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Sriram Mishra

Crime thriller tragedy


4.0  

Sriram Mishra

Crime thriller tragedy


क्लेप्टोमानिया-अनसुलझी बीमारी

क्लेप्टोमानिया-अनसुलझी बीमारी

50 mins 226 50 mins 226


 

साइकॉलोजिस्ट क्लेप्टोमानिया बीमारी को एडिक्टिव डिसॉर्डर और ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसॉर्डर की श्रेणी में रखते हैं। लेकिन शोध में पाया गया ब्रेन में सेरोटिन नामक केमिकल के स्तर में बदलाव होने पर इस बीमारी के लक्षण पैदा होते हैं। हालांकि अभी तक इसके पीछे की ठोस वजह ढूंढी नहीं जा सकी है। अध्ययनों में यह भी देखने को मिला है कि परिवार में अगर किसी को क्लेप्टोमानिया है, तो इसका खतरा बढ़ जाता है। अधिकतर औरतें इसका शिकार होती हैं। ये एक नयी खोज है पहले इसे केवल चोरी करने से जोड़ा जाता था ।लेकिन आधुनिक युग में इसकी परिभाषा बदल गयी अब लोग सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को बेवकूफ बनाते जब कोई ब्यक्ति उनके झांसे में आ जाता है उसे लूटने के बाद फिर किसी नये ब्यक्ति की तलाश में होते हैं । इस काम को वे अपना बिजनेस समझते हैं ।पर इस अन्धकार में लोग इतना डूब जाते हैं की न उनको अपने पद की कोई गरीमा होती न अपने परिवार का सम्मान लेकिन जब नार्मल होते हैं तो उन्हें अपने परिवार और अपने सम्मान की बहुत चिन्ता होती है और खुद को बचाने की पूरी कोशिश करते हैं । ऐसे ही एक कहानी मैं आपको सुनाने जा रहा हूँ ।


कहानी मध्य प्रदेश के एक बिजनेस मैन की है जिसके पास धन दौलत की कोई कमी नहीं है जिनका नाम तक्षराज है । उनकी एक बेटी जिनका नाम सुरुचि है ।सुरुचि ग्वालियर मेडिकल कालेज में एम.बी.बी.एस की पढाई कर रही थी।एक दिन सुरुचि के एक दोस्त श्रद्धा जो कि इन्दौर की रहने वाली थी उसके बहन की शादी थी उस शादी में सुरुचि व अन्य दोस्त वन्दना रागनी आदित्य और कबीर को भी आमंत्रित किया गया था। सुरुचि दोस्तों के साथ अपने रेंजरोवर गाडी से श्रद्धा के घर पर पहुंचती हैं । सुरुचि का श्रद्धा के घर के लोग बहुत सम्मान करते हैं क्योंकि श्रद्धा के पापा सुरेश, सुरुचि के कम्पनी में कैमिस्ट के पद पर कार्यरत थे। शादी समारोह की तैयारी बड़े धूमधाम से चल रहा था ।इधर सुरुचि बाथरुम में स्नान कर रही थी और वन्दना ,रागनी, कबीर और आदित्य कपड़े की शापिंग करने गये थे ।तभी बीच में सुरुचि का मोबाइल बजने लगता है पर सुरुचि फोन उठाने में असमर्थ थी ।वो फोन श्रद्धा कर रही थी लेकिन सुरुचि के फोन न उठाने के कारण श्रद्धा स्वंय सुरुचि के बेडरूम पर पहुंच जाती है और बाहर से दरवाजा खटखटाती है सुरुचि भी अन्दर से आवाज देती है -कौन है ?

श्रद्धा ने जवाब दिया -सुरुचि मैं हूँ श्रद्धा 


सुरुचि- आ रही हूँ बाबा कपड़े पहन रही थी ये बोलते हुए   

सुरुचि दरवाजा खोलती है देखती है सामने श्रद्धा हाथ में काले रंग का बैग लेकर खडी है ।


सुरुचि ने कहा-अरे श्रद्धा अन्दर आओ क्या बात है ? आपने फोन किया था मैं भी आपके पास फोन करने वाली थी ।

 

श्रद्धा ने कहा- नही यार दीदी के कुछ आभूषण हैं सोचा अपने रूम में रखने से पहले आपको दिखा दूँ ।सुरुचि देखो ये आभूषण अच्छे हैं? ये कहते हुए श्रद्धा ने सुरुचि के सामने बैग से आभूषण निकल कर रख दिये ।

 

सोने और हीरे के आभूषण सुरुचि को बहुत पसंद आये लेकिन आभूषणों को देखते ही सुरुचि के अन्दर का शैतान जागने लगा सुरुचि अपने आपको खूब सम्भाल रही थी लेकिन सुरुचि के अन्दर का शैतान मन उस आभूषण को गायब करना चाहता है ।अब सुरुचि के अन्दर की शैतानी इच्छा प्रबल हो रही थी ।और सुरुचि के अन्दर बैठा इमानदार मन घुटने लगा था । श्रद्धा अपने कमरे मे सुरुचि को लेकर जाती है और उसके सामने आलमीरा के अन्दर बने लाकर में सारे आभूषण रख देती है। अब सुरुचि शैतान के रूप में श्रद्धा के साथ रहने लगी । शाम को हल्दी रश्म में डान्स करते समय श्रद्धा के रूम की चाभी गिर जाता है। जिसे सुरुचि चुपके से उठा लेती है और वाॅसरूम जाने का बहाना बना कर सुरुचि श्रद्धा के रूम में चली जाती है और आलमीरा खोल कर सारे आभूषण निकाल लेती है और अपने कमरे में ले जाकर छिपा देती है।

  

ये सब करने के बाद सुरुचि चाभी उसी भीड़ वाली जगह पर गिरा देती है ।हल्दी रश्म होने के बाद सभी लोग खाना खाते हैं ।और अपने-अपने बेडरूम में सोने के लिए चले जाते हैं । श्रद्धा भी अपने बेडरूम में सोने के लिए जाती है ।अब श्रद्धा अपने बेडरूम को खोलने के लिए जीन्स की पैन्ट की जेब से चाभी निकालने के लिए जेब में हाथ डालती है देखती हैं चाभी गायब थी।श्रद्धा घबरा कर चाभी ढूंढते हुए जहाँ डान्स कर रही थी वहां पहुंचती है चाभी श्रद्धा को मिल जाती है । श्रद्धा अपने बेडरूम का लाॅक खोलकर अन्दर प्रवेश करती है और आलमीरा पर ध्यान दिये बिना ही सो जाती आभूषणों को अपने रेंजरोवर के फ्यूल टैंक में डाल देती है ।क्योंकि अब वो आभूषण श्रद्धा के आलमीरा में वापस भी नही रख सकती थी।


अब तो सुरुचि के अन्दर का राक्षस मन तो अपना काम कर चुका था पर सुरुचि का दयालु शरीर बहुत डरा हुआ था की कहीं किसी को इस बात का पता न चले नही तो मैं पकडी जाउंगी और मेरे पापा का नाम खराब होगा ।अब सुरुचि का दिमाग चलने लगा सुरुचि अपने बेकसूर मन को बचाने के लिए एक कसूर और करने के लिए रात 2 बजे सी सी टीवी के हार्ड डिस्क को कन्ट्रोल रूम से चुराने के लिए जाती है। जाते समय वन्दना सुरुचि को देखती है पर ध्यान नही देती क्योंकि वन्दना नींद में थी । और इधर सुरुचि हार्ड डिस्क निकाल कर उसे भी अपने गाड़ी में छिपा देती है । लेकिन सुरुचि गलत नही थी उसे क्लेप्टोमानिया रोग था इसलिए वो ऐसा कर रही थी।साइकॉलोजिस्ट इस बीमारी को एडिक्टिव डिसॉर्डर और ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसॉर्डर की श्रेणी में रखते हैं। मनोवैज्ञानिक ऐसा मानते हैं कि ब्रेन में सेरोटिन नामक केमिकल के स्तर में बदलाव होने पर इस बीमारी के लक्षण पैदा होते हैं। इसलिए सुरुचि के पास दो मन थे एक चोरी करने से रोकता था और दूसरा मन चोरी करने के लिए लिए मजबूर कर देता था सुरुचि कितना भी अपने आपको रोकने की कोशिश करती थी लेकिन रूक नही पाती थी। 


सुरूचि भी रातभर नही सोती उसका मन था की आभूषणों को वापस कर दे लेकिन आभूषणों को गाड़ी के फ्यूल टैंक से निकालना आसान नहीं था। अगले दिन बारात आने वाली थी ।श्रद्धा के घर के लोग सब ब्यस्त थे।शाम को दुल्हन को तैयार करने का समय आ गया। दुल्हन को आभूषण पहनाने के लिए श्रद्धा से आभूषण लाने को कहा गया ।श्रद्धा आभूषण लेने के लिए अपने बेडरूम में पहुँचती है और आलमीरा खोल कर बैग उठाती है बैग हल्का देख चौंक कर बैग खोलती है देखती है बैग खाली था। अब श्रद्धा के पसीने छूटने लगे ।श्रद्धा डरी हुई थी की अपने बहन को अपने पापा मम्मी को क्या जवाब देगी। 

      

श्रद्धा के पिता सुरेश श्रद्धा को आवाज देते हैं लेकिन श्रद्धा को काफी देर हो गया था श्रद्धा नही आयी तो सुरेश खुद श्रद्धा के बेडरूम में पहुँचे तो देखा श्रद्धा अपने बेडरूम में रो रही थी ।सुरेश दौड़ कर श्रद्धा के पास पहुंचे बोले क्या हुआ बेटा ।


श्रद्धा ने कहा- पापा मैने आभूषणों से भरा ये बैग अपने आलमीरा में रखा था लेकिन बैग खाली है ।और आलमीरा का लाॅक भी नही टूटा था। और मैंने किसी को चाभी भी नही दी । पापा लोग मेरे उपर शक करेंगे । पापा मैने कुछ नही किया ।

    

 ये सुनते ही सुरेश को हार्ट अटैक होता है सुरेश फर्स पर गिरते हैं ।सुरेश की सिर पर भी काफी चोट आती है ।श्रद्धा चिल्लाते हुए सबको बुलाती है श्रद्धा का भाई विवेक अपने पापा को हास्पीटल पहुँचाता है । 

      

इधर सुरुचि को घबराहट हो रही थी। सुरुचि ने सोचा चलो अपने अकाउंट से पैसे निकाल कर श्रद्धा की बहन के लिए आभूषणों की ब्यवस्था कर दूँ ।ताकि श्रद्धा के परिवार का सम्मान न जाने पाये ।यही मेरा प्रायश्चित होगा ।  

 

सुरुचि ने अपने अकाउंट से पैसे निकाल कर श्रद्धा की बहन को अपने साथ लेकर जाती है और उसके लिए 20 लाख के आभूषण लेती है । जिसको पहन कर श्रद्धा के बहन की शादी होती है ।

       

श्रद्धा के परिवार के लोग आभूषण चोरी का एफ आई आर कर चुके थे श्रद्धा के घर में पुलिस पहुंच चुकी थी ।जांच अधिकारी इंस्पेक्टर राम ने किसी को बाहर न निकलने की निर्देश जारी कर दिया था । 

