Hurry up! before its gone. Grab the BESTSELLERS now.
Hurry up! before its gone. Grab the BESTSELLERS now.

प्रीति शर्मा

Romance Inspirational


4.2  

प्रीति शर्मा

Romance Inspirational


मेरा तुझसे पहले का नाता कोई

मेरा तुझसे पहले का नाता कोई

5 mins 252 5 mins 252

मेरा तुझसे पहले का है नाता कोई.. 

यूं ही नहीं दिल लुभाता कोई.. 

मेरा.....

     एफ एम पर गाना आ रहा था और निकिता काम करते हुये साथ-साथ गुनगुना रही थी। वह गाने में इतनी मगन थी कि कब सोमेश कमरे में आया पता ही ना चला। उसे अह़सास तब हुआ जब सोमेश की बाहें उसके इर्द गिर्द लिपट गईं और उसके स्वर में स्वर मिलाकर वह भी गाने लगा।

मेरा तुझसे पहले का...और लाइनों को समाप्त करने के बाद दोनों के ठहाके कमरे में गूंजने लगे। 

"सच में ये गीत हम पर कितना फिट बैठता है ना।"

निकिता का हाथ अपने हाथ में लेते हुए सोमेश ने कहा।

"हां, सोमेश" कहती हुई निकिता ने अपना सिर सोमेश के कंधे पर टिका दिया और डूब गई कुछ पुरानी यादों में.....

  जब वह शादी होकर दुल्हन के रूप में ससुराल आई तो सोमेश उसके लिए बिल्कुल अंजान था।सोमेश ने उसे देखा भी नहीं था।उसके मां-बाप ने उसे पसंद किया और फिर 'चट मंगनी पट ब्याह' हो गया।

शादी की रस्मों को निभाते-निभाते निकिता ने तो ह्रदय से उसे अपना मान लिया था। भारतीय संस्कृति की यही तो खूबसूरती है कि हर रस्म किसी ना किसी भावना को व्यक्त करती है।इन्हीं रस्मों को निभाते हुए दो अलग-अलग व्यक्तित्व एक-दूसरे को वचन देते-देते कब एक-दूसरे से बंध जाते हैं, उन्हें शायद खुद ही आभास नहीं होता। शादी के समापन होते-होते दोनों ऐसे अटूट बंधन में बंध जाते हैं कि ये बंधन सात जन्मो का बंधन बन जाता है।

 जब दोनों पहली बार अकेले साथ हुये तो सोमेश में एक हिचक थी। शायद कई सवाल थे उसके दिल दिमाग में... 

और उसने निकिता से पूछ ही लिया कि क्या वह उसे पसंद आया.. ?

   दरअसल उसे अपने गहरे रंग और पतले-दुबले शरीर को लेकर संशय था कि निकिता ने उसे पहले नहीं देखा था और अब वह उसके बारे में क्या सोचती है?

 कहीं मां बाप की इच्छा से शादी कर ली हो और अब उसका रूप-रंग देख दुःखी होगी। निकिता खिलते रंग की, सुंदर गुड़िया सी थी।

  उसका प्रश्न सुन एकबारगी तो निकिता सन्न रह गई। सोमेश के अन्दर कोई हीनभावना है, अगर ऐसा है तो बड़ी मुश्किल होगी.. ।

  जब किसी के अन्तर्मन में कोई कुण्ठा या हीनग्रन्थि हो तो उसके साथ बड़ा ही संभलकर व्यवहार करना चाहिए। निकिता समझ गई कि सोमेश के साथ क्या समस्या है और उसे बड़ी सहजता से उस समस्या को मिटाना है। यह सब शरमाने या झिझकने से संभव नहीं। इस समय उसे सोमेश के मन के संशय को बड़ी समझदारी से दूर करना है। निकिता हंस पड़ी,मुस्कराते हुए पूछा,

"आपको ऐसा क्यों लगा?"

