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Kameshwari Karri

Abstract


4.7  

Kameshwari Karri

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मुझसे बढ़कर कौन ?????

मुझसे बढ़कर कौन ?????

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हासिनी दी !तुम बहुत स्वार्थी हो। फ़ोन पर हिमानी की बातें सुनते ही हासिनी को ग़ुस्सा आया ,हाँ मैं स्वार्थी हूँ ,क्या कर लेगी बोल वैसे तुम से तो कम ही हूँ बाहर से दिखावा करती है कि आपसे बहुत प्यार है दी और अंदर से जेलस करती है। क्या दी ? मैं सबसे छोटी हूँ। माँ पापा आपसे मुझसे ज़्यादा प्यार करते हैं ,मुझे तो अनदेखा कर देते हैं। और आप भी जब देखो तब बातें सुना देती हैं कहकर हिमानी रोते हुए फ़ोन कट कर देती है। अब देखना यह है कि इन दोनों के झगड़े में कौन जीतता है

अजय और अलका की दो बेटियाँ हैं। बड़ी बेटी हासिनी और हिमानी छोटी है। वे दोनों 

इन दोनों के झगड़ों से तंग आ गए थे। दोनों को एक जैसे ही पाल पोसकर बड़ा किया था पढ़ाई अच्छी ही कराईमालूम नहीं कहाँ से और कब से इन दोनों में यह लड़ाई शुरू हुई ? दोनों की शादी हो गई थी। दोनों को ही अच्छा पति और परिवार मिला। हासिनी के दो लडके और हिमानी के भी दो लड़के थे। सब प्यार से रहते थे। पति के नौकरियों से लेकर गहने ,घर बच्चे उनकी पढ़ाई हर छोटी -छोटी बातों पर कहा सुनी हो जाती है। सोचा था बच्चे बढ़ रहे हैं तो शायद समस्या का हल हो जाएगा नहीं अब तो और बढ़ गई। बड़ी के घर गए तो छोटी को ग़ुस्सा छोटी के घर गए तो बड़ी को ग़ुस्सा। इसलिए घर भी दोनों को एक साथ नहीं बुलाते थे क्योंकि घर को कुरुक्षेत्र का मैदान बना देते थे। अलका और अजय को भी लगता था अब हमारी ज़िम्मेदारियाँ भी ख़त्म हुई है आराम से रह सकते हैं पर कहाँ इन दोनों ने तो उन्हें फ़ुरसत से साँस भी नहीं लेने दिया।  

कल की ही बात है ,छोटी का फ़ोन आया आपने दीदी के बेटे का जिस स्कूल में भर्ती कराया है ,मेरे बेटे को भी वहीं भेजना चाहती हूँ तो आप वहाँ स्कूल में बात कीजिए।

यह सब काम आसानी से नहीं होते। उन्हें कैसे समझाए। अभी स्कूल में एडमिशन मिलना दाँतों तले चना चबाने जैसा हो गया है। पर अब जब तक एडमिशन नहीं मिलेगा ,यह छोटी मुझे सोने नहीं देगी। किसी तरह मैंने अपनी पहचान के कारण उसके बच्चे का एडमिशन कराया। अब वह ख़ुश है। थोडे दिन वह मुझ पर मेहरबान भी रहेगी पर अब इस समाचार को सुनते ही बड़ी क्या घपला करने वाली है यह सोच -सोच कर मेरा दिल बैठा जा रहा था। अलका ने कहा —- अब उनके बारे में सोचना छोड़िए आपको मालूम है ,कितने दिन हो गए हम लोग कहीं घूमने नहीं गए। मैं सोच रही थी हम कहीं घूम आए। अजय ने कहा -सही कहा तुमने बोलो कहाँ चलते हैं। मेरा बनारस जाने का मन कर रहा है ,

 चलिए न वहाँ जाकर थोड़े दिन रहते हैं। ठीक है मैं टिकट का प्रबंध करता हूँ ,अजय कहता है। दोनों बातें करते रहते हैं तभी हासिनी का फ़ोन आया — पापा ख़ुश ख़बरी है। वाह बेटा क्या बात है ? हमने अपने घर के ऊपर जो घर बनाया है न उसका गृह प्रवेश कर रहे हैं ,१५ जनवरी आप लोगों को एक सप्ताह पहले ही आना है ,मेरी मदद जो करनी है तो कुछ अपने प्लान मत बना लेना ,कहकर चहकने लगी। अरे बेटा ज़रूर आएँगे ,तू फ़िक्र मत कर बहुत ख़ुशी की बात है। कह कर फ़ोन रख दिया। अब अजय ने कहा बनारस हासिनी के गृह प्रवेश के बाद चलते हैं। अच्छा हुआ मैंने टिकट बुक नहीं कराया है ,कहते हुए दोनों बातें करने लगते हैं।  

दूसरे दिन अजय जैसे ही नहाकर बाथरूम से आया ,अलका ने कहा अजय ग़ज़ब हो गया , अजय डर गया क्या हुआ ?अलका सब ठीक है न रुको मैं भगवान को प्रणाम करके आता हूँ। इस बीच अच्छी सी चाय बनाओ पीते -पीते बातें करेंगे। अलका चाय बनाने गई और चाय लेकर बैठक में आई तब तक अजय भी आ गया और चाय पीते हुए कहा ,चल अब बोल क्या ग़ज़ब हुआ। हिमानी का फ़ोन आया था अरे ! वाह बोलो क्या कहा उसने !!! उसके बड़े बेटे का जनेऊ कराना चाह रही है बहुत बढ़िया अभी ही सही समय है। वैसे अलका वह नौ साल का हो गया है न कल की ही बात है ऐसा लगता है। हाँ आगे बोल। जी अब बता पंडित से बातकरना है क्या ? अरे नहीं जी उन्होंने बात कर ली है। मुहूर्त भी निकाल लिया है यह तो बड़ी अच्छी बात है बोल कब का मुहूर्त निकाला है। दोनों बेटियों के यहाँ के कार्यक्रम निबटाकर हम बनारस भागते हैं।  