       

 लडकी के विदाई के बाद पुलिस पूरे घर की तलाशी करती है एक- एक मेहमानों का बैग चेक होता है लेकिन आभूषण का कुछ पता नही होता ।मेहमानों को जाने का आदेश दिया जाता है ।

        

उस समय सुरुचि बन्दना रागनी आदित्य और कबीर भी वहां से निकल जाते हैं । 

        

इंस्पेक्टर राम सोच में पड जाते हैं की गहने हैं कहां? फिर उनकी नजर CCTV कैमरे पर पडती है जिसका हार्ड डिस्क लेने के लिए कन्ट्रोल रूम पहुंचते हैं ।

         

इंस्पेक्टर राम देखते हैं हार्ड डिस्क गायब थी ।अब इंस्पेक्टर राम समझ जाते हैं मामला जल्दी सुलझने वाला नही । इंस्पेक्टर राम उस घर के सामने के घरों में लगे फुटेज चेक करते है जिसमें केवल सुरुचि रात 1 बजे बाहर जाती है जिसके हाथ में कुछ था जिसे लेकर गाडी के पास जाती है जहाँ सी सी टीवीकी नजर नही पहुँच पा रही थी क्योंकि सुरुचि गाड़ी के दुसरे साइड में थी।वहां से कुछ देर बाद फिर से सुरुचि खाली हाथ श्रद्धा के घर में जाती है ।फिर कुछ देर बाद लगभग 2 बजे कुछ सामान अन्दर से लेकर आती है पर फुटेज स्पष्ट नही दिखाई देता है ।


लेकिन इंस्पेक्टर राम का शक सुरुचि पर बिलकुल नही था ।राम ने सोचा जो लडकी अपने पैसे से श्रद्धा के बहन के लिए 20 लाख का आभूषण खरीद सकती है वो चोरी नही कर सकती ।

       

 दूसरे दिन इंस्पेक्टर राम श्रद्धा से पूछताछ करने के लिए अपने आफिस बुलाते हैं ।श्रद्धा समय से आफिस पहुंच कर इंस्पेक्टर राम से मिलती है ।इंस्पेक्टर राम श्रद्धा से पूंछते हैं -श्रद्धा बिना लॉक तोड़े आभूषण कैसे गायब हो सकता है और CCTV का हार्ड डिस्क भी गायब है कहीं आपने तो ऐसा नही किया है ।इतना सुनते ही श्रद्धा रोने लगी और बोली सर मेरा विश्वास कीजिये मैंने कुछ नही किया हाँ बीच में कुछ देर के लिए मेरे कमरे की चाभी गिर गई थी। 


इंस्पेक्टर राम मन में सोचते हुए-अच्छा तो ये बात है मुझे लगता है इसी बीच चाभी पाकर किसी ने अपना काम कर दिया होगा ।लेकिन ये बात किसे पता था की चाभी श्रद्धा के कमरे व आलमीरा की है और उसमें ही कीमती आभूषण रखे हुए हैं ।


इंस्पेक्टर राम भी श्रद्धा को शान्त कराते हैं और पूंछते हैं ।श्रद्धा तुम्हे किसी पर शक है। और तुम्हारे साथ कौन- कौन सबसे ज्यादा रहते थे ।


श्रद्धा-नही सर मुझे किसी पर शक नही । मेरे दोस्त मेरे साथ ज्यादा रहते थे और सबसे ज्यादा करीब सुरुचि रहती थी ।लेकिन मैं उसके ऊपर शक नही कर सकती ।क्योंकि आप जानते हैं मेरे बहन के लिए आभूषणों की ब्यवस्था सुरुचि ने कि है । और यही ही नही सर मेरे कालेज में भी किसी का लैपटॉप या कीमती सामान गायब होता है तो सुरुचि के पापा उस स्टूडेंट को नया लाकर देते हैं । 

  

इंस्पेक्टर राम - अच्छा कालेज में क्या चोरी होता था ये सुरुचि के पापा को कैसे पता होता था।


श्रद्धा- कालेज के प्रिंसिपल और सुरुचि के पापा तक्षराज के बड़े अच्छे दोस्त हैं ।


इंस्पेक्टर राम मन में ही सोचते हैं- अच्छा ये बात है ये क्राइम नही कुछ और है 


इंस्पेक्टर राम बोलते हैं-अच्छा श्रद्धा अब तुम घर जाओ जरूरत पडी तो मै आपको फिर बुलाऊंगा । 


    

इधर तक्षराज को सुरुचि के अकाउंट से 20 लाख निकलने का मैसेज मिलता है । तक्षराज अपनी बेटी से जानने की कोशिश करते हैं ।लेकिन सुरुचि कुछ नही बताती फिर तक्षराज सुरुचि के दोस्तों से पता करते हैं तब पूरी कहानी दोस्तों से पता चलती है ।

      

 तक्षराज घबरा जाते क्योंकि कई महीनों के बाद सुरुचि को क्लेप्टोमानिया का अटैक हुआ था।तक्षराज तुरन्त डाक्टर चन्द्रहास को फोन करते हैं। डाक्टर चन्द्रहास तक्षराज के पास तुरंत पहुंचते हैं ।तक्षराज ने डाक्टर चन्द्रहास को सुरुचि के बारे में पूरी कहानी बताई ।


डाक्टर चन्द्रहास ने पूछा -किसी को सुरुचि पर शक तो नही हुआ ।


तक्षराज ने कहा- अभी तो किसी को भी पता नही लेकिन कोई अधिकारी अगर जाँच करेगा तो मेरे गरेबान तक हाथ जरूर पहुंचा देगा ।


डाक्टर चन्द्रहास ने कहा-अगर ऐसा हुआ तो सुरुचि की बिमारी एक भयंकर रूप ले लेगी।


इधर सुरुचि हार्ड डिस्क गाडी में भूल कर चली आयी थी लेकिन जब सुरुचि को याद आता है तो फिर गाडी में हार्ड डिस्क खोजती है और उसमें कुछ नही मिलता ।क्योंकि हार्ड डिस्क किसी गलत हाथ में लग चुकी थी। 

   

     

इधर इंस्पेक्टर राम अपने केस को अन्जाम तक पहुचाने के लिए सुरुचि के कालेज पर पहुंच जाते हैं और सुरुचि वन्दना और रागनी पर नजर रखने लगे । 

      

सुरुचि हार्ड डिस्क गुम होने के बाद ज्यादा हाइपर होने लगी ।उस दिन सुरुचि तीन लडकियों के लैपटॉप और मोबाइल उस समय चोरी करती है जब लड़कियाँ नहाने के लिए बाथरूम में थी । सुरुचि उन लडकियों का लैपटॉप और मोबाइल चोरी से ले जा कर बगल के तालाब में डाल देती है और मुस्कुराती है। क्लेप्टोमानिया का असर खत्म होने पर सुरुचि का डर बढने लगता है जो सुरुचि के लिए बेहद खतरनाक था । सुरुचि इस दलदल से निकालना चाहती थी ।

     

     

रात में अचानक सुरुचि का मोबाइल बजता है ।सुरुचि मोबाइल फोन रिसीव करती है ।

सुरुचि-हैलो कौन ?


गुमनाम व्यक्ति- ये जरूरी नहीं है की मैं कौन बोल रहा हूँ जरूर तो हार्ड डिस्क है । जो तुम्हारे बाप के बनाये शोहरत को एक पल में डुबा सकती है ।अगर हार्ड डिस्क चाहिए तो चार दिन के अन्दर एक करोड़ का इन्तजाम कर दो नही तो हम विडियो वायरल कर देंगे ।


सुरुचि एक दम परेशान रहने लगी उसका मानसिक संतुलन भी बिगड़ने लगा । सुरुचि डिप्रेशन में रहने लगी और सोचा मैं मर जाउंगी तो सारी कहानी खत्म हो जायेगी यही सोच कर सुरुचि अपने हाथ की नब्ज को काट देती है और फर्स पर गिर पडती है इधर सुरुचि के दोस्त वन्दना ,श्रद्धा और रागनी का कमरे में प्रवेश होता है 

 

     

तीनों ने देखा सुरुचि ने अपने हाथ की नब्ज को काट दिया है वे सब तुरन्त दौड़ कर सुरुचि के हाथ पर अपना दुपट्टा बांध कर तुरन्त सुरुचि को उठा कर हास्पीटल पहुंचा देती हैं और सुरुचि के पिता तक्षराज को फोन कर देती हैं । 


तक्षराज भी अपने आफिस में थे उन्होंने अपने दोस्त डाक्टर चन्द्रहास को तुरन्त हास्पीटल में आने को कहा चन्द्रहास ,तक्षराज दोनो लोग हास्पीटल पहुंचते हैं । अभी सुरुचि आपरेशन थिएटर में थी ।दोनों लोग बाहर डाक्टर का इन्तजार कर रहे थे ।कुछ देर बाद डाक्टर बाहर आते हैं 


तक्षराज डाक्टर से पूछते हैं -डाक्टर साहब मेरी बेटी कैसी है ।


डाक्टर ने जवाब दिया-खून काफी बह गया था अब आपकी बेटी बिलकुल ठीक है ।


  

बेटी की ठीक तबियत सुनकर तक्षराज के दिल को थोड़ा तसल्ली होता है ।


अब तक्षराज डाक्टर चन्द्रहास से बोलते -डाक्टर साहब अब क्या होगा मेरी बेटी ठीक तो हो जायेगी। डाक्टर साहब कहीं ऐसा न हो पूरा शहर सुरुचि के बीमारी के बारे में जान जाये ।अगर ऐसा हुआ तो इससे शादी कौन करेगा ?


