पंचम भाग 9
पंचम भाग 9
भाग 9
एक बड़े से ऑडिटोरियम में प्रोग्राम चल रहा है, आज इस बड़े शहर में मिस नॉर्थ इंडिया का चुनाव होना है, और उसके लिए करीब 16 सुंदरियां चुनी गई है, उनमें से टॉप थ्री चुना जायेगा, शो के टिकट बहुत महंगे बिके थे, पब्लिक पूरी तरह खचाखच भरे हुए थे।
पंचम भी अदृश्य होकर अंदर जाते हैं क्योंकि उन्हें सीधे तो एंट्री मिली नहीं थी, टिकट के बिना एंट्री नहीं थी, और टिकट के लिए इनके पास पैसे नहीं थे, तो इन्होंने अदृश्य होकर जाना ही उचित समझा।"
किंचल, गोकार को इस भिड़ ने खोजना आसान नहीं था, यहां तो हरकतों में लोग शैतानों का भी कान काट रहे थे, ऐसे में इतने सारे शैतानों के बीच असली शैतान को खोजना आसान नहीं था, यह आने पर तो बूढ़े भी हूटिंग में जवानों के कान कुतर रहे थे।
शो शुरू हो रहा था, अनाउंसर अनाउंस करना शुरू करती है, "दोस्तों अब आपके सामने आ रही इस देश की मानी हुई टीवी एंकर निकिता मेहरा इनके बारे में तो बताने की जरूरत नहीं है, तो आप सब तालियों से उनका स्वागत करे।"
जोरदार तालियों के बीच निकिता मेहरा आती है, वह खुद भी बहुत ही सुंदर थी, कई लोग सीटियां बजाने लगते हैं।
पंचम अलग अलग होकर एक एक आदमी को ध्यान से देख रहे थे, उन्हें उनमें समझ ही नहीं आ रहा था की कौन किंचन हैं और कौन गोकार हैं, सभी के रिएक्शन तो एक जैसे ही थे।
अवधूत की नजर एक आदमी पड़ती है वह अधेड़ है और बड़ी ही अजीब अजीब रिएक्शन लड़कियों को देख कर दे रहा था, अवधूत को लगता है की वह शैतान हो सकता हैं, वह धीरे से जाकर उसके हाथ को पकड़ता है तो वह आदमी हड़बड़ा जाता है कि उसके हाथ पर किसी का हाथ पड़ा है पर वह दिख नहीं रहा है तो वह जोर से चिल्लाता है भूत भूत।"
स्टेज पर वॉक कर रही लड़कियां भी कैट वॉक छोड़ उस ओर देखने लगती है, प्रोग्राम डिस्टर्ब होता है।"
सभी चौक कर देखने लगते हैं, बाउंसर भाग कर आते हैं और उस आदमी को पकड़ते हैं, और उसे उठाकर बाहर ले जाने लगते हैं तो वह चिल्लाने लगता हैं कि उसके पास सच में भूत था वह उसके हाथ को छू रहा था, उसने टिकट के पैसे दिए हैं उसे इस तरह बाहर नहीं फेंक सकते हैं।"
बाउंसर उसे उठाकर बाहर फेकते हैं तो वह कहता है, " मैं तुम लोगों पर केस करूंगा ऑर्गनाइजर पर केस करूंगा।"
अंदर फिर से शो शुरू होता है, चरक और श्रमिक अवधूत के पास आते हैं,!!
चरक पूछता है, " क्या हुआ,!?
अवधूत कहता है, " वह साधारण मानव था, समझ ने नहीं आ रहा कैसे पता करें यहां तो हर मानव शैतानों वाली हरकत कर रहा है।"
श्रमिक कहता है, " उन्हें खोजना इतना आसान होता तो देवता हम देवगण को क्यों भेजते, वह तो साधारण पहरेदारों को भी भेज सकते थे।"
नैवेद्य को एक आदमी पर संदेह होता है, क्योंकि बीच में अचानक उसकी जीभ बाहर आई थी और वह सर्प की तरह थी और लंबी भी थी, नैवेद्य अपने पास ही खड़े कारक को इशारा करके इस आदमी को दिखाता है!!
