Read a tale of endurance, will & a daring fight against Covid. Click here for "The Stalwarts" by Soni Shalini.
Read a tale of endurance, will & a daring fight against Covid. Click here for "The Stalwarts" by Soni Shalini.

हरि शंकर गोयल

Horror Crime Thriller

3  

हरि शंकर गोयल

Horror Crime Thriller

रहस्यमई जंगल

रहस्यमई जंगल

5 mins
209


देवेश की नियुक्ति सरिस्का अभयारण्य, अलवर में हो गई थी। वह एक आई एफ एस अधिकारी है। इससे पहले वह छत्तीसगढ़ के जंगलों में पदस्थापित रहा था। वहां पर उसने जंगल और जंगली जानवर बचाने के लिए जो काम किये थे उनको देखकर ही उसे सरिस्का में भेजा गया था। दरअसल सरिस्का अभयारण्य में स्थिति बहुत अधिक रहस्यमई थी। इस घने जंगल में लूट खसोट की घटनाएं नहीं होती थीं मगर बलात्कार के बाद हत्या होने की कई घटनाएं हो चुकी थी। टाइगर की हड्डियों के अवशेष भी पाए गए थे। मगर खाल, खुर वगैरह दिखाई नहीं दिए। इससे लगता था कि टाइगर्स का शिकार किया जा रहा था और उनकी खाल, दांत, खुर वगैरह का धंधा किया जा रहा था। वन विभाग और पुलिस दोनों विभाग अपने अपने स्तर से जांच कर चुके थे मगर कहीं कोई सुराग हाथ नहीं लग रहा था। ऐसा लगता था कि इन घटनाओं का मुख्य उद्देश्य यह था कि लोगों को डराया जाए जिससे इस जंगल में लोगों का आना-जाना बंद हो जाए फिर जंगली जानवरों का शिकार करके उनकी खाल, दांत, खुर और दूसरे अंग बेचे जा सकें। इसी के लिए निर्दोष लोगों की जान ली गई थी। 

बलात्कार और हत्याओं की घटनाएं ज्यादा होने के कारण धीरे धीरे पर्यटक भी कम होने लगे थे। देवेश से उम्मीद थी कि वह इस रहस्यमई जंगल की स्थिति सुधारे। इसलिए राज्य सरकार ने केन्द्र सरकार से विशेष आग्रह कर देवेश की सेवाएं पांच साल के लिए ले ली थीं। 

देवेश भी एक कर्मठ, ईमानदार और बुद्धिमान अधिकारी था। सबसे पहले उसने पूरा जंगल देखा। उसे पूरा जंगल देखने में ही सात दिन लग गए। इतना घना जंगल उसने पहले नहीं देखा था। एक बार अगर कोई रास्ता भटक जाए तो फिर वह जंगल से बाहर नहीं निकल सकता है। उसे यह बात समझ में आ गई कि जिस किसी भी आदमी ने इस जंगल को बहुत अधिक रहस्यमई बना दिया है वह बहुत चालाक और शातिर है। वह इस जंगल के चप्पे-चप्पे से वाकिफ है। वह या तो वन विभाग का कोई कर्मचारी है या फिर शातिर अपराधी। वह जो भी कोई है, है बड़ा ही धूर्त। उससे निबटने के लिए कोई सॉलिड योजना होनी चाहिए। फिर, वन विभाग के कर्मचारियों की भी क्या कोई मिलीभगत है या नहीं ? यह जानना भी जरूरी था। 

देवेश ने एक प्लान तैयार किया। उसे कुछ खुफिया कैमरे चाहिए थे जो जंगल में पेड़ों पर लगा कर खुफिया जानकारी लेने के काम आएं। जंगल का चप्पा-चप्पा जाना पहचाना होना चाहिए, यह सोचकर उसने जंगल के इतने चक्कर काटे कि उसे रास्तों की कुछ कुछ पहचान होने लगी। इसके अलावा उसने कुछ गुप्त संकेत तैयार किए और पेड़ों पर वे संकेत लगवा दिए। स्टाफ ने बहुत कोशिश की कि उनका मतलब समझ आ जाए लेकिन वे ऐसी अबूझ पहेली थे जिसका हल केवल देवेश के ही पास था। 