डाक्टर चन्द्रहास- सुरुचि ठीक हो जायेगी थोड़ा टाइम लगेगा आप कहें तो मैं इसकी शादी अपने बेस्ट स्टूडेंट डाक्टर अजय से करा दूं क्योंकि वो मेरे कालेज का सबसे अच्छा साइकोलाजिस्ट है । और सुरुचि का देखभाल भी करेगा।


तक्षराज बोलते हैं- पर डाक्टर साहब अगर उसे मेरे बेटी के बीमारी का पता चलेगा तो ।

 

डाक्टर चन्द्रहास बोलते हैं - सर वो आप मुझे पर छोड़ दो अजय मेरी बात मान जायेगा हम लोग उसे पूरी बात बता देंगे ।और सुरुचि का भी इस साल एम बी बी एस फाइनल हो जायेगा । और सुरुचि भी अपने कालेज की टापर है ।बस आप वो सुरुचि का केस किसी तरह मैनेज कर दो।  


तक्षराज राज अगले दिन अपने केमिकल कम्पनी में पहुँचते हैं और श्रद्धा के पापा सुरेश का हाल चाल पूछते हैं और शाम को सुरेश को अपने घर पर बुलाते हैं ।और तक्षराज सुरेश के प्रमोशन की बात भी करते हैं । 


सुरेश ने कहा- सर मेरा सौभाग्य है की आपने मुझे आमंत्रित किया मै जरूर आऊंगा ।

 

इधर इंस्पेक्टर राम अपने केस को अन्जाम देने के लिए जी जान से लगे हुए थे क्योंकि चोरी किये गये आभूषणों में 30 लाख के हीरों का हार भी था । इंस्पेक्टर राम वन्दना रागनी कबीर आदित्य से भी पूंछतांछ करते हैं । जिसमें वन्दना और कबीर इंस्पेक्टर राम को संदिग्ध लगने लगे क्योंकि वन्दना और कबीर इंस्पेक्टर राम से डर डर कर बात कर रहे थे ।

    

अब इंस्पेक्टर राम वन्दना और कबीर के पीछे हाथ धोकर पड जाता है । इंस्पेक्टर राम वन्दना और कबीर का मोबाइल नम्बर सर्विलांस पर लगा देते हैं ।अब वन्दना पाँच दिन बाद कबीर को फोन करती है ।

वन्दना फोन पर कबीर से कहती है -कबीर लगता है इंस्पेक्टर राम को हम लोगों पर शक हो गया है ।


कबीर-वन्दना तुम डरो नही हम फोन पर बात नही करेंगे हम कालेज के टाइम पर कालेज कैम्पस में मिलते हैं सब सही हो जायेगा इस साल हम लोग एम बी बी एस फाइनल करके अमेरिका में सिफ्ट हो जायेंगे।तुम केवल अपनी पढाई पर ध्यान दो।


वन्दना-लेकिन कबीर ।


कबीर- लेकिन कुछ नही है हम फोन पर ज्यादा बात नही करेंगे हम कालेज पर मिलकर बात करतें हैं ।इतना बोल कर कबीर फोन काट देता है । 

 

इधर तक्षराज के आलिशान महल पर शाम को सुरेश पहुंचते हैं जहाँ पर डाक्टर चन्द्रहास भी थे । डाक्टर चन्द्रहास भारत के जाने माने साइकोलाजिस्ट थे।इसलिए सुरेश उन्हें आसानी से पहचान जाते हैं सामने तक्षराज भी बैठे थे । सुरेश दोनों लोगों को नमस्कार करते हैं । अब तक्षराज भी खड़े होकर सुरेश का अभिवादन करतें हैं । 


तक्षराज परिचय कराते हैं- सुरेश जी ये डाक्टर चन्द्रहास है इस शहर क्या देश विदेश में भी इनके चरचे होते हैं ।


सुरेश हंस कर बोलते हैं- सर इन्हें कौन नही जानता ।

 

तक्षराज बोलते हैं - डाक्टर साहब ये सुरेश जी हैं हमारे कम्पनी के सबसे इमानदार कर्मचारी इसलिए मैं इनका प्रमोशन कर रहा हूँ आज से ये हमारे कम्पनी के सीनियर मैनेजर है ।


डाक्टर चन्द्रहास बोलते हैं - बधाई हो सुरेश जी।


सुरेश जी ने भी दोनों लोगों का धन्यवाद किया । फिर चाय पीते हैं ।


चाय खत्म होते ही सुरेश ने कहा- सर आप हमसे कुछ बात करना चाहते थे । क्या बात है सर आप कम्पनी में कुछ परेशान थे।और सुरुचि बिटिया कैसी है । मैंने सुना था सर लेकिन मैं सुरुचि बिटिया को देखने नही आ पाया । सर आपके मुझे पर इतने अहसान हैं जिसे मैं भुला नही सकता आपको हमसे कोई मदत चाहिए तो मैं तैयार हूँ मैं आपके लिए जान भी दे सकता हूँ ।


इतना सुनते ही तक्षराज के आंखों से आंसु आ गये और हाथ जोड़कर सुरेश से बोलते हैं - सुरेश जी मुझे आपके मदत की जरूरत है ।


सुरेश- सर आप ये क्या कर रहे हैं आपने मुझे नौकरी दी । मेरे बेटी श्रद्धा का एम बी बी एस मे एडमिशन कराया ।आप मेरे लिए भगवान हैं ।


तभी डाक्टर चन्द्रहास बोलते हैं- सुरेश जी आज मैं आपको जो बात बताने जा रहा हूँ आपको जानकर आश्चर्य होगा लेकिन ये बात आपको बताना बहुत जरूरी था। सुरेश जी मैं सुरुचि का इलाज बचपन से ही कर रहा हूँ ।सुरुचि को एक बीमारी है क्लेप्टोमानिया ।इस बीमारी का पता हमे बचपन में ही पता चल गया था।जब सुरुचि स्कूल जाती थी तो स्कूल में जो भी चीज अच्छी लगती उसे चोरी से उठा लाती साॅपिंग माॅल से कपड़े चुरा लाती थी ।आप तो जानते ही हैं तक्षराज जी के पास पैसे की कोई कमी नही है ।लेकिन सुरुचि की बचपन में चोरी करने की आदत नही वो एक बीमारी थी ।आज वो बीमारी उग्र रूप ले लिया है ।आप तो समझ गये होंगे । 


तभी तक्षराज बोलते हैं -सुरेश जी आप नही समझे तो मैं आपको खुलकर बता दूँ आपके घर में जो चोरी हुई है वो चोरी मेरी बेटी सुरुचि ने किया है ।और ऐसा सुरुचि ने अपनी बीमारी के कारण किया था । और जब उसके अन्दर का शैतान खत्म हुआ तो उसने आपके बेटी के लिए गहने भी खरीदे ।लेकिन सुरुचि ने अभी तक मुझे कुछ नही बताया लेकिन जब सुरुचि ने अपने खाते से 20 लाख निकाले तो मुझे शक नही हुआ और जब सुरूचि के दोस्तों से आपके घर में चोरी की खबर सुना तो मुझे सब समझ में आ गया । अब सुरुचि को पुलिस से पकड़े जाने का खतरा है इसलिए उसने आत्महत्या करने की कोशिश की है ।सुरेश मेरी बेटी की जिंदगी बचा लो अब मेरी इज्जत आपके हाथ में है । मैं आपको आभूषणों के लिए और रूपये दे दूंगा ।


सुरेश जी लम्बी साँस भरते हुए अरे नही सर सुरुचि मेरी भी बेटी है ।अगर ऐसी बात है तो मैं आपकी मदत के लिए तैयार हूँ ।मगर मुझे करना क्या है ?

 

तक्षराज बोलते हैं -सबसे पहले आपको केस वापस लेना है ।आपका ये सबसे बड़ा एहसान होगा मुझ पर। 


सुरेश जी कहते हैं- सर मैं आपकी पूरी मदत करूंगा आप मुझे बार बार शर्मिन्दा न करें ।


अब डिनर तैयार था तीनो लोग खाना खाते हैं । और तक्षराज बोलते हैं सुरेश जी काफी रात हो चुकी है आप मेरी कार ले जाइए । सुरेश जी कहते हैं नही सर कोई दिक्कत नही होगी मैं बस से चला जाऊंगा लेकिन तक्षराज के बार-बार कहने से सुरेश जी मान जाते हैं । अब डाक्टर चन्द्रहास और सुरेश जी दोनों लोग तक्षराज को शुभरात्रि कह कर अपने अपने घर निकल जाते हैं ।


इधर अगली सुबह वन्दना और कबीर कालेज के कैम्पस के बाहर मिलने की कोशिश करते हैं वहां इंस्पेक्टर राम पहले से ही भिखारी के रूप में बैठे थे। और आस पास इंस्पेक्टर राम की पूरी टीम थी । 

 

लेकिन कबीर बहुत ही शातिर दिमाग का था वो किसी पुलिस वाले को इंस्पेक्टर राम के साथ देख चुका था इसलिए वो समझ जाता है ।और वन्दना का हाथ पकड़कर आगे बढने लगता है ।जैसे ही आगे बढता है देखता है कई लोग उन लोगों के पीछे पड जाते हैं ।अब वन्दना और कबीर अपने कार तक पहुंचते हैं और कार स्टार्ट कर भागने लगते हैं ।


अब इंस्पेक्टर राम अपने भिखारी कपड़े में ही पास खड़ी पुलिस की बाइक लेकर दोनों का पीछा करने लगे । अब वन्दना और कबीर पुलिस को चकमा देकर एक सुनसान रोड पर पहुंच जाते हैं लेकिन इंस्पेक्टर राम भी पूरे पुलिस चेक नाके के सम्पर्क में थे और सभी चेक पोस्ट पर सूचना दे दी जाती है की कोई काले रंग की कार देखें उसे रोक कर रखें। इंस्पेक्टर राम उन लोगों का पीछा करते हुए एक चौराहे पर पहुंचते हैं जहाँ पूरे चेकनाको की लोकेशन लेते हैं जहाँ से सूचना ये मिलती है की अभी भी वहां से काले रंग की कोई भी कार नही निकली है ।

 

इंस्पेक्टर राम थोडे देर तक सोच कर एक कच्ची सड़क की तरह देखते हैं । फिर उन्हें पूरा भरोसा हो जाता है यदि वे लोग किसी चेक पोस्ट से नही निकले तो जरूर इस कच्ची सड़क से निकले होंगे ।


इंस्पेक्टर राम भी कच्ची सड़क पर कुछ दूर जाते हैं ।उन्हें एक पुराना किला दिखाई देता है जिसके बाहर एक काले रंग की कार खडी होती दिखाई देती है। 


इंस्पेक्टर राम मन्जिल तक पहुंच जाते हैं पर कार में कोई नही था ।अब इंस्पेक्टर राम अपनी गन निकाल कर खण्डहर की तरफ बढते हैं तभी अचानक उनके सिर पर कोई डन्डे से प्रहार करता है और इंस्पेक्टर राम की गन नीचे गिर जाती है ।लेकिन इंस्पेक्टर राम अपने आपको सम्भालते हुए दुसरे प्रहार को रोक लेते हैं ।और देखते हैं वो प्रहार कबीर ही नही आदित्य भी कर रहा था और साथ में वन्दना और रागनी भी थे ।लेकिन इंस्पेक्टर राम उन चारो से अकेले लडते हैं तभी अचानक वन्दना गन उठा कर इंस्पेक्टर राम पर चलाती है लेकिन राम बडी तेजी से आदित्य को वन्दना के सामने धक्का देते हैं ।आदित्य को गोली लग जाती है और आदित्य लडखडा कर वन्दना को भी लेकर खण्डहर से नीचे गिरता है वन्दना और आदित्य दोनों मर जाते हैं ।तभी पुलिस फोर्स भी इंस्पेक्टर राम को ट्रेस करते हुए पहुंच जाती है । रागिनी आदित्य के लिए रोती है और कबीर वन्दना के लिए रोता है ।


इंस्पेक्टर राम दोनों को थाने ले जाकर दोनों से पूछताछ करने लगते हैं ।


कबीर और रागनी बताते हैं -हमने चोरी नही की है सर। चोरी सुरुचि ने की है ।


इंस्पेक्टर राम- फिर तुम लोग भागे क्यों? और मेरे उपर जानलेवा हमला क्यों किया?


