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Ram Binod Kumar 'Sanatan Bharat'

Crime Thriller


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Ram Binod Kumar 'Sanatan Bharat'

Crime Thriller


क़ातिल की घड़ी

क़ातिल की घड़ी

8 mins 336 8 mins 336

सुबह हुई नहीं की, बात जंगल की आग की तरह फैल गई ,कि एक व्यक्ति की हत्या हो गई है। परंतु कुछ पता नहीं चल सका , कि मृतक व्यक्ति कौन है ? कोई पहचान नहीं पा रहा था। शायद कोई अनजान व्यक्ति था।रात्रि में सड़क के किनारे वाले तालाब में जब कुछ लड़के मछली पकड़ने के लिए वहां गए,तो उन्होंने एक लाश देखी थी। फिर वे डरकर घर आ गए थे। इसी तरह बात फैलती गई।

सुबह पुलिस आई। उसने लाश का मुआयना किया, कई फोटोग्राफ्स लिए, फिर जेब एवं अन्य सामानों की तलाशी लेने पर ज्ञात हुआ व्यक्ति का नाम पारस दत्त है। यहां से करीब दस किलोमीटर दूर गांव का रहने वाला है।घटनास्थल पर अच्छी तरह खोजबीन की गई, परंतु वहां व्यक्ति के थैले के सिवाय और कुछ नहीं मिला। थैले में एक गमछा और मिठाईयां थी। ऐसा ज्ञात हुआ जैसे व्यक्ति अपने किसी रिश्तेदार के यहां जा रहा हो।

व्यक्ति का शरीर नीला पड़ गया था। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो उसे से जहर दिया गया हो। पुलिस ने लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया ।व्यक्ति के घर वालों को सूचना दी गई।दूसरे दिन पोस्टमार्टम की रिपोर्ट भी मिल गई, व्यक्ति के शरीर में तीक्ष्ण जहर पाया गया था। शरीर में पीठ और हाथ पैरों में कुछ खरोच के निशान भी मिले थे। परंतु जहर से ही मृत्यु की पुष्टि हुई।

पूछताछ पर घरवालों ने बताया " वे मालेगांव अपनी बहन के घर जा रहे थे।"

"क्या वे इतनी दूर पैदल जा रहे थे?"इंस्पेक्टर राम सिंह ने पूछा।

" नहीं ! वह तो अपनी बाईक लेकर घर से निकले थे।"

"पर घटनास्थल पर तो कोई बाइक नहीं मिली।"

" क्या उनकी किसी से कोई व्यक्तिगत दुश्मनी थी ?"

" नहीं जी ! बेहद शांत और सीधे स्वभाव वाले व्यक्ति थे। भला उनकी किसी से क्या दुश्मनी हो सकती है !"

" क्या नशा करते थे ? कभी शराब या और कुछ वगैरह ?"

"जी नहीं सर ! कुछ भी नहीं , नशा तो उन्होंने कभी जीवन में नहीं किया।"

" फिर आखिर उनके शरीर में इतनी तीक्ष्ण जहर कैसे पाया गया ? संभव है किसी ने उन्हें खाने पीने की चीज में जहरीला पदार्थ दिया हो ।"

इंस्पेक्टर राम सिंह को कुछ पता नहीं चल रहा था। कोई सुराग नहीं मिल पा रहा था। उन्होंने दोबारा घटनास्थल पर निरीक्षण करने का मन बनाया। पूरी टीम लेकर पहुंचे। उनके मन में था घटनास्थल के एक-दो किलोमीटर की परिधि में खोजबीन करेंगे ,संभव है उन्हें कुछ मिल जाए।

पूरी टीम के लोग लग गएं । आसपास के सारे क्षेत्रों को निरीक्षण किया जाने लगा, दोपहर से शाम होने को आ गई, पर कुछ भी हाथ नहीं आया। टीम के लोग निराश हो गए थे ,परंतु राम सिंह ने हिम्मत नहीं हारी।