वह आदमी उनके इशारे को देख लेता है, और मुस्करा देता है।"
कारक उस आदमी के पास पहुंचता है, और उसके कंधे पर हाथ रखता है तो वह आदमी इधर उधर देखने लगता है, उसे कोई नहीं दिखता है, कारक झटके से हाथ हटाता है क्योंकि उसके ऊपर हाथ रखने के बाद उसको कोई तरंग का अहसास नहीं हुआ।"
तभी कारक की नजर अपने से थोड़ा आगे एक आदमी पर पड़ती है जो उसे देख मुस्करा रहा था, कारक सोचता है की वह तो अदृश्य है ,फिर वह आदमी उसे कैसे देख पा रहा हैं, तो उसे ध्यान आता हैं की शैतान उन्हें देख सकते हैं, पर उन्हें वह इसलिए देख नहीं पा रहे थे की उन्होंने किसी दूसरे के शरीर में प्रवेश कर लिया था।
शैतान दूसरे के शरीर में आसानी प्रवेश कर सकता था पर देव गण हर किसी के शरीर में जा नहीं सकते हैं, जो शराब पीए हुए हों या अशुद्ध हो उनके शरीर में वह नहीं जा सकते हैं, हैं यदि कोई भी व्यक्ति फ्रेश हो और शुद्ध हो तभी वह उसके शरीर में प्रवेश कर सकते है।"
वह आदमी कारक को देख मुस्करा देता है और फिर अपनी जिव्हा निकल कर दिखाता है तो कारक समझ गया की यह शैतान ही है, तो वह उस ओर बढ़ता है, तो वह शैतान उस आदमी को छोड़ कर दूसरी ओर चला जाता है।
वह शैतान इन्हें पहचान गया था, इसी लिए इन्हें परेशान कर रहा था।"
पर वह यही गलती भी कर रहा था वह अपने लिए मुसीबत भी इकट्ठा कर रहा था।
श्रमिक दूर से यह देख लेता है, और वह अचानक उसके पीछे पहुंच जाता है और जैसे ही उस आदमी को पकड़ता है, तभी शैतान गोकार उस आदमी को छोड़ नीचे का रहे एक चूहे में प्रवेश कर सभी की कुर्सी के नीचे से भाग जाता है, कारक, श्रमिक और नैवेद्य सिर्फ देखते रह जाते हैं।
उधर अवधूत को भी एक लड़के पर संदेह होता है, क्योंकि वह उसे दो बार अपने हाथ को पूरी तरह से मोड़ दे रहा था, वह लड़कियों को देखकर एकदम से एक्साइटेड हो रहा था, एक दो बार उसके मुंह से लार तक टपक गया था, अवधूत उस से बचकर दूर से ही इस पर नजर रखते हैं वह उन लोगों की नजर में नहीं आना चाहते थे, वह और चरक एक दूसरे को दखते हैं।
अवधूत चरक से कहते हैं, " यह किंचक है।"
चरक उसकी ओर देखता है, तो उसे एक चूहा भी नजर आता है जो उसके पैरो के पास आकर कीच कीच कर रहा था, वह आदमी चूहे की ओर देखता है, चूहा उसे कुछ इशारा करता है, तो किंचक उस लड़के का शरीर छोड़ दूसरे मे प्रवेश करता है, और तेज़ी से वहां से गायब होते हैं, दोनों भी बाहर आकर दो कुत्ते में प्रवेश कर जाते हैं, और एक कोने में खड़े हो जाते हैं।
गोकार कहता हैं, "हमें पकड़ने देवता आए हैं।"
किंचक कहता है, "कहां हैं वह लोग ?"
क्रमशः