कुछ पल तो सोमेश चुप रहा, शायद उसकी हंसी और मुस्कान का आंकलन कर रहा था। उसे उसमें कहीं दुःख या बनावट नजर ना आई तो फिर धीरे से बोला,

"तुम बहुत खूबसूरत हो और अपने पति के रूप में किसी राजकुमार की कल्पना की होगी। मुझे तुमने देखा भी नहीं था और जब देखा तो ....

तुम्हारा सपना भी टूटा होगा... ..

इतना बोलकर सोमेश खामोश हो गया।

निकिता को लगा यही सही समय है कि वह शुरुआत में ही सोमेश के दिमाग से यह बात निकाल सकती है वरना वह जीवन भर सहज नहीं हो पायेगा।

   शर्म छोड़ उसने सोमेश का हाथ अपने हाथ में ले लिया

"मैंने आपकी फोटो देखी थी। आपकी मम्मी ने मुझे आपकी प्रकृति के बारे में बताया और उसके बाद मेरे मम्मी-पापा ने मेरा जवाब मांगा था और सब जानने के बाद ही मैंने हां की थी। रंग तो दो ही हैं, श्वेत-श्याम और दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। एक के बिना दूसरे का कोई अस्तित्व नहीं

"निकिता सोमेश के चेहरे पर नजर जमाये थी और एक एक शब्द पर जोर देते हुए उसने अपनी बात पूरी की।

सोमेश कुछ आश्वस्त हुआ लेकिन अभी भी उसका सारा संशय ख़त्म नहीं हुआ था। वह अभी भी खामोश था-और निकिता यह समझ गई क्योंकि उसने निकिता के हाथों में अपना हाथ दे तो रखा था पर उसमें गरमाहट नहीं थी।

निकिता ने आगे बात जारी रखी,

"मैंने कभी किसी सुंदर राजकुमार के सपने नहीं देखे। मेरे लिए वही राजकुमार था जो मेरे मम्मी-पापा मेरे लिए चुनते। मां-बाप से बढ़कर कौन है जो बच्चों का हित चाहता है, उसका बुरा भला किसमें है ये सोचता है। जब उन्होंने आपको मेरे लिए चुना तो आप ही मेरे लिए राजकुमार थे मैंने तो आपको ही अपने ख्वाबों का शहजादा माना और शादी की रस्मों के बाद हम शरीर से बेशक दो हों लेकिन मन से, आत्मा से सातों जनम के लिए एक हुये"

"क्या आपको मेरी बातों पर यकीन नहीं?

"निकिता ने सोमेश की आंखों में झांकते हुए कहा।

   सोमेश ने जैसे कुछ निश्चित कर लिया था। वह उठा और उसने निकिता को गर्मजोशी से अपनी बांहों में भर लिया।

उसके अंदर का संशय समाप्त हो गया, ये उसके प्रफुल्लित मुख से दिख रहा था। उसने निकिता के मस्तक को चूमा और फिर उसके हाथों को अपने हाथों में लिया।

"तुम मेरे जीवन में नयी उमंग लेकर आई हो निक्की। ऐसा लग रहा है मानो मुझे हमेशा से तुम्हारी ही तलाश थी और तुमसे मिलकर लग ऐसा रहा है कि मेरा और तुम्हारा रिश्ता इसी जन्म का नहीं बल्कि जन्मों-जन्मों का है।"

"सच......में"

"हां, बिल्कुल सच" सोमेश ने उसके सिर को अपने सीने से लगाते हुए कहा।"

  "निकिता कहां खो गईं" सोमेश ने उसके गालों पर हाथ फिराते हुये कहा।"

ऊं.ऊंहुं...निकिता यादों से बाहर आई।

गाना अभी भी चल रहा था।

मेरा तुझसे पहले का है नाता कोई......

यूं नहीं दिल लुभाता कोई..


 



Rate this content
Log in

More hindi story from प्रीति शर्मा

Similar hindi story from Romance