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Hilal Saeed

Drama


5.0  

Hilal Saeed

Drama


ना-मुकम्मल ख्वाब

ना-मुकम्मल ख्वाब

1 min 422 1 min 422

यू तो जिंदगी सब जीते हैं, पर मेरी जिंदगी उनके आने पर शुरू हुई, था पहले भी मैं खुश, सब था मुझको हासिल पर उनके आने के बाद लगा जैसे कोई अधुरी ख्वाहिश उनके आने के बाद मुकम्मल हुई हो।

महसूस यूं हुआ मुझको जैसे कोई ख्व़ाब हो रहा हो मुकम्मल।

बाखुदा, वो मुझको इत्तेफाक से हुआ यूं हासिल, ना मेने कभी कोई मन्नत मांगी थी, ना ही चाहा था कभी ऐसा होना, पर शायद किस्मत में लिखा होता है कुछ लोगों का ना चाहते हुए भी यूं करीब आना।

शुरू जब ये सिलसिला हुआ था तब मुझे खबर भी ना थी, की कहाँ लेकर जाएगी मुझको यह जिंदगी।

उनकी वो आँखें जिन्होंने मेरे दिल को अपनी केंद मे लिया, फिर रफ्ता रफ्ता दोस्ती से शुरू हुई वो जिंदगी, अंदाज ऐ गुफतगु ने उनकी हमे शदीद दिवाना बना दिया। 

कहते थे वो पल शायद मुझको, जैसे उनके जैसा शख्स ना होगा मुझे कभी हासिल।

मुझको कभी ना महसूस हुआ था, की वो इतने करीब आएंगे, ना जाने कब वो इस कदर रु-बरु हो गये थे मुझसे, की एक अजनबी से मेरी जिंदगी का हिस्सा मुझको वो लगने लगे थे,

तब मुझको खबर भी ना थी की यूं ना-चाहते हुए भी जिंदगी खुद बदल जाती है।

"कभी कभी एक ख्वाब का मुकम्मल होना भी इस जिंदगी को मंजूर नहीं होता।"


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