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Piyush Kumar

Abstract


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Piyush Kumar

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परिवार की मुश्किल

परिवार की मुश्किल

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दानापुर नामक से का स्थान था जहां मध्यवर्ग का एक परिवार रहता था मतलब ना ज्यादा अमीर ना गरीब था उस घर का मुख्य व्यक्ति पिताजी थे पिताजी कोई प्राइवेट कंपनी में काम करते थे उनके मंथली यही कोई दस पन्द्रह हजार थी उनके तीन बच्चे थे और उनकी पत्नी भी थी बड़े पुत्र का नाम रमन था और छोटे का आयुष था और उनकी बेटी का रागनी था परिवार में पहली परेशानी रमन की थी जो अपने पिताजी के पैसे को बेवजह खत्म कर देता था उसके पिताजी उसके इस व्यवहार से बहुत परेशान थी परंतु अपने बेटे से भी बहुत प्यार करते थे इस कारण उन्होंने उसे डांटने के जगह वह उसे एक ऐसा सबक सिखाना चाहा कि उसे पूरी जिंदगी कि सबक मिल जाए उन्होंने उसे कहा कि तुम इस गड्ढे में ₹1 रोज डालना रमन का क्यों तो बस ऐसे ही उसने कहा ठीक है कुछ दिन तक तो पैसा डालता रहा परंतु जब उसे 1 दिन पैसे कहीं से नहीं मिला तो सोचा आज का से डालूंगा तो वह कुछ काम किया फिर उससे जो पैसे मिला परंतु आज उसने पैसे को नहीं डाला पिताजी पूछे रमन बेटा आज पैसे नहीं डाले रमन कहा की आज नहीं डालूंगा तो पिता जी पूछे क्यों क्योंकि आज मैंने बहुत मेहनत करके काम किया है तब पिताजी बोले अब समझ में आया कि तुम्हें बेवजह पैसे को खर्च करने से हम परिवारों में कितनी परेशानी होती है तब रमन ने अपने पिताजी से माफी मांगी और उस दिन से रमन ने भी मेहनत करना सीख लिया

परिवार की दूसरी मुसीबत है आयुष बाबू जो थोड़े मंद बुद्धि के थे जिसे कोई प्यार नहीं करता था जो आए डांट देते थे कोई उसके अंदर के भाव समझने की कोशिश नहीं करता था उस कारण पूरा परिवार परेशान रहता था लेकिन आयुष को भी किसी डॉक्टर के पास दिखाने के लिए नहीं ले जाया करते थे उसके बगल के घर में आयुष के परिवार वालों का व्यवहार देख कर उसे अच्छा नहीं लगता था उसे एक दिन आयुष को अपने घर ले गया और उसे खूब देखभाल किया एवं डॉक्टर के पास भी उसने उसे दिखाया तो कुछ दिनों के बाद अच्छे इलाज के कारण वह जल्द सभी बच्चों की तरह समान हो गया और आयुष हमेशा के लिए अपने पड़ोसी के घर ही रह गए

रागिनी थी जो अपने घर में कोई काम-धाम नहीं करती थी हमेशा उसकी मम्मी ही सारा काम करती थी कभी-कभी अगर उसकी मां कह देती की रागनी बेटा थोड़ा सा यह काम कर लो रागनी काठी मां मैं नहीं करूंगी और दिन भर मोबाइल चलाती एवं फैशन में चूर रहती इस कारण परिवार में सभी को दिक्कत होता था क्योंकि एक ही आदमी कितना काम कर सकती थी परंतु इस पर रागिनी को कोई फर्क नहीं पड़ता था और खुद में मगन रहती थी एक दिन रागिनी की मम्मी की तबीयत खराब हो गई इस पर रागिनी ने फिर भी घर का कोई काम नहीं किया रागनी को होते हुए घर का सारा काम उसके पापा करते थे रागिनी की मम्मी कुछ दिनों में ठीक हो गई परंतु एक-दो दिन में रागनी की भी तबीयत खराब हो गई उसकी मम्मी ने रागिनी की सेवा की इस तरह रागनी को अपनी गलती पर एहसास हो गया उसे पुरानी बातें याद आने लगे इस कारण वह उसके अगले दिन से घर के सभी काम करने लगी रागनी को मम्मी जब सुबह उठी तो देखी कि यह सब इतना साफ साफ कैसे हैं तब रागिनी की मम्मी ने सबको सुबह-सुबह सुप्रभात बोलकर उठाया सब बोलने लगे कि इतना सुबह क्यों उठ आई तब रागिनी की मम्मी के सभी को किचन में ले गया तो देखा कि अरे वाह आज क्या खाना बना रही हो रागनी रागिनी ने कहा कुछ नहीं बस दिमाग लगा रही हूं पिताजी ने कहा है ऐसा क्यों तब रागिनी ने सभी से क्षमा याचना की सभी ने उसे खुशी-खुशी माफ कर दिया रागिनी की मम्मी अपने घर के लिए तो अच्छी थी परंतु घर के बाहर वाले लोगों के लिए बड़ी बदमाश के नाम से जानी जाती थी रागिनी की मम्मी बाहर वाले से छोटी-छोटी बातों पर झगड़ा कर लिया करती थी इसकी वजह से पूरे परिवार को इस झगड़े से कूदना पड़ता था इस बात के लिए उसके परिवार वाले हमेशा समझाते थे कि मां छोटी-छोटी बातों पर किसी से झगड़ा करना ठीक नहीं है तो मां बोली थी मुझसे गुस्सा कंट्रोल नहीं होता है मैं तो झगड़ा करूंगी तभी सभी ने एक योजना बनाया और मां को कहा कि मैं आपसे तुम कभी झगड़ा नहीं करोगी तब मां बोली कि कैसे तब रागिनी ने मां के मुंह में पानी डाल दिया जब पूछा तो कहा कि जब भी कोई कुछ बोले तो इस दवाई को मुख में डाल लेना तब से मैं यही उपाय करती जब भी देखती कि मुझसे कोई झगड़ा करने वाली है वे झट से उसी दवा को मुख में डाल लेती जब वह चुप हो जाती तो उसे फेंक देती है इस तरह से रागिनी की मां पड़ोसियों से कभी झगड़ा नहीं करती और सभी के साथ प्रेम पूर्वक रहती है

 इस कहानी से हमें यह समझ आता है कि हमें अपने परिवार के साथ हर मुश्किल दौर का सामना करना चाहिए इसका मतलब है एकता में बल है।


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