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नोट : कन्टेन्ट क्रमांक चुने हुए जोनर के तहत फिल्टर में प्रदर्शित होंगे : others

सच्चा प्यार बहुत खूबसूरत होता read more

10     431    44    630

मैं अपनी माँ से नफरत करती हूँ, सिर्फ read more

19     412    42    638

अगर ख़्वाब ना हों तो जिंदगी तारीख बन जाती है। शुरू से ही मैं अपने आप मे सिमटकर read more

1     440    40    640

यह संस्मरण तब का है, जब मैं 10 वर्ष की थी, और मेरा भाई बिट्टू 8 वर्ष का था । हमारे read more

4     279    37    644

कर्ज
© Husan Ara

Abstract Classics +1

तीन दिन से भूखा होने के कारण वह वहीं बैठा सब की हंसी का पात्र बनता read more

4     393    36    645

आज भी मैं अपनी पढ़ाई का सोचती हूं तो, मुझे मेरी वो प्यारी सहेली पिंकी की याद आ जाती read more

2     507    20    662

मत भूलो की हल्दी का रंग पीला होता है और खाने में अगर हल्दी न हो तो खाने का रंग कैसा read more

2     456    7    664

तन्वी ने इधर उधर अन्धेरे मे देखने की कोशिश की। कुछ दूरी पर उसे कुछ चमकता सा दिखाई read more

5     53    4    668

सपने में भी मैं ऊँचाई से नीचे नहीं देख पाती। इस हद तक यह डर मेरे अंदर समाया है। क्या read more

2     351    54    675

कुछ रिश्ते टूटे ,कुछ नए जुड़े ।जो टूटे उनका गम नहीं जो नए जुड़े उनका हृदय से अभिनंदन read more

1     376    51    679

तो कभी 'कुछ सुनो' से कैफियत कहने की चाह रख रहा read more

1     353    51    680

Johny Johny
© Kunda Shamkuwar

Abstract Drama +1

इसमें जनता किसी नेता से सवाल कर रही हो ? जरा सोच कर read more

1     305    54    686

वो दिनभर बैठ कर अपनी किताब में देखते हुए बगल में बैठी लड़की के क्रियाकलापों को तिरछी read more

2     429    54    687

तनिष्का का अपने कुत्ते के प्रति नफरत प्यार में कैसे परिवर्तित हुई उसकी रोचक read more

6     144    6    718

आंखों से आँसू रुकने का नाम नही ले read more

3     112    4    723

ये छोटी-छोटी घटनाएं, पल-पल, समय से अलग होती रहती हैं, समय चाह कर भी इन्हे संजो के read more

27     190    4    724

"सोमु रूक जाओ बेटा मम्मी को कितना परेशान करोगे, सुनो तो" रोमा तेजी से दौड़ी पर सोमू read more

19     367    1    730

प्रसिद्ध लेखिका पद्मा सचदेव अपनी आत्मकथा ‘बूंद-बावड़ी’ मे लिखती हैं- “औरत को आखिर read more

7     250    1    730

लेखक -अलेक्सान्द्र कुप्रिन अनुवाद - आ. चारुमति read more

23     602    51    736

मेरा मन बहुत दुख रहा था। जिन पापा को जीते जी इन लोगों ने इतना दुख दिया था। वो आज read more

1     392    47    746

लेखक : धीराविट पी. नात्थागार्न , अनुवाद : आ. चारुमति read more

2     515    33    782

बचपन से लेकर माँ के जाने तक मैं यही जानता था कि दर्द में भी आँसू नहीं निकलना चाहिए read more

2     211    33    783

'नयी मित्र' के भी कदम जमीन पर नहीं पड़ रहे थे क्योंकि साहब जो उनके साथ थे। साहब अपने read more

2     341    23    793

मैं प्रथम श्रेणी डिस्टिंगशन से पास तो हो गयी पर कभी सास की बीमारी और फिर बेटी की वजह read more

6     633    18    797

वो रिक्शा वाला दोनो हाथों को जोड़ कर सर तक ले आया "नहीं ,नहीं। माफ कर read more

5     299    9    802

क्या तन की सुंदरता मन की सुंदरता से ज्यादा है ? क्या तन की सुंदरता स्थाई हैं read more

2     207    7    805

अगले दिन वह बहुत बदला हुआ था उसने बसंत ऋतु को धन्यवाद दिया जिसके कारण उसको असीम सुख read more

5     97    5    811

सौदा
© Kunda Shamkuwar

Abstract Inspirational +1

शायद पहली बार मैंने इस तरह का कोई मीठा सौदा read more

2     55    5    812

बस एक दिन के लिए भगवान इस दुनिया को पुरुष रहित कर दे।मैं तेरा हाथ पकड़ कर पूरी रात read more

1     50    2    821

लेखक : इवान बूनिन अनुवाद : आ. चारुमति read more

8     376    58    827