कबीर और रागनी- क्योंकि सर हमारे पास हार्ड डिस्क थी जो हमें करोड़ पति बनाती पर आप बीच में आ रहे थे। ये हार्ड डिस्क ही हम लोगों को अपने मन्जिल तक पहुंचाता।इसके लिए हमने सुरुचि से एक करोड़ रूपये भी मांगे लेकिन वो उसी दिन आत्महत्या करने की कोशिश करती है ।उसके बाद हम लोगों ने कुछ दिन शान्त रहने का फैसला किया था ।


इंस्पेक्टर राम- क्या सुरुचि को पता है?की उसके दोस्त ही उसके साथ धोखा कर रहे हैं ।


कबीर और रागनी- नही सर उसे कुछ नही पता ।


इंस्पेक्टर राम- क्या तुम लोग बता सकते हो सुरुचि ने चोरी क्यों किया ? क्योंकि सुरुचि के पास पैसे की भी कोई कमी नहीं है ।और चोरी किया तो आभूषणों को कहाँ पर छिपाया ये भी तुम लोग जानते होगे ?


कबीर - नही सर पहले हम लोगों को भी विश्वास नहीं था कि सुरुचि चोरी कर सकती है वो तो गलती से सुरुचि ने हार्ड डिस्क वन्दना के बैग में रख दिया था ।नही तो हम लोगों को कभी भी नही पता चलता ।हार्ड डिस्क मिलने के बाद वन्दना ने हम लोगों को बताया और आदित्य ने ही पूरा प्लान बनाया था । और सुरुचि ने सभी आभूषणों को अपने रेंजरोवर गाड़ी के फ्यूल टैंक में छिपाया है जिसे अभी हम लोग नही निकाल पाये हैं ।


इंस्पेक्टर राम-हार्ड डिस्क कहाँ हैं कबीर?

कबीर- मेरे गाड़ी में ही है सर ।


इंस्पेक्टर राम गाड़ी से हार्ड डिस्क निकाल कर लाते हैं ।    और अपने लैपटॉप में देखते हैं सुरुचि पहले कुछ देर तक अपने आप को रोकने की कोशिश कर रही है लेकिन फिर अचानक से आलमीरा खोल कर सारे आभूषण को निकाल कर गेट के बाहर ले जाती है । इंस्पेक्टर राम बस केवल इतना ही देखकर हार्ड डिस्क अपने पास रख लेता है ।



थोड़ी देर बाद सुरेश भी थाने पर पहुंचते हैं और इंस्पेक्टर राम से मिलकर एफ आई आर वापस लेने की बात करते हैं ।

 

इंस्पेक्टर राम- सुरेश जी आप एफ आई आर किसी के दबाव में तो वापस नही ले रहे हैं ।


सुरेश - नही सर ऐसी कोई बात नही मुझे सारे आभूषण मिल गये हैं । और मेरा सारा आभूषण घर में था। इसलिए मुझे अपना केश वापस लेना है ।


इंस्पेक्टर राम- सुरेश जी आप मेरे साथ आइये आपको कुछ दिखाता हूँ ।


इंस्पेक्टर राम सुरेश को सुरुचि का पूरा विडियो दिखाते हैं ।सुरेश जी कि आंखें फैल गई ।अब सुरेश जी क्या करें ।उन्होंने तक्षराज को वचन दिया था ।और इंस्पेक्टर को सुरुचि के बीमारी के बारे में भी नही बता सकते थे ।इसलिए सुरेश थाने से बाहर निकल कर तक्षराज को इंस्पेक्टर राम के बारे में सब कुछ बताते हैं ।


अब तक्षराज और डाक्टर चन्द्रहास दोनों लोग इन्दौर के लिए निकल पडते हैं । 


इन्दौर पहुंच कर सुरेश से मुलाकात कर तीनों लोग इंस्पेक्टर राम को भी मिलते हैं ।और इंस्पेक्टर राम को भी पूरी बात बताते हैं ।


इंस्पेक्टर राम तक्षराज से कहतें हैं-अच्छा तो ये बात है इसलिए फुटेज में साफ दिख रहा है सुरुचि कुछ देर अपने आपको रोकने की कोशिश करती है । उसके थोडी देर बाद एक दम प्रोफेशनल तरीके से चोरी करती है ।ठीक है डाक्टर साहब आपने सुरुचि के बीमारी के बारे में इतना बताया है और सुरेश जी भी आपके साथ हैं तो मैं भी आपके साथ हूँ । 


लेकिन तक्षराज जी एक गडबड हो गयी है ।ये हार्ड डिस्क वन्दना रागनी कबीर और आदित्य के हाथ लग गई थी । जब मुझे उन पर चोरी का शक हुआ तो मैं उनका पीछा करना शुरू कर दिया तो उन लोगों ने मेरे उपर जानलेवा हमला किया वन्दना ने तो मेरे ही गन से मेरे उपर फायर कर दिया ।और मैंने बड़े फुर्ती से वन्दना के उपर आदित्य को धक्का दे दिया ।जिससे आदित्य को गोली लग जाती है और आदित्य लडखडा कर वन्दना को लेकर खण्डहर से नीचे गिर जाता है और अब दोनों मृत्यु हो जाती है। मुझे मुठभेड़ दिखाना पडेगा क्योंकि ये चारो डाक्टर हैं ।इस समय कबीर और रागनी मेरे हिरासत में हैं पूछताछ से पता चला है ये लोग सुरुचि को ब्लैकमेल कर 1करोड़ रूपये मांग रहे थे । जिसकी वजह से डिप्रेशन में आकर सुरुचि आत्महत्या करने का प्रयास करती है ।और यही लोग उसे हास्पीटल भी लेकर जाते हैं ।अब मैं इनका क्या करूँ केश तो आगे बढ गया है सर ।

 

तक्षराज -मेरी बेटी ने तो रोग की वजह से ऐसा कदम उठाया लेकिन इन लोगों ने जान बूझ कर ये पाप किया है ।इन्हें इनकी सजा मिलनी चाहिए ।


फिर तक्षराज उन लोगों पर दबाव बना कर चोरी करके भागने का आरोप लगवा देते हैं ।


इंस्पेक्टर राम ने- कबीर और रागनी को चोरी कबूल करने के लिए राजी भी कर लिया था ।


कबीर और रागनी को कुछ दिनों की जेल हो जाती है ।


सुरुचि भी हास्पीटल से ठीक होकर घर आती है ।तक्षराज और डाक्टर चन्द्रहास सुरुचि को घर आ कर पूरी बात बताते हैं ।


और डाक्टर चन्द्रहास कहते हैं- सुरुचि जब तुम्हे लगे की मैं कुछ गलत करने वाली हूँ तो आप अपने पापा से बात करके पूरी बात बता दो । और अब टेन्शन मत लो आप अपने फाइनल सेमेस्टर की तैयारी करो ।


इतना कहकर डाक्टर चन्द्रहास बाहर आते हैं पीछे तक्षराज भी डाक्टर साहब को कार तक छोड़ने आते हैं ।


डाक्टर चन्द्रहास तक्षराज से कहते हैं -सुरुचि का ख्याल रखना सर क्योंकि अभी सुरुचि पूरी तरह से ठीक नही है ।इतना कहकर डाक्टर चन्द्रहास अपनी कार में बैठ कर निकल जाते हैं । 


कुछ दिनों बाद सुरुचि के फाइनल सेमेस्टर का रिजल्ट आता है जिसमें सुरुचि ने पूरा काॅलेज टाप किया था ।

 

इधर डाक्टर चन्द्रहास डाक्टर अजय से सुरुचि के शादी के बारे में बात करते हैं ।और सुरुचि के बीमारी के बारे में भी बताते हैं।और डाक्टर अजय शादी के लिए भी तैयार हो जाते हैं ।


डाक्टर चन्द्रहास- तक्षराज को फोन कर दो बधाई देते हैं एक सुरुचि के शादी की दूसरी सुरुचि के कालेज टाॅप करने की ।तक्षराज बड़े खुश होते हैं और शादी की तैयारियों में लग जाते हैं ।


डाक्टर अजय और डाक्टर सुरुचि की शादी हो जाती है

डाक्टर अजय सुरुचि के साथ हमेशा साये की तरह होते हैं ।अगर सुरुचि साॅपिंग माॅल से कपड़े या कोई चीज चुराती थी डाक्टर अजय चुपके से चोरी के सामान के पैसे भी दे देते थे ।इसलिए कभी सुरुचि को कोई दिक्कत महसूस नही हुआ। और सुरुचि को लगता था की डाक्टर अजय को कुछ नही पता । लेकिन अजय को सब पता होता है । 

 

एक दिन सुरुचि ने अजय से कहा - अजय मुझे भी एम डी करना है ।मैं आगे पढना चाहती हूँ ।


अजय ने कहा -ठीक है 

डाक्टर अजय सुरुचि का प्रवेश परीक्षा फार्म भर देते हैं । सुरुचि प्रवेश परीक्षा में अच्छे अंक लाती है। और सुरुचि का एडमिशन शहर के एक बड़े कालेज में होता है ।


डाक्टर अजय सुरुचि को हास्टल छोडने आते हैं और सुरुचि से कहतें हैं -सुरुचि आपका बाहर जाने का या साॅपिंग करने का मन होगा तो मुझे फोन करना और कोई दिक्कत होगी तब भी मुझे फोन करना और पढाई पे ज्यादा ध्यान देना ।


सुरुचि को हास्टल में छोडने डाक्टर अजय सुरुचि के कालेज के प्रिंसिपल से मिलते हैं और सुरुचि के बीमारी के बारे में बताते हैं । प्रिंसिपल डाक्टर अजय के गुरु थे इसलिए प्रिंसिपल ने पूरा सहयोग करने का वादा किया ।


सुरुचि हास्टल में रह कर पढाई कर रही थी । अपने आदतों के कारण छोटी मोटी चोरी कर लेती थी । सुरुचि की आदत थी चोरी तो कर लेती थी लेकिन बाद में वो उस सामान को आस पास कहीं फेंक दिया करती थी । 


उस हास्टल में कामिनी नाम की एक लडकी रहती थी सुरुचि की सीनियर थी और कुछ दिनों बाद कामिनी को सुरुचि का रूम पार्टनर बना दिया जाता है कामिनी पढने में अच्छी थी लेकिन कामिनी की कुछ गंदी आदतें थी।अब सुरुचि रोज कामिनी को देखती की वो लड़को से बात करती है विडियो चैट करके लडको को अपने जाल में फंसाती है और अपने कुछ न्यूड फोटो को लडकों में शेयर कर उनका विश्वास जीतती थी ।और जब लडके उसके जाल में फंस जाते तो उनसे हेल्प के नाम पर रूपये लेती थी। ये सब देखते-देखते सुरुचि का मन भी बिगडने लगा । 


सुरुचि कई लडकों से पहले से ही सोशल मीडिया के माध्यम से जुड़ी थी ।सभी से बात नही होती लेकिन कुछ दोस्त उसको मैसेज करते रहते थे । सुरुचि को जब टाइम मिलता तो मैसेज का जवाब देती थी और ज्यादा फोटो खुद शेयर करती रहती थी ।सुरुचि एक दिन फेसबुक इन्सटाग्राम देख रही थी तभी कामिनी के बात करने का अंदाज सुरुचि को याद आ जाता है ।


अब सुरुचि एक्साइटेड होने लगी और सुरुचि ने भी अपना न्यूड फोटो कुछ फेसबुक इन्सटाग्राम के दोस्तों के मैसेज बॉक्स पर सेन्ड करने लगी पर सभी लडको में एक श्री नाम का लडका स्पेशल था । सुरुचि जब भी न्यूड फोटो भेजती और श्री से पूछती आपको कैसा लगा?


