पिशाच भाग 1
पिशाच भाग 1
रात के अंधेरे में ये दुनिया कुछ अलग नजर आती है। दिन में जितनी खूबसूरत दिखती है रात में उतनी ही डरावनी हो जाती है , इंसान हो या जानवर उसके अंदर के दानव को बाहर निकाल लाती है। रात कई मायनों में आईने की तरह है जीव के अंदर के व्यक्तित्व को बाहर निकल देती है।
इंसान अगर किसी जीव के साथ सब कुछ अच्छा हो रहा हो तो उसे रात सुहानी लगती है अन्यथा यही रात उस जीव की सबसे बड़ी मुसीबत बन जाती है। रात में सफर करना हमेशा खतरनाक होता है क्योंकि रात में तामसिक शक्तियां चरम पर होती है / तामसिक यानी नेगेटिव एनर्जी का बोल-बाला होता है और अगर इस परिस्थिति में जीवों का खुद पर से नियंत्रण हट जाए या कमजोर हो जाए तब वो जीव वह कार्य कर बैठता है जो उसे नही करना चाहिए /पर बड़े शहरों में इन बातों को कोई नही मानता है आधुनिकता के दौड़ में लोग अपनी संस्कृति और नियमों को भूल गए है …..करर्रर्रर्रर्रर्रर …
"ये रेडियो को क्या हुआ ..?? इतना बढ़िया शो आ रहा था" - एक आदमी की आवाज़ आयी"
"तुम रेडियो छोड़ो और गाड़ी चलाने पे ध्यान दो "- उस आदमी के बगल में बैठी एक औरत की आवाज़ आयी।
"जान तुम इतना चिंता क्यों करती हो मैं गाड़ी सही से चला तो रहा हूं" - आदमी ने उस औरत को दिलासा देते हुए कहा।
"पता नही वरुण जब से हम इस घने जंगल में आये है मुझे बहुत डर लग रहा है" - औरत ने उस आदमी यानी वरुण से कहा पर उसकी नजर जंगल में भटक रही थी।
"तुम नाहक परेशान हो जाती हो शालिनी , कुछ नही होगा मैं हूं ना - " आदमी यानी वरुण ने बगल में बैठी शालिनी की तरफ देखते हुए कहा पर ऐसा करते ही उसकी नजर सामने सड़क से हट गयी की तभी वरुण को लगा सामने से कुछ आ रहा है इससे पहले वो कुछ समझ पाता उसके कार के शीशे में एक चमगादड़ लड़ गया।
"वरुण संभल कर "- शालिनी जोर से चीखी पर ..तब तक देर हो चुकी थी वरुण ने दोनो पैर ब्रेक पे दे मारा जिससे गाड़ी स्किट करती हुई अनियंत्रित हो गयी और स्टेयरिंग के काबू से बाहर जाते ही गाड़ी सड़क के किनारों पर लगे पेड़ो से जा टकराती है। टकराने की आवाज़ इतनी तेज़ थी कि उसमे शालिनी की चीखे दब गयी और आस - पास के पेड़ो से पक्षियों ने शोर मचाकर उड़ना शुरू कर दिया।
कुछ देर बाद वरुण को होश आया तो उसने देखा की उसका सर कार की स्टेयरिंग पर रखा है और उसके माथों से खून निकल रहा है। वरुण को तुरंत शालिनी का ख्याल आया उसने बगल में पलट के देखा वो अभी भी बेहोश पड़ी थी .. वरुण ने कई बार आवाज़ लगाई पर शालिनी ने कोई प्रतिक्रिया नही दी। घबराते हुए वरुण ने अपनी तरफ का दरवाजा खोला और घूम कर शालिनी की तरफ आया उसने एक झटके से शालिनी की तरफ का दरवाजा खोला और सीट बेल्ट को खोलते हुए शालिनी को बाहर निकाला। शालिनी होश में नही आ रही थी वरुण ने शालिनी को सड़क पर छोड़ दिया और कार के अंदर लपका और कुछ खोजने लगा .. कुछ ही क्षणों में उसे पानी की पानी की बोतल मिल गयी थी।
