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Archana Tiwary

Drama


4  

Archana Tiwary

Drama


फोनवाला प्यार

फोनवाला प्यार

6 mins 230 6 mins 230

सोनल -आज तो तीन बज गए मुझे कॉलेज सेआने में। बहुत देर हो गई। काफी थक गई हूं जल्दी खाना खाकर थोड़ी देर आराम कर लेती हूं।

(मन ही मन में बुदबुदाते हुए सोनल बिस्तर पर लेट जाती है.लेटते ही उसे नींद आ जाती है। अचानक फोन की घंटी की आवाज से उसकी नींद टूटती है। मोबाइल देखती है तो स्क्रीन पर unknown नंबर दिख रहा था। एक बार तो उसके मन में विचार आया कि फोन रिसीव ही न करें पर अगले ही पल कोई जरूरी कॉल हो ऐसा सोच कर उसने फोन रिसीव किया) राहुल- हेलो, नेहा सोनल- मैं नेहा नहीं सोनल बोल रही हूं. यह रॉन्ग नंबर है. आपने शायद कोई गलत नंबर डायल किया है. राहुल -तो क्या हुआ गलती से ही सही आप से बात करने का मौका तो मिला. मैं राहुल बोल रहा हूं. मैं पुणे में रहता हूं और आप? सोनल -(बात करने के मूड में न थी और यह रॉन्ग नंबर से तो बिल्कुल ही नहीं) देखिए मैं आपको जानती नहीं पहचानती नहीं तो मैं कहाँ से बोल रही हूं क्यों बताऊं? राहुल -अच्छा ठीक है यह मत बताइए पर यह तो बताइए आप करती क्या है? देखिए मेरी एक दोस्त है जिसकी आवाज बिल्कुल आपकी आवाज से मिलती है पर अब वह इस दुनिया में नहीं रही। मुझे आपकी आवाज सुनकर उसकी याद आ गई ।प्लीज आप फोन मत काटिये। क्या हम अच्छे दोस्त बन सकते हैं ?सोनल -नहीं मैं इतनी जल्दी किसी को दोस्त नहीं बनाती और आपको तो जानती भी नहीं. इतना कहकर सोनल ने फ़ोन काट दिया और किचन में चाय बनाने लगी। बार-बार उसके कान में उस अनजान व्यक्ति की आवाज गूंज रही थी "आप की आवाज मेरी दोस्त की आवाज से मिलती है" 

चाय पीते पीते वह सोचने लगी पुणे में तो उसकी सुधा मौसी भी रहती है पर पिछले पाँच साल से वह उससे नाराज है। उन्होंने मेरे लिए कई रिश्ते लाए थे पर मैंने बारी बारी सब मना कर दिया क्योंकि मुझे तबअपनी कैरियर बनानी थी। मौसी बार-बार मां को समझाती देखो कैरियर वगैरह तो बनते रहेगी पर एक बार शादी की उम्र निकल गई तो अच्छा घर और अच्छा लड़का मिलना मुश्किल हो जाएगा पर मुझ पर तो नौकरी का जैसे भूत सवार था इसलिए मैंने शादी से इंकार कर दिया। मां और मौसी के बीच इस बात को लेकर रिश्तो में कड़वाहट आ गई थी। मां के आकस्मिक मौत के समय मौसी ने मुझे सहारा दिया और शादी के लिए मनाने लगी ।मैंने कहा अब मेरी शादी की उम्र नहीं रही ।अब तो मैं अपने नौकरी से खुश हूं। थोड़ी नाराज होकर मौसी चली गई और उन्होंने बात करना तक बंद कर दिया ।मैंने उस अनजान नंबर पर राहुल लिखकर नंबर सेव कर दिया। तीन दिन बाद अचानक उसी नंबर से कॉल आया। राहुल- हेलो, कैसे हो आप? सोनल -मैं ठीक हूं. राहुल- मेरे इस तरफ फोन करने से आप नाराज तो नहीं ?सोनल -नहीं नहीं मैं तो आपके फोन का इंतजार..... मेरा मतलब मैं नाराज नहीं. राहुल- मैं पुणे में एक बैंक में नौकरी करता हूं और यहाँ मेरा अपना एक फ्लैट है। मैं अपनी मां के साथ रहता हूं और? आप बताइए .सोनल- मैं अकेले रहती हूं तीन साल पहले मेरी मां अचानक कैंसर की वजह से मुझे छोड़ कर चली गई और पापा तो बचपन में ही चले गए थे। राहुल -तो आपके पति मेरा मतलब शादी? सोनल- मैंने शादी नहीं की है और आपकी शादी? राहुल- पापा के गुजर जाने के बाद छोटी बहन की जिम्मेदारी के कारण मैंने इस बारे में सोचा ही नहीं पर पिछले साल उसकी शादीहो गई तो अब माँ जिद कर रही है शादी के लिए। सोनल -इस में दिक्कत क्या है? राहुल- दिक्कत तो कुछ नहीं है पर अब इस उम्र में मुझे कौन पसंद करेगा? सोनल -तो बताइए कितनी उम्र है आपकी? राहुल- मैं 38 वर्ष का हो गया हूं और इस उम्र में शादी में परेशानी तो होतीही है। सोनल- मुझसे शादी करोगे?  राहुल -क्या बोल रही हो? सोनल- (हंसते हुए) अरे मैं तो मजाक कर रही हूं। चलो अब मैं फोन रखती हूं मुझे बहुत सारे काम करने हैं। राहुल- रुको रुको फोन मत काटना, पहले यह तो बताओ तुम कब फ्री होती हो ताकि हम आराम से बात कर सके। सोनल के मन में आया कि झट से बोल दे कि तुम्हारे फोन के लिए तो मैं हमेशा फ्री हूं पर थोड़े नखरे दिखाते हुए कहती है- शाम के छः बजे के बाद कभी भी करना मैं फ्री रहती हूं। अब तो फोन पर बातों का सिलसिला चलने लगा राहुल अपनी पसंद नापसंद की बातें बताता। सोनल एक सच्चे दोस्त को पाकर बहुत खुश थी। उसके एकाकी जीवन में जैसे बाहर आ गई थी। वह हर दिन छः बजने के बाद राहुल के फोन का इंतजार करती।