श्री एक्साइटेड होकर बोलता-बहुत अच्छी इससे पहले मैंने कभी किसी दोस्त से इस तरह बात नही की है । श्री के लिए ये सब कुछ नया और एक दम अलग था।


सुरुचि फोटो भेजती और जब श्री फोटो देख लेता था।उसके बाद सुरुचि तुरन्त फोटो डिलीट कर देती थी ।अब श्री को सुरुचि से प्यार होने लगा था इसलिए श्री सुरुचि के भेजे गए फोटो का स्क्रीन साॅट ले लेता था।क्योंकि श्री भेजे गए फोटो को अपने पास सुरक्षित रखना चाहता था।लेकिन सुरुचि का मोबाइल एडवांस तकनीकों से लैस था जैसे ही श्री फोटो का स्क्रीन साॅट लेता सुरुचि को पता चल जाता ।

 

एक दिन सुरुचि श्री से पूछती है- क्या तुम मेरे भेजे गये फोटो का स्क्रीन साॅट लेते हो।


श्री सुरुचि से झूठ बोलता है - नही मै स्क्रीन साॅट नही लेता

।श्री ऐसा इसलिए बोलता है क्योंकि श्री को सुरुचि की आदत बन गई थी इसलिए सुरुचि से दोस्ती न टूट जाए और सुरुचि नाराज होकर बात न करे इसलिए श्री सुरुचि से कहता है की मैं सच कह रहा हूँ मेरा विश्वास करो मैंने कोई स्क्रीन साॅट नही लिया है ।

  

श्री को कहाँ पता था कि सुरुचि के पास एडवांस तकनीकी वाला मोबाइल है ।झूठ बोलने से काम नही चलना था ।

 

दूसरे दिन सुरुचि नाराज होकर बोलती है -सच बताओ तुम मेरी फोटो का स्क्रीन साॅट लेते हो की नही अगर लिए हो तो डीलीट कर दो ।


श्री का जवाब- नही सुरुचि तुम मुझ पर विश्वास कर सकती हो ।


सुरुचि- तुम झूठ बोल रहे हो जाओ मैं तुम से बात नही करती ये कह कर सुरुचि सारे मैसेज डीलीट कर देती है । 


श्री कई बार सुरुचि के इन्सटाग्राम अकाउंट पर मैसेज लिख कर भेजता है की मुझे माफ कर दो सुरुचि मुझसे गलती हो गयी अब मैं ऐसा कभी नही करूंगा ।तुम से झूठ भी नही बोलूंगा ।


श्री के बहुत मनाने के बाद सुरुचि मान जाती है ।और फिर सुरुचि श्री को एक्साइटेड करने वाली बातें करती है ।लेकिन जब श्री मैसेज करता तो सुरुचि का सन्देश कुछ देर बाद मिलता ।लगभग एक सप्ताह बात होती है एक दिन श्री के इन्सटाग्राम अकाउंट पर सुरुचि का मैसेज आता है ।मुझे आपकी हेल्प चाहिए ।


श्री वापस मैसेज भेजते हैं - बोलिय क्या मदत चाहिए ।


सुरुचि मैसेज पर- मुझे कुछ रूपये चाहिए इस समय मेरे पापा की सैलेरी नही मिली है इसलिए आपसे बोल रही हूँ मैं आपको फिर वापस कर दूंगी ।


श्री ने पूछा -कितना भेज दूँ?


सुरुचि- लगभग पांच हजार भेज दीजिए ।


श्री ने जवाब मे लिखा- अभी तो मेरे बैंक अकाउंट में बहुत कम रूपये है क्योंकि हाल ही में मेरे बड़े भाई का आपरेशन हुआ है ।इसलिए तीन हजार भेज देता हूँ ।


श्री की एक आदत थी जब भी कोई उससे कुछ मांगता वो लोगों को आजमाने के लिए शुरू में आधा अधूरा ही मदत करता था। ताकि लोग उसके प्रति अपने विचारों को रखे। श्री खुद लोगों के साथ धोखेबाजी करना पसंद करता था ।लेकिन किसी के द्वारा खुद पर धोखेबाजी कभी पसंद नही करता था। 


सुरुचि लिखती है-ओह अच्छा जो है भेजो ।


श्री ने मोबाइल बैंकिंग अकाउंट की मदत से तीन हजार सुरुचि के बैंक अकाउंट में भेज देता है ।


अब सुरुचि पैसा पाकर खुश हो जाती है और श्री को मैसेज भेजती है ।आपको बुरा तो नही लगा ?आप पैसा देकर खुश तो हैं न ?


श्री ने जवाब दिया-नही बिलकुल नही मैंने सही किया है और ये मेरा फर्ज बनता है कि कोई दोस्त परेशान हो तो उसकी मदत कर दि जाये ।


अब सुरुचि उधर से ok लिख कर हँसता हुआ इमोजी भेजती है।


अगले दिन श्री सुरुचि के पास गुड माॅरनिंग का मैसेज भेजता है शाम तक सुरुचि का कोई जवाब नही आया । लेकिन सुरुचि आॅनलाइन थी जो की श्री के मोबाइल स्क्रीन पर दिख रहा था । फिर श्री ने मैसेज किया ।आप बात क्यों नहीं कर रही हो ।


शाम को सुरुचि का मैसेज आता है -जवाब में लिखा था मैं थोड़ा कुछ काम से ब्यस्त हो गयी थी ।


अब श्री अगले दिन फिर गुड माॅरनिंग का मैसेज करता है ।लेकिन कोई जवाब नही ।श्री को समझ में आ गया की वो लडकी केवल पैसे के चक्कर में हम से बात कर रही थी । 


फिर श्री ने मैसेज किया मुझे उम्मीद नही थी की आप ऐसा करोगी क्योंकि आप एक डाक्टर हो और अच्छे परिवार से हो फिर आप ऐसा क्यों करती हो ।हमे लगता है तुम क्लेप्टोमानिया से ग्रस्त हो ।इसलिए तुम ऐसा करने के लिए मजबूर हो।और अच्छा हुआ मैं तुम जैसी लडकियों पर एक शोध कर एक किताब लिख रहा हूँ ।


सुरुचि अगले दिन मैसेज करती है ।तुम मुझे गलत समझ रहे हो ।कहो तो तुम्हारा पैसा वापस कर दूँ ।


श्री भी मजाक में कहतें हैं -अच्छा ये सब करने के बाद तुम लडकियां पैसे वापस भी कर देते हो क्या ?


अगले दिन सुरुचि श्री के खाते में पूरे रूपये वापस करके मैसेज करती है - बन्द करो मेरे उपर शोध करना और दोबारा मुझे मैसेज नही करना । बड़े आये शोध करने वाले ।


श्री ने जवाब दिया- ठीक है मै मैसेज नही करूंगा मुझे भी तुममे कोई इंट्रेस्ट नही है ।


लेकिन श्री को सुरुचि से प्यार हो गया था । श्री सुरुचि को भूल नही पा रहा था। लेकिन सुरुचि ने श्री को ब्लाॅक कर दिया था । 


श्री साइकोलाजिकल साइंस पर रिसर्च कर रहे थे इस लिए श्री को पहले ही लग रहा था जब पहली बार सुरुचि ने श्री को न्यूड फोटो भेजा था । क्योंकि श्री से सुरुचि की कोई गहरी दोस्ती भी नही थी इससे पहले कोई बात भी नही हुआ था। इसलिए सुरुचि का अचानक न्यूड फोटो भेजने वाली घटना श्री को सुरुचि के उपर शोध करने पर मजबूर कर दिया । 


फिर श्री- सुरुचि के बारे में पता करने के लिए अमेरिका से ग्वालियर आते है । जहाँ उनके भाई इंस्पेक्टर राम की पोस्टिंग होती है ।

 

श्री और राम दोनों बहुत ही खुले विचार के थे और दोनों जुडवा भाई थे।दोनों लोग एक दूसरे को अपनी बातें शेयर करते थे ।


राम ने श्री से उसके ग्वालियर आने का कारण पूछा तो श्री ने पूरी बात बता दी ।


श्री ने राम से कहा- भईया मैं सुरुचि के बारे मे सोशल मीडिया पर काफी कुछ पता किया इस लडकी का बैकग्राउंड बहुत मजबूत है शहर के जाने माने बिजनेस मैन की बेटी है। एम बी बी एस मे गोल्ड मेडलिस्ट है फिर इस तरह की हरकत ।भाई क्या आप मेरी कुछ मदत कर सकते हो ।क्योंकि मै जिस पर शोध कर रहा हूँ वो कोई मामूली लडकी नही है । वो इस राज्य के जाने माने बिजनेस मैन की बेटी है ।


राम ने कहा- मैं सुरुचि के बारे में काफी कुछ जानता हूँ आपका शक एक दम सही है ।सुरुचि क्लेप्टोमानिया रोग से ग्रसित है । लेकिन मैंने सुरुचि के पिता से वादा किया है कि मैं सुरुचि के बारे में किसी को कुछ नही बताऊंगा । लेकिन तुम वादा करो तुम जो भी किताब लिखोगे वो सुरुचि के नाम से नही कोई परिवर्तित नाम होगा । 


श्री ने वैसे ही किया सुरुचि के परिवर्तित नाम से शोध किताब लिखना शुरू किया और इंस्पेक्टर राम को सुरुचि के बारे में जितना पता था राम ने सब बता दिया ।


लेकिन श्री को चैन नही था श्री को सुरुचि के बारे में और जानकारी चाहिए थी । जिसके लिए श्री सुरुचि का पीछा करने लगा । 


एक दिन श्री सुरुचि का हास्टल के बाहर इन्तजार कर रहे थे। कुछ देर बाद सुरुचि बाहर आती है और एक सफेद रंग की कार के पास रूक जाती है ।अब उस गाड़ी से एक लडका निकलता है और दोनों आपस में गले मिलते हैं । लेकिन श्री उस चेहरे को देख नही पा रहा था ।


फिर दोनों कार में बैठ कर निकल जाते हैं । श्री दोनों का पीछा करते हैं । दोनों एक शापिंग माॅल में पहुँचते हैं ।उनके पीछे श्री भी पहुंच जाते हैं ।जैसे ही कार का दरवाजा खोलकर लडका बाहर निकलता है ।श्री उस लडके का चेहरा देखकर चौंक जाते हैं।


और कुछ देर बाद मुस्कुराते हैं ।क्योंकि वो लडका श्री का दोस्त डाक्टर अजय था जिसकी शादी में श्री ब्यस्त होने की वजह से नही पहुँच पाये थे ।


अब तो श्री का काम आसान हो गया था । श्री भी साॅपिंग माॅल में घुस जाते हैं ।और डाक्टर अजय की नजर श्री पर पडती है ।


अजय बोलते हैं-श्री तुम यहाँ कैसे ?


