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नोट : कन्टेन्ट क्रमांक चुने हुए जोनर के तहत फिल्टर में प्रदर्शित होंगे : others

फर्स्ट नाईट एक कहानी है प्रेम में सच्चे समर्पण की और उसकी पवित्रता की ऊंचाइयों की read more

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एक भूत की असली read more

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कन्या-भूण का विचार भी बना रहे माता-पिता को समर्पित एक सदृश्य रचना (रचना में चित्र के read more

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अवतार सिंह ‘पाश’ की एक कविता की पंक्ति है . ‘मैं इन्सान हूँ. बहुत कुछ जोड़ -जोड़ कर read more

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चोट
© Subhash Neerav

Others Inspirational +1

अब लड़का अधमुंदी आँखों से उसे निहार रहा था। चेहरे पर पड़ती सीधी धूप से लड़के का read more

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समाज का read more

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मुझे अपने सवालों के जवाब नहीं मिल रहे थे। अपने लिए ही नहीं तो दूसरों के सवालों के read more

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वोलंटरी रिटायरमेंट के बाद खन्ना जी अधूरी रह गई बचपन की अपनी आकांक्षाओं को नए सिरे read more

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* हमेशा मुस्कुराते रहो खुश रहो read more

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‘‘मोहब्बत और उससे। अपनी इतनी अच्छी पत्नी....मासूम बीवी का नहीं हुआ....वो मेरा क्या read more

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उस अँधेरे सन्नाटे में गूँजती हुई चीख दूर सिवान में जाकर विलीन होने लगी, जहाँ read more

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लहरों की read more

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  उसे अपने आप पर बहुत शर्मिंदगी होने लगी। चुपचाप अपनी सीट पर आकर बैठ गया और शीशा read more

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आख़िर धर्म से तो उनकी विवाहिता हूँ। वे धर्म नहीं निभा पाये यह बात दीगर है। कुमार read more

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तो खिले read more

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इस सिसकती जिंदगी को जिंदगी कैसे कहूँजो करी तुमने थी मेरी बन्दगी कैसे read more

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आखें गड़ाकर देखती रहूँ आसमान कि टूटेगा कोई तारा अभी और मैं झट से आँख read more

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हमे नही लड़ाओ जाती के नाम पे,       ना फसाओ झूठे वादों के जाल में       बहुत दयनीय read more

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उन दिनों लोग रिटायर होने के करीब पहुँचने पर प्रोफेसर बना करते थे। बहुत-से तो बन ही read more

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तभी एक चुलबुली लहर ने दोनों के पैर भिगो दिऐ और लौटकर समंदर के सीने में समा गई। मीरा read more

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हिंदी साहित्य में अंग्रेजी के प्रयोग के विरोध में एक रचना प्रस्तुत है read more

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शादी का मतलब बंधन नहीं साथ होता read more

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सांवली की बड़ी-बड़ी आँखें आश्चर्य से और बड़ी हो पूरे कमरे का मुआयना कर रहीं थीं। एक read more

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23 अप्रैल 1995। लखीमपुर खीरी का वाई.डी. कालेज। मैं शाम को परीक्षा कक्ष में बैठा हुआ read more

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अब तुम चली गयी हो, उस गुड़हल के मोह को प्रेम में तब्दील करके ! अब गुड़हल फर्श के नीचे read more

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नदी के दो किनारों से बहते यूँ तो आ गए पास read more

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किसी भी चीज के प्रति तत्काल आकर्षित होना और फिर उससे ऊब जाना प्रकाश की विशेषता थी। read more

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शहतूत पक गये read more

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