ज़्यादा ख़ुश मत हो जाइए। उसके यहाँ का मुहूर्त भी १५ जनवरी का ही है। बस अब अजय की बोलती बंद हो गई।  

हिमानी का फ़ोन आया पापा माँ ने आपको बताया होगा ,जैसे आपने कहा ,वैसे ही नौ साल में ही मैं अपने बेटे जनेऊ करा देना चाहती हूँ। एक सप्ताह पहले ही आप लोगों को आना पड़ेगा। मेरी मदद जो करनी है। अजय ने कहा पर मुझे मालूम है आप क्या कहना चाहते हैं ,दीदी अपने पुराने घर के ऊपर घर बनाकर इतरा रही है। अगले साल मेरे ससुर भी गाँव का घर बेचकर हमें एक करोड़ से ज़्यादा पैसे देने वाले हैं ,तब हम भी बड़ा सा घर बनवाएँगे। आप अभी कुछ नहीं बोलेंगे मेरे बेटे के भविष्य का सवाल है। आपने ही कहा था ,छोटी उम्र में जनेऊ कर देने से बच्चों में डिसप्लीन बढ़ जाता है। उसे कहिए अपने घर का गृह प्रवेश बाद में कर देगी। आप दोनों नहीं आए तो मैं फिर कभी आपके पास नहीं आऊँगी हाँअजय कुछ बोलता उससे पहले ही उसने फ़ोन रख दिया कहने के बदले में पटक दिया कह सकते हैं।  

अजय अलका दोनों एक दूसरे की तरफ़ देखते हैं तभी फ़ोन की घंटी बजती है।  

हेलो!!!! जी पापा हासिनी बोल रही हूँ मैंने सुना है ,आपकी छोटी बेटी भी इसी दिन इसी मुहूर्त में अपने बेटे का जनेऊ करा रही है। देख लिया न आपने हमेशा कहते हैं छोटी है पर अपने औक़ात पर आ ही गई न !!जलती है !मुझसे मैंने पहले आपको बताया है और घर की बड़ी बेटी हूँ ,थोड़ा भी प्यार है मुझसे तो आप मेरे ही घर आएँगे। अभी तो उसका बेटा छोटा है ,अगले साल जनेऊ करा सकती है कि नहीं। हमेशा मेरे काम के बीच टाँग अड़ाना कोई उससे ही सीखे !हुँह !!कहते हुए फटाक से रिसीवर रखती है।  

दूसरे दिन सवेरे अजय ने कहा ,अलका सामान बाँध हम लोग एक महीने के लिए बनारस जा रहे हैं। मैं टिकट बुक कराकर आता हूँ। दो दिन बाद दोनों बनारस पहुँच जाते हैं और दोनों बेटियों के घर चिट्ठी फ़ंक्शन के एकदिन पहले पहुँचती हैं। दोनों चिट्ठी खोलकर पढ़ती हैं। हासिनी,हिमानी 

माँ पापा का प्यार , 

बेटे हम दोनों ने बहुत ही प्यार से आप दोनों को पाल पोसकर बड़ा किया था। आप दोनों हमारी दो आँखों के समान हो। किसी एक को भी हम तकलीफ़ में नहीं देख सकते। आप दोनों अब दो -दो बच्चों की माँ हैं ,फिर भी आप लोग इस तरह से लड़ते हुए ,अपने बच्चों को क्या सिखा रहे हैं। अभी से ही उनके बीच फूट के बीज बो रहे हो। हासिनी बहन के बच्चे आपके नहीं हैं क्या वे लोग अच्छे से आगे बढ़े तो आपको ख़ुशी नहीं होगी। हिमानी बहन ने बड़ा -सा घर लिया तो तुम्हें ख़ुशी नहीं होगी। कल तुम भी बड़ा -सा घर बनाओगी। यह दुनिया की रीत है ,बच्चे बस थोड़ा -सा आगे पीछे। हम आप दोनों को दुखी नहीं करना चाहते थे। इसलिए हमने सोचा कि हम अपना शेष जीवन बनारस में ही बिताए। आप दोनों अपने -अपने परिवार में ख़ुश रहें। बच्चों को प्यार!!

हासिनी ने हिमानी को फ़ोन किया। फ़ोन पर दीदी की आवाज़ सुनते ही हिमानी ने कहा दीदी सॉरी हासिनी ने कहा ,छोड़ रे तू तो छोटी है ,मैं बड़ी होकर भी तुझसे लड़ती थी सॉरी। हिमानी ने कहा दीदी हम दोनों ने माँ पापा को बहुत तकलीफ़ दी है। उनका दिल बहुत दुखाया है। मैं कल ही बनारस के लिए टिकट बुक करती हूँ। हम लोग उनसे मिलकर उन्हें अपने साथ ला लेंगे ,वन्स अगेन!सॉरी दी। अरे !हिमानी तू जैसे कहेगी वैसे ही करूँगी। ठीक है कल चलते हैं ,हम माँ पापा से माफ़ी माँग लेंगे। दोनों की बातें सुनकर अजय अलका वापस आकर अपने नातियों के साथ सुखी जीवन बिताए। इसकी हम कामना करेंगे।  


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