श्री का जवाब- बस ऐसे अपने भाई इंस्पेक्टर राम से मिलने आया था ।मेरे भाई राम की पोस्टिंग भी यही हुआ है ।


तब तक सुरुचि भी वहाँ पहुंच जाती है ।और श्री को देख कर बोलती है- अरे इंस्पेक्टर राम आप यहाँ कैसे ।तभी डाक्टर अजय बोलते हैं -श्री ये मेरी धर्मपत्नी डाक्टर सुरुचि हैं और सुरुचि ये इंस्पेक्टर राम नहीं हैं ये डाक्टर श्री है जो इंस्पेक्टर राम के जुडवा भाई है दोनों लोग की शक्ल एक जैसी है ।वैसे श्री एक साइकोलाजिस्ट है और इस समय बीमारीयों पर शोध कर रहे हैं । 


श्री ने सुरुचि से पूछा - सुरुचि आप इंस्पेक्टर राम को कैसे जानती हो? 


सुरुचि - हम दोनों इन्दौर में मिले थे । 


डाक्टर अजय सारी बातें जानते थे।तभी बीच में दोनों की बात को काटते हुए बोलते हैं- अरे यार हम दोनों इतने दिनों के बाद मिलें हैं और आप लोग तो फालतू की बातें करने लगे । चलो सबसे पहले हम लोग काॅफी पीते हैं


सुरुचि भी श्री को नही पहचान पा रही थी क्योंकि श्री अपने सभी सोशल अकाउंट पर फोटो नही लगाते थे और अकाउंट का नाम कहानियों का मुसाफिर के नाम से चलाते थे।और अपनी प्रोफाइल मेनटेन नही करते थे ।


तीनों लोग काॅफी पीते हैं ।थोड़ा हसी मजाक होता है ।और अजय भी श्री से कहते हैं- श्री मुझे तुमसे शिकायत है की तुम मेरी शादी में क्यों नहीं आये ?


श्री ने जवाब दिया-भाई मुझे माफ कर दो मुझे बहुत जरूरी काम से अमेरिका जाना पडा लेकिन अभी मैं कुछ दिनों तक यहाँ रहूंगा । क्या कल तुम मेरे साथ घूमने चलोगे 


डाक्टर अजय ने कहा -श्री मुझे कल टाइम तो नही है पर मैं तुम्हारे लिए टाइम निकालता हूँ । और शाम को मिलते हैं साथ में डिनर भी होगा 


तभी सुरुचि ने कहा-आप दोनों लोग कल मिलो। मुझे तो फाइनल सेमेस्टर की तैयारी करनी है इसलिए मैं नही आ पाऊंगी ।


श्री ने कहा- ठीक है भाभी जी आप से मै बाद में मिलता हूँ ।


अगले दिन श्री अजय को उनके हास्पीटल से रिसीव करते हैं और घूमने निकल पडते हैं ।


बातों बातों में डाक्टर अजय पूछते हैं -श्री आप किस टाॅपिक पर शोध कर रहे हो ?


श्री ने कहा-भाई मैं क्लेप्टोमानिया पर शोध कर रहा हूँ ये एक अनसुलझी बीमारी है आधुनिकता के समय में इसका स्वरूप बदल रहा है ।इस बीमारी को एडिक्टिव डिसॉर्डर और ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसॉर्डर की श्रेणी में रखते हैं। मैंने शोध किया है की ब्रेन में सेरोटिन नामक केमिकल के स्तर में बदलाव होने पर इस बीमारी के लक्षण पैदा होते हैं। 


अजय पूंछते हैं- श्री क्या इस बीमारी को कभी खत्म किया जा सकता है ।


श्री ने जवाब दिया - अजय ये ऐसी बीमारी है जो लोगों में उम्र बढने के साथ खत्म हो सकती है या फिर ये कभी नही खत्म होती है ।आप तो जानते हैं हम लोगों ने पढा भी है ये बीमारी अधिकतर महिलाओं में पाया जाता है ।


अजय ने कहा - पढा तो है भाई मगर इस बीमारी के बारे में आपसे बेहतर कोई नही जानता होगा क्योंकि आपने तो इस बीमारी पर काफी शोध किया है । 


तभी बातों-बातों में अजय डाक्टर श्री से एक बात कहते हैं-श्री क्या तुम मेरी मदत कर सकते हो?


श्री मुस्कुराते हुए -क्या बात कर रहे हो अजय मैं तुम्हारे लिए जान भी दे सकता हूँ ।


अजय ने कहा -लेकिन वादा करो इस बात को राज ही रखोगे ।


श्री ने पूछा - अजय ऐसी कौन सी बात है जिसके लिए तुम परेशान हो ?


अजय ने जवाब दिया -श्री आप जिस बीमारी पर शोध कर रहे हो ।उस बीमारी के साथ मैं जी रहा हूँ । मेरे भाई सुरुचि को भी यही बीमारी है ।

 

श्री ने चौंक कर कहा -क्या बकवास कर रहे हो ?


लेकिन श्री तो सब जानते थे। केवल अपनी किताब और शोध को पूरा करने के लिए अजय का साथ देना उनके लिए जरूरी था


अजय ने कहा - मैं सही कह रहा हूँ । मैं बहुत परेशान हूँ अब तुम ही मेरी मदत कर सकते हो ।


श्री- भाई ऐसी बात है तो मैं आपकी मदत के लिए तैयार हूँ ।लेकिन आपको मुझे पूरी बात बतानी पडेगी ।


डाक्टर अजय भी डाक्टर श्री से शुरू से वर्तमान समय तक की पूरी कहानी बता देते हैं ।


श्री ने कहा- अभी सुरुचि का एम डी का फाइनल सेमेस्टर खत्म हो जाये तो आप सुरुचि को साथ लेकर अमेरिका चले आओ मैं सुरुचि का इलाज करूंगा ।


अब डिनर का समय हो गया दोनों एक फाइव स्टार होटल में डिनर करते हैं ।अब श्री डाक्टर अजय को उनके घर छोड़कर कर गुड नाइट बोल कर अपने भाई राम के आवास पर चले जाते हैं ।अब डाक्टर श्री अगली सुबह की फ्लाइट से अमेरिका चले जाते हैं । 


कुछ महीनों बाद श्री के मोबाइल पर डाक्टर अजय का फोन आता है - श्री कल का लंच तैयार रखो हम और सुरुचि अमेरिका आ रहे हैं ।


डाक्टर श्री खुश होकर जवाब दिया - अजय आपका स्वागत है मैं खुद आप लोगों को रिसीव करने आऊंगा 


और इधर श्री के द्वारा लिखी गयी किताब पब्लिकेशन हाउस में छप कर तैयार हो गयी थी ।अगले दिन श्री इस किताब को प्रकाशित करने वाले थे ।और उस किताब के कई सैम्पल डाक्टर श्री के घर पर पहुंच चुके थे ।


अगले दिन डाक्टर अजय और सुरुचि न्यूयॉर्क एयरपोर्ट पर उतरते हैं ।बाहर खुद डाक्टर श्री इन्तजार कर रहे थे ।


डाक्टर सुरुचि और अजय बाहर गेट पर पहुंचते हैं और सामने श्री हाथ हिला कर अभिनन्दन कर रहे होते हैं । और पास पहुंचते ही अजय और श्री गले लग जाते हैं ।और सुरुचि को श्री भारतीय अन्दाज़ मे हाथ जोड़कर कर नमस्कार करते हैं । 

सुरुचि भी मुस्कुराते हुऐ हाथ जोड़कर श्री के सम्मान का स्वागत करती हैं।


अब डाक्टर श्री कार चलाते हैं और डाक्टर अजय श्री के बगल वाली सीट पर और सुरुचि पीछे वाली सीट पर बैठी थी । सुरुचि की नजर अन्दर लगे बैक साइड वाले मिरर पर थी क्योंकि श्री की नजर सुरुचि को चुपके से देख रही थी । और सुरुचि मिरर को देख कर अपने चेहरे को इधर-उधर घुमाने लगती है। 


अजय भी श्री के राजसी ठाट-बाट को देख हक्का-बक्का हो गया था ।क्योंकि जिस गाड़ी से वो सब आगे चल रहे थे उसके पीछे भी तीन गाडियाँ थी एक माॅडल एक कलर की जिसमें डाक्टर श्री के पर्सनल गार्ड थे जिनके हाथों में अत्याधुनिक गन थे । 


डाक्टर अजय मन में सोच रहे थे- श्री डाक्टर है या कोई डाॅन इतने गार्ड इसके पीछे क्यों हैं ?लेकिन अजय की हिम्मत नहीं थी की वो डाक्टर श्री से सवाल कर सकें ।


 डाक्टर श्री अजय और सुरुचि को लेकर एक चकाचौंध आलीशान बंगले पर पहुंचते हैं जो बंगला डाक्टर श्री का था । डाक्टर श्री अपने सभी कर्मचारियों को डाक्टर अजय और सुरुचि के सेवा में लगा कर जाने लगे ।


अजय ने कहा-अरे श्री कहाँ चले भाई ।


श्री ने कहा-आप लोग फ्रेस होकर लंच करके आराम करो  शाम तक मै आता हूँ आज मुझे अपनी कहानी को पब्लिश  करना है । मैं शाम को मिलता हूँ । 


इतना कहकर डाक्टर श्री चले जाते हैं ।इधर अजय सुरुचि स्नान कर कपडे बदल कर लंच करते हैं ।और कमरे में सोने के लिए जाते हैं । 


डाक्टर अजय विस्तर पर पहुंचते ही सो जाते हैं और सुरुचि पडी हुई किताबों में से एक स्टोरी किताब उठाती है उस किताब का नाम क्लेप्टोमानिया ( अनसुलझी बीमारी ) था। 

सुरुचि जैसे जैसे उस किताब को पढती उसमें उसे उसकी कहानी याद आती ।और जब उस पेज पर पहुँचती है जब उसने एक लडके को अपना न्यूड फोटो शेयर किया था । अब सुरुचि घबरा जाती है और मन में सोचने लगती है इस किताब में तो मेरे साथ घटित घटनाएँ है पीछे पलट कर देखा तो डाक्टर श्री उस किताब के लेखक थे अब सुरुचि समझ जाती है और किताब को अपने बैग में छिपा लेती है ताकि डाक्टर अजय इस किताब को न देखें। 



अब सुरुचि को भी नींद आने लगी सुरुचि सो जाती है ।और इधर डाक्टर अजय की नींद पूरी हो जाती है । डाक्टर अजय सुरुचि को जगाते हैं की चलो शहर घूम कर आते हैं । मगर सुरुचि गहरी नींद में थी इसलिए सुरुचि ने अजय से कहा आप जाइये मुझे नींद आ रही है । अजय कर्मचारियों से श्री के दूसरे गाड़ी की चाभी मांग कर घुमने निकल जाते हैं । 


इधर डाक्टर श्री दिये हुए समय से पहले ही घर आ जाते हैं ।और कर्मचारियों से पूछते हैं की अजय कहाँ गये ?


कर्मचारीयों ने कहा डाक्टर अजय साहब घुमने निकले हैं । तभी डाक्टर श्री सुरुचि के पास पहुंचते हैं और सुरुचि के करीब जाकर उसके बालों को उसके चेहरे से हटा रहे थे ।तभी सुरुचि की नींद अचानक खुलती है और सुरुचि चौंक कर बैठ जाती है और कहती मुझसे दूर रहो श्री ।और कौन हो तुम ?मेरे बारे में इतना कुछ कैसे जानते हो। क्या तुम वही हो जिससे मैंने अपनी न्यूड फोटो शेयर की थी और मदत भी मांगा था ।


श्री ने जवाब दिया- वाह सुरुचि वाह आखिर मेरे कहानी में पात्र का नाम बदलने के बाद भी सब कुछ समझ में आ गया ।मैं तो आपके इस अदा का दिवाना हो गया हूँ ।


सुरुचि- आखिर आप चाहते क्या हो ?


