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Dinesh Dubey

Horror Fantasy Thriller

3  

Dinesh Dubey

Horror Fantasy Thriller

पंचम भाव 2

पंचम भाव 2

5 mins
135

भाग 2


पंचम के हाथों में तरंगें दौड़ने लगती है, और वह तरंग निकल कर एक ओर जाने लगती है, तो पांचों उठ खड़े होते हैं, और तरंग की दिशा में जाते हैं।


थोड़ा आगे जाते ही तरंग एक बड़े से मकान में जाकर गायब हो जाती है, वह पांचों उस मकान की ओर देखते है, उसमें कई लोग पहरे दे रहे थे, इन लोगों को तो पहरदारों से कोई डर नहीं था, पर वह लोग इस बात का अंदाजा लगा रहे थे की शैतान की रूप में है, वह तो मकान के ऊपर ही उड़ रहे थे।"


अवधूत कहता है "हमें इस मकान में प्रवेश कर देखना चाहिए, मुझे तो पूर्ण आभास हो रहा है की वह इसी मकान में है।"


चरक कहता है, "तो विचार क्या करना है, चलो प्रवेश करते हैं।"


नैवेद्य कहता है "हम दो लोग बाहर रुक कर इस बात का ध्यान रखते हैं की कहीं वह तुम तीनों को देख कर भाग नहीं जाए।"


श्रमक कहता है, " मैं नैवेद्य के साथ यहां रुकता आप तीनों अंदर जाओ।"


वह तीनों अंदर जाते हैं, नैवेद्य और श्रमिक मुस्तैद होकर नीचे नजर रखते हैं।


अवधूत, चरक और कारक मकान में दीवाल से प्रवेश करते हैं, मकान के अंदर हाल में कई लोग थे, तीनों चौक कर एक दूसरे को देखते हैं।


कारक पूछता है, "इनमें रोचक शैतान कौन है।"

सभी उनकी ओर देखते हैं, तो वहां सभी लोग शराब पी रहे थे, और मुर्गा और गोश्त खाने में लगे थे, उनमें से एक सबका मुखिया नजर आ रहा था, तीनों उसको ध्यान से देखते है, चरक कहता है, "मैं उसके पास जाता हूं आप लोग ध्यान रखिए।"


चरक धीरे से उस आदमी के पास जाता है जो सबके बीच में बैठा था, और ढेर सारा शराब और मांस खा रहा था, चरक उसके पीठ पर हाथ रखता है, तो वह चौक कर देखता है, और चरक को देखते ही वह उठ खड़ा होता है।


वह कहता है " तुम देव लोक से आए हो, मुझे पकड़ने पर पकड़ नहीं पाओगे, अगर तुमने मुझे पकड़ने का प्रयास किया तो मैं इन सबको मार कर खा जाऊंगा।"


उसकी बात सुन उसके आस पास के लोग उस आदमी को देखने लगते है।

एक आदमी कहता है, "तरुण तुम्हें बहुत चढ़ गई है कुछ भी बकवास कर रहे हो।"


लोगों को देवता लोग दिखाई नहीं पड़ रहे थे।

तरुण में घुसा रोचक सबको देखता है फिर कहता है, "मैं शैतान हूं, शैतान।


वह जोर से हंसने लगता है, उसके परिचित लोग उसके हैरत से देखते हैं।


एक फिर कहता है, "अरे ये पागल हो गया लगता है, इसे पकड़ कर पागल खाने ले जाओ, इतना क्यों पीता हैं।"


अवधूत और कारक उसी समय मंत्र पढ़कर तरुण की ओर फूंकते हैं तो शैतान उसका शरीर छोड़ बाहर निकल जाता है, तरुण वहीं गिर कर बेहोश हो जाता है, तरुण के साथी उसे बेहोश होता देख परेशान होते हैं।


एक कहता है, " यार इसको ओवर ड्रिंक हो गया है, जल्दी से डॉक्टर को बुलाओ, पता नहीं कुछ दिन से ये बहुत पीने लगा है।"

शैतान गुस्से में चरक को देखता है, और फिर अवधूत और कारक को देख कहता है, "तुम्हारे कारण इन मानवों को मारना पड़ेगा।"


अवधूत ने, इतनी देर में शैतान के चारों ओर सुरक्षा वलय बना दिया था, ताकि वह किसी को नुकसान नहीं पहुंच सके वह सब चाहते थे की ये भिड़ छट जाए तो फिर इस शैतान से निपटा जाए।"

अवधूत एक आदमी में प्रवेश कर कहते हैं, "चलो चलो बाहर चलो यहां कुछ गड़बड़ होने वाली है, और इस तरुण को उठाकर हॉस्पिटल ले जाते हैं।"


वह तरुण को उठाने लगते हैं, शैतान को गुस्सा आता है तो वह बड़ी जोर से चिंघाड़ने लगता है, और फिर वह उन लोगों को मारने के लिए आगे बढ़ता है तो वह वलय से बाहर नहीं निकल पाता है, वह गुस्से से इन तीनों को देखता है और अपनी पूरी शक्ति लगाकर वलय कवच को तोड़ देता है।"

शैतान रोचका के वलय कवच तोड़ने से पहले सभी लोग बाहर जा चुके थे।


शैतान गुस्से में अपने भयानक रूप में आता है और अचानक से चरक पर हमला कर देता हैं और चरक की गर्दन दबोच लेता है, इन लोगों के पास शरीर नहीं था और सभी अदृश्य थे तो कोई किसी बाहरी लोगों को दिखाई नहीं पड़ रहे थे।"


ऊपर उड़ कर रोचक के लिए खड़े नैवेद्य और श्रमिक सभी को बाहर भागते देख समझ गए थे की अंदर रोचक से मुलाकात हो गई है, वह दोनों भी अंदर जाते हैं।


अंदर चरक और रोचक में कम कर मार पिट हो रही थी, रोचक एक जबरदस्त दाव से चरक को उठाकर तेज़ी से फेंकता है, तो वह बड़ी तेजी से घसीटता हुआ गिरता है, चरक को थोड़ी मार भी लगती है, तभी नैवेद्य और श्रमिक भी आता है।


रोचक उन दोनों को देख कहता है, " लगता है, पूरा देव लोक ही मुझे पकड़ने आ गया है, अरे इतना भी क्या कष्ट हो रहा था तुम सबको मेरे यहां आ जाने पर।"


अवधूत कहता है, " सिर्फ तेरी बात होती तो हम पांच को आने की आवश्यकता ही नहीं थी पर तेरे कारागार तोड़ने के कारण तेरे साथ के सभी शैतान भाग गए हैं, इसलिए हम पंचम यहां आए हैं, और सबसे पहले तुझे हो पकड़ना था, और तुझे ढूंढ भी लिया।"


रोचक कहता है, "भूल मुझसे हुई मैंने अपनी शक्तियों के प्रवाह को क्षीण नहीं किया था, अन्यथा तुम मुझे ढूंढ नहीं पाते, पर ढूंढ भी लिया तो कर लोगे मुझे पकड़ना तुम्हारे वश की बात नहीं है।"


तब तक चरक खुद को ठीक करके आ जाता है।


अवधूत कहता है "हम देवता है, तुझसे अधिक शक्तिशाली हैं, तुझे पहले भी काल कोठरी में डाल रखा था, वह तो पहरेदारों की भूल वश तुम भाग निकले अब तो तुम्हारी वो दशा करेंगे की तुम भागने के नाम से घबराओगे।"


शैतान गुस्से से लाल लाल आंखों से उन सबको देखता है, और फिर इस बार अवधूत पर टूट पड़ता है।"


क्रमशः



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