राहुल भी उसे फोन करना भूलता नहीं था। किसी दिन अगर वह फोन न करता तो सोनल उसे फोन करके उलाहना देती ।धीरे धीरे इन दोनों की दोस्ती गहराने लगी।दोस्ती कब प्यार के रंग में बदलने लगी इससे दोनों अनजान थे। सोनल ने अपनी दोस्त कुसुम को जब राहुल के बारे में बताया तो कुसुम ने चुटकी लेते हुए कहा कि राहुल तुम्हारे लिए इतना फिक्रमंद रहता है और तुम भी उसकी इतनी फिक्र करती हो यही तो प्यार है। तुम दोनों अब देर मत करो जल्द से जल्द शादी कर लो। सोनल सोचने लगी कि क्या राहुल उससे शादी के लिए राजी होगा ।बातों बातों में कई बार राहुल ने उसे समझाने की कोशिश की थी पर कभी खुलकर इस बारे में कुछ न कहा था। अचानक राहुल ने वीडियो कॉल किया। उसे देखते हैं सोनल उसके व्यक्तित्व से प्रभावित हो गई ।देखने में बड़ा आकर्षक था। हां सेहत के प्रति थोड़ा लापरवाह था तभी उसके पेट थोड़े बाहर आ गए थे और आंखों पर चश्मा। पर अब मैं ही कौन सी छरहरी बदन वाली कमसिन लड़की रह गई हूं। मेरे भी तो आंखों पर चश्मा है। मन में ख्याल आया कि सुधा मौसी की मदद ली जाए पर उन्हें फोन करने से उसे डर लग रहा था।

आखिरकार हिम्मत कर के उसने सुधा मौसी को फोन कर राहुल के बारे में बताया। मौसी तो खुशी से झूम उठी और तुरंत पुणे आने का न्योता दे डाली ।उन्होंने तो शादी की भावी कल्पना भी कर ली और कहा -तुम्हारी शादी मैं पुणे से करवाऊंगी आखिर इतना बड़ा घर मेरा किस दिन काम आएगा। मैंने राहुल को सुधा मौसी के बारे में बताया तो वो भी बड़ा खुश हुआ। उसने कहा -इससे अच्छी बात तो हो ही नही सकती की सुधा मौसी पुणे में रहती है, तुम्हे भी अकेलेपन का अहसास न होगा। अचानक ही वो बोल पड़ा - सोनल मेरी जिंदगी के बाकी बचे हुए समय मैं तुम्हारे साथ बिताना चाहता हूं क्या तुम मुझसे शादी करोगी ?इतनी बड़ी बात इतनी सहजता से राहुल कहेगा यह मैंने न सोचा था। मैंने भी सहमति में सिर हिला दी । अपने कॉलेज में छुट्टी की अर्जी दी ।जल्दी ही छुट्टी मंजूर हो गई और मैं पुणे पहुंच गई। राहुल की मम्मी को मैं बहुत पसंद आई और जल्दी ही शादी की तारीख पक्की हो गई ।आज मेरी शादी है और रह रह मुझे मां की बहुत याद आ रही है कब मेरी आंखें भर आई मुझे पता ही न चला।आज वो मेरे साथ होती तो बहुत खुश होती। तभी पीछे से हाथों के स्पर्शकी अनुभूति हुई पलट कर देखा तो सुधा मासी मां की शादी की साड़ी लिए खड़ी थी मुझे गले लगाते हुए बोली -ये दीदी की साड़ी है इसमें तुम बिलकुल वैसी ही खूबसूरत दिखोगी। तो क्या हुआ माँ न सही मौसी माँ तो है।मैं उनसे लिपट कर जी भर रोना चाहती थी।


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