 डाक्टर श्री ने कहा- मुझे तुमसे प्यार हो गया है ।मैं तुम्हें पाना चाहता हूँ ।


सुरूचि- मुझे छोड़ दो मैं तुम्हारे दोस्त की पत्नी हूँ मुझे माफ कर दो ।मत करो मेरे साथ ऐसा । 


डाक्टर श्री ने कहा- मुझे तुम्हारा प्यार चाहिए तुमने मुझे अपना दिवाना बना दिया है ।मुझे तु चाहिए चाहे मुझे डाक्टर अजय को रास्ते से हटाना पडे ।  


सुरुचि ने कहा- नही तुम जो चाहोगे मै करने के लिए तैयार हूँ मगर अजय को कुछ मत करना प्लीज ।

 

श्री ने कहा ठीक है - मै तुमसे यही उम्मीद रखता हूँ ।समय आने दो । लेकिन तब तक तुम अपनी जुबान नही खोलोगी । अगर डाक्टर अजय को पता चला तो मैं अजय को खत्म कर दूंगा । 


इधर अजय शहर में घूम रहे थे।तभी एक मैगजीन में डाक्टर श्री की फोटो देखते हैं ।जिसमें श्री का पूरा बायोग्राफी था। उसमें ये भी लिखा था डाक्टर श्री न्यूयॉर्क के जाने माने साइकोलाजिस्ट है और उनकी एक विशेषता थी वह किसी को भी हिप्नोटाइज करने मे मास्टर थे।


अजय शहर घूमकर वापस बंगले पर आते हैं ।बंगले की खिड़की से सुरुचि डाक्टर अजय को देख रही थी और सोच रही थी की जिसने मुझे इतना प्यार दिया मैं उसे धोखा कैसे दे सकती हूँ। अजय को बचाने के लिए मुझे कुछ तरकीब लगाना पडेगा ।


इधर अजय ऊपर आने के बजाय डाक्टर श्री के पास पहुंचते हैं ।और डाक्टर श्री से कहते हैं - डाक्टर श्री आप इतने बड़े हिप्नोटिज्म के जादूगर हो मुझे आपने कभी नही बताया ।


डाक्टर श्री मुस्कुराते हुए कहते हैं - ओह डाक्टर अजय अब जासूसी भी करने लगे ।


डाक्टर अजय- नही यार मै तो घुमने गया था । एक रेस्तराँ में काॅफी पीने गया वहां मुझे एक मैगजीन मिला जिसमें आप की बायोग्राफी थी। 


डाक्टर श्री - ठीक है भाई जब मेरे बारे में आप इतना जान ही गये हैं तो मैं जरूर आपको इस कला से रूबरू कराऊंगा । लेकिन अभी मुझे शहर से बाहर सेमिनार मे जाना है मैं वहां से कल सुबह आफिस पहुंच जाऊंगा।और आप भी सुरुचि के साथ 11बजे तक मेरे आफिस पहुंच जाना । इतना कह कर डाक्टर श्री अपने कार में बैठ कर निकल जाते हैं ।


इधर डाक्टर अजय सुरुचि के पास पहुंचते हैं । सुरुचि डाक्टर अजय को देखते ही अजय से बोलती क्यों अजय तुम मुझे मारना चाहते हो । मुझे खत्म करना चाहते हो। 


डाक्टर अजय- सुरुचि तुम क्या बोल रही हो मुझे कुछ समझ में नही आ रहा है ।


सुरुचि- अजय तुम नाटक कर रहे हो तुम मुझे मारना चाहते हो ।मैं सब जानती हूँ । 


तभी सुरुचि डाक्टर अजय का काॅलर पकड़ कर तेज आवाज में कहती है अजय मुझे मार दो मुझे मार दो


तभी अजय सुरुचि को थप्पड़ मारते हुए कहते हैं- होश में आओ सुरुचि क्या कह रही हो तो तुम । सुरुचि शान्त हो जाती है ।और वहाँ से बाहर निकलती है और एक टैक्सी पकड़ कर शहर की तरफ निकल जाती है ।उसका पीछा करते हुए डाक्टर अजय भी निकल जाते हैं । 


दस किलोमीटर आगे जाकर एक सुनसान जगह पर सुरुचि टैक्सी रोकने को बोलती है और सुरुचि टैक्सी से नीचे उतर कर चलने लगती है ।और पीछे अजय भी टैक्सी से नीचे उतर कर सुरुचि के पीछे चलते हुए बोलते हैं -मुझे माफ कर दो सुरुचि ।


सुरुचि रोते हुए बिना पीछे मुडे जवाब देती है -अजय मैं आप से नाराज नही हूँ ।अजय आप पीछे मुडकर नही देखना केवल मुझे मनाने का नाटक करते चलते रहो ।क्योंकि हम लोग डाक्टर श्री की जाल में फंस चुके हैं आप पीछे मत देखना। देखना है तो जो समाने गाड़ी खडी है उसके साइड मिरर में देख लो ।


अजय ने देखा और कहा-हाँ सुरुचि आप सही कह रही हो ।ये गाड़ी तो डाक्टर श्री की है ।क्या डाक्टर श्री हम लोगों के साथ कोई गेम खेल रहा है ?


सुरुचि ने कहा- हाँ अजय , डाक्टर श्री हमारे साथ गेम खेल रहा है वो भी मेरी मजबूरी का फायदा उठा कर ।इसमें मेरी गलती है अजय आज मेरी वजह से आप भी फंस गए ।


अजय ने कहा- सुरुचि आप क्या कहना चाहती हो मुझे समझ में नही आ रहा है ।


सुरुचि ने कहा-अजय अभी आप मुझसे मेरा हैन्ड बैग छिनना इस बैग में एक किताब है और इसमें एक पत्र है उसे पढ लेना । और इन लोगों को दिखाने के लिये मुझे एक थप्पड़ और मारना ।तब मैं यहाँ से चली जाऊंगी ।मेरे जाते ही ये लोग आपका पीछा करना बन्द कर देंगे । और हाँ इसके बाद हम लोग बंगले में कोई बात नही करेंगे क्योंकि वहां हर जगह पर सीक्रेट कैमरे लगे हैं जिससे डाक्टर श्री हम दोनों की हर हरकत पर नजर रखता है ।


डाक्टर अजय ने वही किया जो सुरुचि ने कहा ।अजय हैन्ड बैग छीनते हुए सुरुचि को जोर से थप्पड़ मारते हैं सुरुचि रोते हुए एक टैक्सी में बैठ कर निकल जाती है ।डाक्टर अजय वही कुछ देर तक घुटनों के बल बैठ जाते हैं ।कुछ देर बाद पीछे मुडकर देखते हैं ।पीछा करने वालों की गाड़ी भी गायब थी ।


अब अजय एक गार्डन में जाकर सुरुचि के बैग से किताब निकालते हैं उसमें एक पत्र था जिसे डाक्टर अजय सबसे पहले पढते हैं उसमें लिखा था ।


डियर अजय मेरी वजह से मेरी बीमारी की वजह से लोग मेरे मजबूरी का फायदा उठाते हैं ।लेकिन अब मैं चाहती हूँ लोग मेरे बीमारी के बारे में जाने ।अजय ये जो किताब आपके हाथ में है इसमें मेरी कहानी है डाक्टर श्री ने इस कहानी को मेरे उपर लिखा है । इस किताब से श्री को शोहरत इज्जत तो मिल रही है पर आज वो मुझे पाना चाहता है ।वो तुम्हें मुझसे अलग करना चाहता है ।डाक्टर श्री ने कहा है अगर मैं उसकी बात नही मानूंगी तो वो आपको जान से मार देगा।अजय मै अब आपको खोना नही चाहती । आगे क्या करना है आप मुझे खाने की थाली के पीछे लिख कर देना 


अजय पत्र पढने के बाद उस किताब को पढते हैं ।और अजय को पूरी कहानी समझ में आ जाती है । डाक्टर अजय ने सोच लिया कि कब तक भागेंगे कब तक अपनी कमियों को छिपायेंगे ।क्योंकि सुरुचि को ऐसी बीमारी है जिसका इलाज मैं नही कर पा रहा हूँ । सुरुचि भी एक डाक्टर होकर भी अपने आपको नही रोक पा रही है । इसलिए अब मुझे लडना पड़ेगा ।


अब डाक्टर अजय उस दिन वापस बंगले पर नही जाते ब्लकि एक होटल में रूकते हैं और अपने ससुर तक्षराज से फोन पर श्री के बारे में पूरी बात बताते हैं ।और ये भी बताते हैं की अगर डाक्टर श्री को पता चला तो वो मुझे जान से मार देगा और सुरुचि को हमेशा के लिए यहीं कैद में रखेगा ।


तक्षराज कहते हैं-अजय बेटा तुम टेन्शन मत लो मैं और डाक्टर चन्द्रहास आज की फ्लाइट से आ रहे हैं । 


उसी रात तक्षराज और डाक्टर चन्द्रहास न्यूयॉर्क पहुंच जाते हैं ।और रात में डाक्टर अजय दोनों लोगों को रिसीव करने एयरपोर्ट पहुंचते हैं।और वापस टैक्सी कर होटल में आ रहे थे तभी एक ट्रैफिक सिग्नल पर उन्हें रूकना पडा ।


इधर डाक्टर श्री अपने गुन्डो को डाक्टर अजय को ढूंढने के लिए भेज देता है । डाक्टर श्री के गुर्गे अजय को ढूढते हुए उसी ट्रैफिक सिग्नल पर पहुंचते हैं जहाँ डाक्टर अजय टैक्सी में मौजूद थे ।तभी डाक्टर श्री के एक गुर्गे की नजर उन पर पडती है ।वे लोग डाक्टर अजय का पीछा करने के लिए तैयार हो जाते हैं ।

तभी सिग्नल खुलता है डाक्टर अजय टैक्सी से अपने होटल की तरफ बढे और उनके पीछे डाक्टर श्री के गुर्गे ।


कुछ दूर चलकर अजय की नजर टैक्सी के साइड मिरर में पडती है अजय उस गाड़ी को तुरंत पहचान जाते हैं ।अजय उस गाड़ी के बारे में तक्षराज को बताते हैं । तक्षराज एक प्लान बनाते हैं ।अब तक्षराज टैक्सी को थोड़ा तेज चलने के लिए बोलते हैं। टैक्सी का ड्राइवर गाड़ी की रफ्तार बढा देता है ।कुछ दूर पर जा कर तक्षराज टैक्सी को एक गली में मोड़ने के लिए बोलते हैं । जैसे ही टैक्सी मुडती हैं तक्षराज गाड़ी को तुरंत रोकने के लिए बोलते हैं ।जैसे ही गाड़ी रूकती है डाक्टर अजय एक वी आई पी सूटकेस लेकर नीचे उतर कर भीड़ में अपने आपको छिपा लेते हैं ।


तक्षराज टैक्सी ड्राइवर को तुरंत गाड़ी जल्द से जल्द होटल तक पहुँचाने के बात करते हैं । और डाक्टर श्री के गुर्गे भी टैक्सी के पीछे निकल जाते हैं ।


इधर भीड़ से निकलकर डाक्टर अजय टैक्सी पकड़ कर उन गुन्डो के पीछे हो जाते हैं ।


अब टैक्सी होटल पर पहुंचती है ।उसके पीछे डाक्टर श्री के गुर्गे और उनके पीछे डाक्टर अजय की टैक्सी। 


आगे की टैक्सी से जब दो बूढे जेंटलमैन उतरते हैं ।और टैक्सी वाला टैक्सी मोडकर वापस निकलने लगता है तो डाक्टर श्री के गुर्गे देखते हैं कि टैक्सी में ड्राइवर के अलावा कोई नही । 


सभी गुर्गे आपस में बात करते हैं की आखिर डाक्टर अजय गया कहाँ ?