सरकार से विशेष आग्रह करवाकर खुफिया कैमरे और बहुत सारे आधुनिक उपकरण खरीद लिए उसने। जब यह सारी व्यवस्था हो गई जिसमें लगभग चार पांच माह लगे। इस अवधि में उसे कुछ वफादार स्टाफ की पहचान हो गई और कुछ बदमाश अधिकारी / कर्मचारियों की भी पहचान हो गई। बदमाश अधिकारियों का स्थानांतरण वहां से कहीं दूर करवा दिया गया और कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी गई। स्टाफ में उसका दबदबा कायम हो गया। 

एक दिन उसने यह जांचने के लिए कि उसकी सूचना लीक होती है या नहीं, उसने अपने स्टाफ के सामने कहा "कल दिल्ली से एक बस आ रही है जो टाइगर्स देखेगी। टाइगर्स के मूवमेंट पर नजर रखो और हमें उनकी लोकेशन बताते रहो जिससे उन पर्यटकों को टाइगर अवश्य दिख जाए। आजकल इस अभयारण्य में कोई पर्यटक आता ही नहीं है। इन पर्यटकों को विश्वास दिलाना होगा कि रहस्यमई नाम की कोई चीज नहीं होती है और उनके मन से डर निकालना बहुत जरूरी है, इसलिए यह विजिट अच्छी होनी चाहिए" 

यह कहकर वह अपने घर चला गया। खुफिया कैमरों का मॉनीटर वहीं लगवाया था उसने। वह लगातार सभी कैमरों पर निगाह बनाए रहा। रात के ग्यारह बजे कुछ परिछाइयां सी नजर आने लगी उसे। उसने उनकी लोकेशन ले ली। वे लोग वहां कहीं छुप गए थे। वह समझ गया था कि उसके कार्यालय से सूचनाएं लीक होती हैं। 

दूसरे दिन ऑफिस आते ही उसने सबसे पहले बताया कि दिल्ली से आने वाले दल का कार्यक्रम एक दिन आगे खिसक गया है। और यह कहकर वह फिर घर चला गया। 

घर जाकर उसने फिर से खुफिया कैमरे वॉच करने शुरू कर दिए जहां कल रात को कुछ गतिविधियां नजर आईं थीं। थोड़ी देर में उसने देखा कि कुछ लोग झाड़ियों से निकल कर एक जगह एकत्रित हो गए हैं। आठ दस आदमी थे। ग्रामीण लग रहे थे। वे लोग आपस में बात करने लग गए। कैमरों को ज़ूम करके उनकी फोटो उसने सेव कर ली। 

अपने कुछ विश्वस्त स्टाफ को बुलाकर वो फोटो शेयर की और उनके बारे में चुपचाप जानकारी एकत्रित करने को कहा। 

थोड़ी देर में करीब पांच सात लोगों के बारे में सारी जानकारी आ गई। उसने पुलिस इंस्पेक्टर को बुलवा कर सारी बात समझाई और बताया कि ये लोग जंगल में कहां कहां छुपे हैं। पुलिस अधीक्षक से बात कर प्लान बनाया और आज रात में ही उन्हें पकड़ने की तैयारी कर ली। तीन टीम बनाई गई और रात के दस बजे कूच किया गया। 

उन स्थानों पर जब वे पहुंचे तो अचानक कुछ टाइगर्स के दहाड़ने की आवाज आई। दर असल देवेश ने ही टाइगर्स की दहाड़ रिकॉर्ड कर ली थी और वही चलाई गई। लोग उसके जाल में फंसे गए। उस आवाज को सुनकर कुछ आदमी जो छुपे हुए थे, डरकर भागने लगे। पुलिस ने वे सब पकड़ लिए। इस तरह जो लोग कहीं दुबके पड़े भी थे, सर्च लाइटों के द्वारा उन्हें भी पकड़ लिया गया। उनसे हथियार भी बरामद कर लिए गए। 

उन सबसे कड़ी पूछताछ हुई तो उन्होंने अपने आका का नाम बता दिया। वह कुख्यात तस्कर था। कुछ वन विभाग के अधिकारी / कर्मचारियों के तथा कुछ पुलिस के अधिकारी / सिपाहियों के नाम भी सामने आए। 

तस्कर के घर पर दबिश दी गई। वहां से बहुत सारी चीता की खाल, दांत वगैरह माल बरामद किया। वन विभाग और पुलिस विभाग के अधिकारी / कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई। इस प्रकार से देवेश ने ऐसी बड़ी कार्यवाही की कि इनका समस्त तंत्र समाप्त हो गया। फिर उसके बाद उस जंगल का सारा रहस्य ही समाप्त हो गया। फिर से पर्यटक आने लगे।



Rate this content
Log in

More hindi story from हरि शंकर गोयल

Similar hindi story from Horror