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नोट : कन्टेन्ट क्रमांक चुने हुए जोनर के तहत फिल्टर में प्रदर्शित होंगे : others

समाज का read more

3     21.5K    25    572

आधी रात के करीब जब सभी गहरी नींद में सो रहे थे तभी कौटिल्य ने शिष्य को उठाया और read more

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एक रात मैंने पापा से पूछा, “पापा ये आम आदमी क्या होता read more

12     13.9K    38    1636

लेखिका की समझ में ही नहीं आ रहा था कि उसकी रचना जिसे वह आत्मा से लिखती है ज्यादा read more

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पश्चाताप की read more

6     14.7K    30    1644

समाज में फैले हुए अंधविश्वास पर आधारित एक read more

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आज के समाज का आईना ये read more

4     14.9K    38    1239

आयना दिखाने वाली read more

5     14.6K    27    1887

अंधविश्वास को बड़ी ख़ूबसूरती से निशाना बनाती, प्रख्यात लेखक खुशवंत सिंह की अंग्रेज़ी read more

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ममता
© Saras Darbari

Others Tragedy

इंस्पेक्टर भी बच्चे का बवाल नहीं पालना चाहता था, इसलिए उसने ज़रूरी लिखा पढ़ी के बाद read more

3     332    13    1657

स्कूल जाते समय एक नाग की वजह से लोकेश की साइकिल का संतुलन बिगड़ा और वो गहरी खाई में read more

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रेल की टिकट नहीं मिली तो बस में सफ़र करना पड़ा, मेरी सीट के बगल में एक मोटा थुल थुल read more

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मैं सदियों से उसका राज़ अपने सीने में छुपाने के लिए ख़ुद को दाद देता read more

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क्या हमें अपनी बेटियों को वे सपने दिखने का हक़ है जो शायद शादी के बाद कभी पूरे न read more

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तनिष्का का अपने कुत्ते के प्रति नफरत प्यार में कैसे परिवर्तित हुई उसकी रोचक read more

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पत्नी काे कठपुतली समझकर ना नचाओ... उसके भी सपने हाेते है-छाेटे छाेटे ही सही, जिसे वह read more

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आंखों से आँसू रुकने का नाम नही ले read more

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"नहीं मांजी, डरपोक नहीं बनेगा ये रोने से बल्कि इसे समझ आएगा कि दर्द होता है तभी कोई read more

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लड़का है तो क्या हुआ, है तो हाड़ माँस का शरीर ही, जिसमें एक नाज़ुक, कोमल हृदय भी है। read more

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वह ठेला नहीं था, उस ठेले के हर मर्तबान में, हर शीशी में, हर थैली में, उनके घर का read more

3     393    34    259

‘कोई बात नहीं। यह तो तुम्हारा फर्ज था‘, और वह चल दिया। उसके चलने पर उन दोंनों ने read more

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मैंने उसे कहा," अरे, तुम को यहाँ नहीं होना चाहिए था,तुम्हारी परफेक्ट जगह तो किसी read more

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" तस्वीर बढ़िया बनी है पर आपने इस तस्वीर में मेरे बाल ज्यादा बना दिये हैं जबकि मेरे read more

3     394    33    261

"मेरी छोड़ तु अपनी जीवनसाथी की तस्वीर तो दिखा!” उसने तस्वीर दिखाई! जिसे देख मेरी read more

5     293    31    378

लेखक : धीराविट पी. नात्थागार्न ; अनुवाद : आ. चारुमति read more

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लेखक: धीराविट पी. नात्थागार्न ; अनुवाद : आ. चारुमति read more

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हम सभी लोग इतना सहम गए कि सारी दिवाली का मजा किरकिरा हो गया । और आज भी मैं अनार read more

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वर्षों से धधकता ज्वालामुखी आज अचानक फूट पड़ा । फायर का आदेश होते ही एक जोरदार धमाका read more

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ओम की बात सुनकर कामिनी को समझ में नहीं आ रहा था कि हँसे या रोये...। दुख तो उसे इस read more

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तभी निशा को अहम की सासें सुनाई पड़ती हैं और वो अंधेरे में अहम को देखने की कोशिश करती read more

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