तभी पीछे से एक वी आई पी सूटकेस में एक आदमी आवाज देता है -शायद तुम लोग मुझे ढूंढ रहे हो ।


तभी डाक्टर श्री के गुर्गे अजय के उपर गन तान देते हैं ।


डाक्टर अजय ने कूल माइंड में कहा-रिलैक्स भाई आज मैं तुम लोगों के फायदे की बात करने आया हूँ ।इतना कहकर डाक्टर अजय सूटकेस खोलता है ।


सूटकेस के अन्दर पैसा देखकर डाक्टर श्री के गुर्गों की आँखे चमकने लगी ।


डाक्टर अजय ने कहा- ये पैसे केवल मुझे ज्वाइन करने के लिए है । मैं तुम सभी लोगों को डाक्टर श्री के द्वारा दी जाने वाली सैलेरी का डबल दूंगा । 


डाक्टर श्री के सभी गुन्डे डाक्टर अजय की मदत के लिए तैयार हो जाते हैं सिर्फ एक को छोड़कर ।उसने कहा कि मैं डाक्टर श्री का साथ नही छोड़ सकता ।


डाक्टर अजय ने उन लोगों से कहा-अब बताओ इस एक की वजह से मैं तुम लोगों पर कैसे विश्वास कर लूं ।


तभी विरोध करने वाले ब्यक्ति को पीछे से एक आदमी गोली मारता है । विरोध करने वाला आदमी सामने से गिरता है और पीछे वाले की शक्ल दिखती है । वह पीछे वाला ब्यक्ति मुस्कुराते हुए कहता है ।सर आपको मुझ पर विश्वास हो या न हो मुझे आप पर विश्वास है । 


डाक्टर अजय ने कहा-गुड जाॅब मुझे तुम लोग पर विश्वास हो गया ।


अब डाक्टर अजय ने उन सब को प्लान के मुताबिक डाक्टर श्री के घर पर भेज दिया ।और खुद होटल में चला गया ।वहां पर तक्षराज ,अजय और डाक्टर चन्द्रहास पूरा प्लान बनाते हैं ।


प्लान के मुताबिक डाक्टर अजय, डाक्टर श्री के बंगले पर पहुंचते हैं ।जहाँ डाक्टर श्री पहले ही मौजूद थे ।


डाक्टर श्री ,अजय को देखकर कहते हैं क्या हुआ अजय क्या झगड़ा चल रहा है तुम्हारे और सुरुचि के बीच। मेरे लोग बोल रहे थे की तुम दोनों के बीच लडाई हुई है । 


डाक्टर अजय बिना कुछ बोले डाक्टर श्री की बातों को नजर अंदाज करते हुए कमरे में चले जाते हैं ।और अपना और सुरुचि का सामान पैक करने लगे ।


डाक्टर श्री अजय के पास आकर कहतें हैं - क्या बात है अजय आज तुम मेरी बातों को नजर अंदाज करके बिना मेरी बातों का जवाब दिये अन्दर आ गए । 


डाक्टर अजय ने जवाब दिया - डाक्टर श्री अब मैं सब जानता हूँ की तुम मेरे और सुरुचि के साथ धोखा कर रहे हो ।


डाक्टर श्री लम्बी सांस लेते हुए कहते हैं - ओह तो ये बात है तुम्हे सब पता चल गया तो फिर तुम वापस कैसे जा सकते हो । अब तो तुम्हें मरना पडेगा । 


अब डाक्टर श्री पीछे से गन निकाल कर डाक्टर अजय के उपर तान कर ट्रिगर चढाते हुए कहता है ।गुडबाय डाक्टर अजय 


तभी अचानक सुरुचि डन्डे से डाक्टर श्री को पीछे से मारती है ।अब डाक्टर श्री के हाथ से गन छूट जाता है तभी डाक्टर श्री अपने आपको बचाते हुए सुरुचि के वार को रोककर सुरुचि के बालों को पकड़ कर दिवार में लडा देता है ।तभी डाक्टर अजय, डाक्टर श्री को पीछे से रोकता है और दोनों के बीच जबर्दस्त फाइट होता है ।


 तभी अचानक सुरुचि श्री के गिरे हुए गन को उठा कर डाक्टर श्री के उपर तान कर चिल्लाते हुए कहती है रूक जाओ श्री नही तो मैं गोली मार दूंगी । 


अब डाक्टर श्री अपनी जगह पर हाथ उपर कर पीछे घूमकर कर सुरुचि की तरफ देखकर कहता -सुरुचि तुम ऐसा नही कर सकती । और अपनी निगाहें सुरुचि के उपर केन्द्रित कर देता है ।


सुरुचि को डाक्टर श्री की निगाहें देखकर कर अजीब सा महसूस हो रहा था ।डाक्टर श्री ,सुरुचि को हिप्नोटाइज करने लगा था ।


डाक्टर श्री सुरुचि के तरफ निगाहें केन्द्रित कर सुरुचि से कहता है - सुरुचि क्या तुम्हें कोई चाहता हो तो क्या तुम उसे मार दोगी ? क्या तुम्हें जरा भी अफसोस नही होगा ?एक अच्छी लडकी ऐसा कैसे कर सकती है । 


सुरुचि के हाथ काँपने लगे सुरुचि पूरी तरह से हिप्नोटाइज हो चुकी थी। और अजय भी सुरुचि का ध्यान बटाने की कोशिश कर रहा था लेकिन कामयाब नहीं हो पा रहा था ।


और डाक्टर श्री बोलते ही जा रहा था- सुरुचि तुम मुझे ये गन दे दो । सुरुचि लाओ गन मुझे दे दो । 


तभी अचानक पीछे से कोई डाक्टर श्री के गर्दन पर बेहोश होने का इन्जेक्शन मारता है ।जिसका असर तत्काल होने लगा लेकिन नीचे गिरने से पहले पीछे मुडकर देखता है उसके पुराने गुरु डाक्टर चन्द्रहास ने ये वार किया था और उनके पीछे स्वयं उसके पर्सनल गार्ड खड़े थे। इतना देखकर डाक्टर श्री बेहोस हो जाता है ।


और जब डाक्टर श्री को होश आता है तो देखता है सामने तक्षराज, डाक्टर चन्द्रहास,डाक्टर अजय, डाक्टर सुरुचि और उसके गुर्गे सामने होते हैं जो अब अजय के हाथ बिक चुके थे डाक्टर श्री उठने की कोशिश करता है लेकिन उसके दोनों हाथ बंधे हुए थे। डाक्टर श्री चिल्लाने लगा ।मुझे बचाओ कोई है ।तभी डाक्टर चन्द्रहास कहते हैं- चिल्लाओ मत यहाँ तुम्हारी मदत के लिए कोई नही आयेगा । ये हास्पीटल भी मेरे ही एक परम शिष्य का है ।डाक्टर श्री ने कहा-तुम लोग मेरे साथ क्या करने वाले हो ?


डाक्टर चन्द्रहास ने जवाब दिया- ज्यादा कुछ नही अब हम तुम्हारे शरीर को मार देंगे लेकिन तुम्हारे चेहरे को जिन्दा रखना है ।नही समझे तुम्हारे चेहरे को नया शरीर देंगे ।डाक्टर श्री चिल्लाने लगा- नही मुझे छोड़ दो सर मैं अब कोई गलती नहीं करूंगा ।


डाक्टर चन्द्रहास ने कहा- नही श्री तुम्हारे पास ऐसी ताकत है जो तुम्हे गलती करने पर मजबूर कर देगी । वो है हिप्नोटिज्म जिसकी वजह से तुम लोगों को अपने वश में कर उनकी एक किडनी निकाल कर ही इतना बडा साम्राज्य तैयार किये हो।और उन लोगों को अपने कम्पनी में काम दिया है ।और उन लोगों की तबियत खराब होती है तो तुम्हारे ही डाक्टर उसका इलाज करते हैं । वाह गजब की लंका बनाई है तुमने । अब तुम्हारा आखिरी समय आ गया है ।तभी एक नर्स दो खाली इन्जेक्शन लेकर आती है और डाक्टर चन्द्रहास उस खाली इन्जेक्शन को डाक्टर श्री के हाथ के धड़कने वाली नश में इन्जेक्ट कर देते हैं जिसकी वजह से डाक्टर श्री के ब्लड में एयर बन जाता है जो ह्रदय के मुख्य द्वार पर जा कर रूक जाता है ।और डाक्टर श्री के ह्रदय की गति रूक जाती है । और डाक्टर श्री अपनी लंका छोड़कर  हमेशा के लिये दुनिया को अलविदा कर देता है ।और डाक्टर श्री के चेहरे को डाक्टर विश्वास के एसिड से खराब हो चुके चेहरे पर लगा दिया जाता है ।और डाक्टर विश्वास को मृत घोषित कर दिया जाता है । 


इधर डाक्टर तक्षराज, डाक्टर श्री के द्वारा पब्लिश किताबों के पब्लिकेशन्स को खरीद लेते हैं और उसमें सुरुचि की गलतियों वाली कडी को निकाल कर किताबों को फिर से पब्लिश कर देते हैं।लेकिन इस बार किताब में सुरुचि का वास्तविक नाम रखा जाता है ।इधर डाक्टर विश्वास को डाक्टर श्री के अन्दाज़ में रहने के लिए ट्रेन्ड कर दिया जाता है । अब डाक्टर विश्वास को नया चेहरा नये नाम के साथ नई शोहरत मिलती है । क्लेप्टोमानिया पर कहानी लिखने के लिए डाक्टर श्री के नकली चेहरे को कई पुरस्कार और सम्मान मिलता है । और उधर डाक्टर श्री के भाई इंस्पेक्टर राम ने भी अपनी ब्यस्त जिन्दगी के कुछ पल निकालकर अपने भाई के इतने बड़े सम्मान पर मोबाइल से शुभकामनाएँ देते हैं ।


अब लोग सुरुचि के बीमारी के बारे में जान गये थे । अब लोग सुरुचि के गलतीयों से वाकिफ थे सुरुचि कोई भी चोरी करती लोग उसका बिल बना कर रखते और डाक्टर अजय सबका हिसाब करते ।


                     


           












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