज की चिंता हो रही थी । वह राधा को नाश्ता बनाकर दिया और उसे समझाया कि वह तुलसी और सूरज को खोजने शहर जा रहा है और शाम तक आ जायेगा, राधा ने रोते हुए कहा बाबू मुझे भी ले चलो अकेले डर लगता है और शाम को आप पीने चले गए माँ सूरज को लेकर नहीं आयी रही तो मैं डर में मर जाऊँगी, ननकू ने राधा के चेहरे में डर और मासूमियत के जो भाव देखा उसे पीने से घृणा हो रही थी वह राधा के सिर पर प्यार से हाथ फेरते हुए बोला बेटी आज से बाबू दारू को हाथ नहीं लगाएगा देवी माँ की सौगंध शहर से तेरी माँ और सूरज को लेकर जल्दी वापस आ जाऊँगा तू तो मेरी बहादुर बिटिया है डरना मत। शाम को ननकू तुलसी और सूरज को लेकर घर आ गया सूरज का बुखार कुछ कम हो गया था लेकिन तुलसी अभी भी नाराज थी वह ननकू से बात नहीं कर रही थी। पिछले साल की बात सोचते सोचते शाम हो गया तुलसी को लगा आज दीवाली के पहले दिन राधा को तेज बुखार है और ननकू अकेले बाजार गया है और लौटते में उसे डॉक्टर से मिलकर राधा के लिए दवा भी लाना है पीने वालों का क्या कहीं बैठ जाये तो उन्हें कुछ ध्यान कहाँ रहता है ऊहापोह में तुलसी राधा के माथे से ठंडे पानी की पट्टी बदलकर लक्ष्मी माँ और घर के दरवाजे पर दीया रखने चली गयी दरवाजे की आहट से बाहर गई तो ननकू राधा की दवाई के साथ, बच्चों के लिए पटाखे, नए कपड़े और तुलसी के लिए नयी साड़ी लाया था तुलसी को सब समान देकर बोला, राधा को दवाई दे दे फिर तुम लोग तैयार हो जाओ फिर सब लक्ष्मी माँ की पूजा करेंगे। तुलसी जल्दी से देवी माँ के सामने जाकर कहने लगी माँ ननकू आज के दिन दारू नहीं पिया सब आपकी कृपा है, मेरे ननकू पर अपनी कृपा बनाये रखियेगा माँ। तुलसी जल्दी से अंदर के कमरे से नया सलूखा(शर्ट) निकालकर ननकू को देते हुये बोली तुम भी जल्दी तैयार हो जाओ मैं चाय बनाती हूँ फिर सब देवी माँ की पूजा कर दिया जलाएंगे। तुलसी बहुत खुश थी आज उसका घर दीये के साथ विश्वास की रोशनी से रोशन हो रहा था।


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