क्या वो अब नहीं खेलेगी
क्या वो अब नहीं खेलेगी
पार्क में बच्चे खेल रहे थे और शोर मचा रहे थे। तभी किसी ने कहा...
"अरे... अवनि के स्कर्ट में ये क्या लगा है?"एक लड़की ने कहा तो उसकी देखादेखी अन्य बच्चे भी अवनि को देखने चले आए। अवनि कुछ देखती समझती उसके पहले ही उनमें जो कुछ बड़ी बच्ची थी, उसने कहा,"अरे... मैं समझ गई कि अवनि के तो आंटीजी आई है। अब अवनि बड़ी हो गई है!"
अवनि पार्क में खेल रही थी कि बच्चों ने उसकी स्कर्ट की तरफ देखकर कुछ शोर मचाया और वह एकदम हड़बड़ाकर खेलते खेलते घर आई और एक साथ तीन चार बार कॉलबेल बजा दिया।सुपर्णा रात के खाने की तैयारी कर रही थी। उसने जल्दी से गीले हाथों से ही दरवाजा खोला।वह अवनि को कुछ कहती... उसके पहले ही अवनि दौड़कर बाथरुम चली गई।
सुपर्णा ने सोचा, कि बच्ची शायद नेचर कॉल के लिए गई हो।
थोड़ी देर बाद अवनि के दोस्त उसके पीछे पीछे आए और दरवाजे के पास खड़े हो गए और कहने लगे,"आंटी ! आंटी अवनी ठीक है ना ?"
इधर अवनि को बॉथरूम गए हुए काफ़ी समय हो गया था।सुपर्णा ने सोचा, शायद अवनि बीच खेल से भाग आई है, इसलिए उसके दोस्त उसे बुलाने आए हैं।इसलिए वह अवनि को वॉशरूम के बाहर से ही आवाज देने लगी,
"अवनि....! बेटा , अब जल्दी बाहर आओ। काफ़ी देर हो गई। तुम्हारे दोस्त तुमको बुलाने आए हैं!"पर... सुपर्णा चौंक गई जब अंदर से अवनि के जोर जोर से रोने की आवाज आई और रोते रोते ही अवनि अंदर से बोली,"मैं बाहर नहीं आऊंगी मम्मी! पहले मेरे सारे दोस्तों को भगाओ। जब तक वो लोग रहेंगे मैं बिल्कुल बाहर नहीं आऊंगी?"
सुपर्णा की समझ में नहीं आया कि अवनि ऐसा क्यों कह रही है ? कहीं ऐसा तो नहीं कि उसके दोस्तों ने उसका बुली किया हो, उसे किसी बात पर चिढ़ाया हो...?इसलिए उसने सोचा उसके दोस्तों से ही पूछ ले कि आज पार्क में खेलते समय क्या हुआ था ?तभी उन बच्चों में से थोड़ी बड़ी अन्नू और निक्की बाहर आई और बोली,
"अवनि के तो आंटीजी आ गई हैं...आंटीजी ...! अब तो अवनि बड़ी हो गई है!"निक्की कुछ ज़्यादा ही अनुभवी बनकर ज्ञान बांटते हुए बोली ,"आंटी ! आप अवनि को जल्दी से
सैनिटरी नैपकीन पैड दिलवा दीजिए नहीं तो वह और परेशान होगी। अभी खेलते समय हम सबने देखा, उसके स्कर्ट में दाग लग गया था। इसलिए तो वह अभी बाथरूम में बंद हो गई है!"
सुपर्णा बच्चों की बात सुनकर एकदम अविश्वास से सोचने लगी कि....
"ओह...इसका मतलब...अवनि के पीरियड्स शुरु हो गए। अभी तो वह ग्यारह साल की भी नहीं हुई है। इतनी जल्दी ....?
सोचकर सुपर्णा परेशान हो गई और उलझन में पड़ गई। क्योंकि अवनि अभी बहुत छोटी थी। इतनी जल्दी उसके पीरियड आना और उसे आसानी से स्वीकार करना, मां बेटी दोनों के लिए ही मुश्किल था।
अब आगे.....
चुंकि अवनि को कम उम्र में मासिक धर्म शुरू हो गया था। इसलिए सुपर्णा उसके स्वास्थ्य को लेकर और आगे उसके खाने में क्या-क्या चीज दी जाए ताकि उसकी लंबाई भी बढ़ती रहे और उसे पर्याप्त मात्रा में पौष्टिकता भी मिलती रहे। इन सब बातों का ध्यान रखते हुए उसे डॉक्टर के पास ले गई।तो.... डॉक्टर ने कहा," आजकल हारमोनल और अन्य कई कारणों से बच्चियों के पीरियड्स जल्दी आ जाते हैं। इसमें चिंता करने की कोई बात नहीं है!"
सुपर्णा ने अवनि को बड़े प्यार से समझाया कि,"यह एक सामान्य प्रक्रिया है। जिससे हर लड़की गुजरती है!"अवनि के कई सारे छोटे छोटे सवाल थे जिसके जवाब सुपर्णा बड़े ही धैर्य से दे रही थी।जब मां ने सब कुछ साफ-साफ समझाया तो अवनि फिर सामान्य हुई और फिर उसका व्यवहार भी नॉर्मल हो गया।
हालांकि लड़कियां अभी भी मासिक धर्म को अलग-अलग नामों से पुकारती।
कोई कहती...
मुसीबत आई है...!
तो कोई कहती आंटीजी आई है...!लेकिन अवनि मुस्कुराकर कहती," यह तो हमें एक वरशिप (वरदान ) मिला है ताकि आगे चलकर हम माँ होने के एहसास और मातृत्व की प्रतिष्ठत गरिमा प्राप्त कर सकें!"
सुपर्णा ने अपनी समझदारी से और अपने समझाने के सुंदर तरीके से अपनी बेटी अवनि के मन में जो सकारात्मकता भर दी थी। उससे ना तो अवनि की पढ़ाई पर कोई असर पड़ा और ना ही उसे मासिक धर्म की वजह से शर्मिंदगी का अहसास हुआ।यह सब... इसलिए भी कि... सुपर्णा ने एक जागरूक और समझदार मां की तरह अपनी बेटी को महीने के उन पांच दिनों के बारे में पर्याप्त जानकारी देकर उसे कई तरह की परेशानी और उलझनों से उबार लिया था।आज इसी जागरूकता की आवश्यकता है आज की किशोरियों में मासिक धर्म को लेकर वैसे भी बहुत खुलापन है वह समझदार है। उसके साथ इस गर्व का अहसास होना भी जरूरी है कि मासिक धर्म कोई गलत या गंदी चीज नहीं है बल्कि एक गौरव है।
तभी तो...कुछ दिनों बाद...
अवनि फिर खिलखिलाकर पार्क में खेल रही थी। और सुपर्णा वय:संधि पर खड़ी अपनी बिटिया को बड़े प्यार से निहार रही थी जिसने मासिक धर्म की प्रक्रिया के तहत अपने शारीरिक बदलाव को बिल्कुल सामान्य तरीके से अपनाया था और फिर से पहले की तरह मुस्कुराने लगी थी।
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