वरुण ने पानी की आधी भारी बोतल को शालिनी के चेहरे पर उड़ेल कर खाली कर दिया। पानी के छीटों ने अपना कमाल दिखाया और शालिनी को होश आने लगा। वरुण शालिनी से कुछ पूछ पता उससे पहले ही अचानक वरुण को घोड़ो की पदचाप सुनाई देने लगी उसने सड़क पर अपनी नजर दौड़ाई तभी उसे थोड़ी दूरी पर एक घोड़ा गाड़ी दिखी जो उसी की तरफ आ रही थी। वरुण ने इशारा करके घोड़ा गाड़ी को रूकवाया और कोचवान से अस्पताल का पता पूछने लगा। इससे पहले कोचवान कुछ बोलता बग्घी का दरवाजा खोल कर एक नौजवान उसमे से बाहर निकला।
उस नौजवान ने अपना नाम विन्स्टल बताया और साथ ही अपना पेशा भी जनाब फिजिशियन है यानी एक डॉक्टर। विन्स्टल ने दोनो को अपने साथ चलने को कहा हालांकि वरुण तैयार नही था पर शालिनी की हालात देख कर मान गया। तीनो घोड़ा गाड़ी में बैठ कर विन्सटल के घर पहुचे पर ये घर नही एक महल था।
तीनो घोड़ा गाड़ी से उतर कर महल के अंदर पहुचे जहा वरुण को एक बावर्ची मिला विन्स्टल ने उसे बढ़िया खाना बनाने को कहा और खुद वरुण और शालिनी को अपने साथ ले कर अपने महल के एक कमरे में ले गया। उस कमरे की साज-सजावट देख कर वरुण और शालिनी दोनो की आंखे खुली रह गयी। विन्स्टल ने दोनो को थोड़ी देर में नीचे आने को कह कर खुद नीचे चला गया।
वरुण ने शालिनी का हाल चाल जानना चाहा पर वो तो महल की खूबसूरती में खो गयी थी। कुछ ही क्षणों में बावर्ची दोनो को बुलाने आ गया। तीनों साथ में नीचे पहुचे और खाने की टेबल के सामने लगी कुर्सियों पर बैठ गए। विन्स्टल वहां पहले से मौजूद थे। तीनो ने खाना शुरू किया अभी कुछ निवाला वरुण के गले से नीचे निकला होगा की उसे सिर घूमता से प्रतीत हुआ यही हाल शालिनी का था। दोनो बेहोश हो कर एक तरफ लुढ़क गए थे तब विन्सटल ने ताली बजा कर बावर्ची को बुलाया और उसे अपने लिए डिनर लगाने का आदेश दिया।
बावर्ची ने तुरंत ही आदेश का पालन किया उसने दोनो हाथो से वरुण और शालिनी को उठा लिया और नीचे महल के तयखाने में ले गया। कुछ ही पलों बाद शालिनी को होश आया तो उसने जो देखा .. उसके होश उड़ने लगे। सामने खड़ा विन्स्टल इंसान नही बल्कि एक वैम्पायर है एक खून पीने वाला पिशाच। शालिनी ने मदद की गुहार लगाई पर कोई सुनने वाला नही था क्योकि वरुण को काट कर उसे अपना गुलाम बना लिया था।
विन्सटल को एक महिला की जरूरत थी रानी बनाने के लिए और एक सम्मोहित सेवक की जो उसके लिए रोज नए शिकार ला सके। शालिनी रोती रही पर किस ने उसकी नही सुनी .. क्रूर अट्टहास करता हुआ पिशाच शालिनी के पास आया और धीरे - धीरे उसके नरम गरदन की चमड़ी को अपने नुकीले दांतों से भेदना शुरू किया।
शालिनी की एक चीख निकली और सब कुछ खत्म हो गया। शालिनी अब विन्स्टल की रानी थी और वरुण एक सेवक है जो रोज अब अपने मालिक के लिए शिकार पर निकलेगा।