उन्होंने कहा " कम ऑन दोस्तों ! हमें निराश नहीं होना चाहिए। हम अंतिम बार कोशिश करते हैं, हमें अवश्य ही कुछ न कुछ मिलेगा ।"

सब लोग एक बार फिर जी जान से लग गए। घटनास्थल के पास ही एक गोल्डन डायल की घड़ी मिली। घड़ी के नीचे वाली बॉटम कवर पर रानी लिखा हुआ था। सब में खुशी की लहर दौड़ पड़ी।

राम सिंह ने कहा "शाबाश मित्रों ! मुझे पक्का यकीन है कि इस घड़ी का इस हत्या से अवश्य ही कोई ना कोई संबंध होगा। हम लोग थोड़ा और कोशिश करते हैं शायद हमें कुछ और मिल जाए।"सब लोग एक बार फिर खुशी पूर्वक लग गए। अंधेरा होने को था फिर भी सभी को कुछ ढूंढ लेने का जुनून था, जिससे वे उत्साह पूर्वक लगे थे। इसी बीच एक कांस्टेबल को एक सिरिंज मिली निडल भी लगी हुई थी, थोड़ा कुछ तरल भी उसमें था। सिरिंज भी नई ही थी।हाथ में उठाते ही वह चीख पड़ा " यह देखिए सर यह क्या है !"

पूरी टीम वहां जमा हो गई। अब बिल्कुल अंधेरा होने को था। सब लोग चौकी वापस आ गए। सिरिंज की केमिकल की जांच के लिए उसे फॉरेंसिक लैब भेजा गया।

इंस्पेक्टर राम सिंह दूसरे दिन फिर पारस दत्त के घर गए। वहां उन्होंने घड़ी के बारे में उनके घर वालों से पूछताछ की। पर किसी ने घड़ी को पहचानने से इंकार कर दिया। उनके घर वालों का कहना था पारस कभी घड़ी नहीं पहनते थे।फिर पुलिस ने उसके पेंदी में लिखें 'रानी ' नाम के बारे में पूछा ।इस नाम को सुनने पर पारस के भाई ने बताया" यह तो हमारी भांजी का नाम है।जिसके घर भैया उस दिन जा रहे थे।"परस दत्त के बाईक का भी अभी तक कुछ पता नहीं चला था। नीडल के केमिकल जांच की रिपोर्ट फॉरेंसिक लैब से आ गई। नीडल की केमिकल और पारस के शरीर में मिले तीक्ष्ण जहर दोनों मैं कोई अंतर नहीं था।

इंस्पेक्टर राम सोच में पड़ गए। पारस दत्त नशा तो करते नहीं थे, फिर यह ड्रग्स उनके शरीर में कैसे पहुंची ? अगर वे खुद इसे लेते तो नीडल पास में ही मिलती ।गुत्थी सुलझ नहीं पा रही थी। आखिर में राम सिंह ने घड़ी पर लिखे नाम के अनुसार रानी से मिलने का मन बनाया।राम सिंह पारस दत्त के बहन के घर गए।रानी से पूछताछ की गई। घड़ी को देखकर रानी के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगी। राम सिंह को कुछ शक हुआ।रानी ने बताया "हां ! यह घड़ी तो मेरी ही है। पापा ने इसे हमारे जन्मदिन पर गिफ्ट किया था। परंतु....."

"परंतु क्या ? यह घड़ी तुम्हारे मामा जी के हत्या के घटनास्थल तक कैसे पहुंची ?"

" जी ओ..... जी मै......"

"जो कुछ भी करना है सच और साफ-साफ बताओ ।"

"दरअसल .......मैंने हर घड़ी एक लड़के को दे दी थी।"

" लड़के को दे दिया था ? भला इतनी महंगी घड़ी, जो आपके पापा ने आप को गिफ्ट किया था, उसे दूसरे लड़के को क्यों दिया ? कौन लगता है वह आपका ?"

"जी ...जी... हम दोनों...."

"साफ-साफ बताइए ।"

" हम दोनों एक दूसरे से प्यार करते हैं ।"

"यहां तक तो ठीक है । क्या नाम है उसका ?"

"जी लाल !"

"तो फिर यह बताओ क्या तुम्हारे लाल ने तुम्हारे मामा जी का खून क्यों कर दिया ?"

" उसने खून नहीं किया सर ।"

"फिर किसने किया ? तुमने किया नहीं ? उसने किया नहीं ? घड़ी तुम्हारी तुमने घड़ी उसको दे दी ,फिर आखिर या कत्ल किसने किया ?"

अब राम सिंह जितना जल्दी हो सके लाल तक पहुंचना चाहते थे। रानी से उसका गांव और उसके पिता का नाम पुछकर वे लाल के घर को निकले।

इत्तेफाक से लाल घर पर ही मिल गया। पुलिस के हत्थे चढ़ते ही उसका चेहरा बदरंग हो गया। रामसिंह उसे थाने लेकर आ गए। उसे लॉकअप पर डालकर लंच के लिए चले गया। लंच के बाद उससे पूछताछ का मन बनाया।

लाल अभी नाबालिक ही था सत्रह से अधिक उसकी उम्र न होगी। पुलिसिया पूछताछ के आगे वह कुछ घंटे भी न टीक पाया। उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया।उसने पुलिस को बयान दिया "मैं और रानी दोनों एक दूसरे को बेहद प्यार करते हैं। हम दोनों एक- दूसरे से शादी करना चाहते हैं। हम दोनों एक दूसरे के बिना जी नहीं सकते हैं।परंतु एक दिन रानी ने मुझे बताया कि" लाल अगर हम दोनों ने अपने मामा जी को मना लिया तभी हमारी शादी हो सकती है। क्योंकि हमारे पिताजी के मैनेजर मामाजी ही हैं। घर में वही होगा जो मामाजी कहेंगे। पापा, मामा जी की कोई बात नहीं टालेंगे।

पर सबसे मुश्किल बात यह है कि, कि हमारी मां ने मामा जी को मेरे और तुम्हारे बारे में सब कुछ बता दिया है। मामाजी तुम्हें पसंद नहीं करते है। क्योंकि वे तुम्हारे पिताजी को अच्छी तरह से जानते हैं। जैसा कि तुम्हें पता ही है तुम्हारे बगल में हमारी मौसी का घर भी है।

हमारे मामा जी सपने में भी तुम्हारे साथ हमारी शादी नहीं होने देंगे। हम तुम ऐसा कौन सा काम करें ? जिससे कि हमारे मामा जी मान जाए। मैं चाहती हूं कि हमारी शादी में हमारे मामा जी की भी सहमति हो।"

इस तरह मैंने बहुत विचार किया पर मुझे कुछ भी नजर नहीं आ रहा था। मैं रानी के बिना जीना नहीं चाहता था। फिर एक दिन मेरे दोस्त ने एक ऐसे रसायन की चर्चा की जिसे इंसान के शरीर में डाल दिया जाए तो उसकी मृत्यु हो जाएगी।

उस दिन रानी ने बताया ,आज मेरे मामा जी मेरे घर आ रहे हैं ।तुम मेरे घर आना मैं उनसे तुम्हारा परिचय करवाऊंगी शायद मान जाए। मैंने मन ही मन दूसरी योजना बना ली। मैंने वह दवा अपने एक दोस्त के मेडिकल स्टोर से उपलब्धि की और अपने दो दोस्तों को यह बात बताई। और तालाब के सटे पेड़ के पास अपने दोस्तों के साथ मामा जी का इंतजार करने लगा।

मैंने और भी कई बार देखा था, जब भी मामाजी इधर रानी के गांव की ओर आते थे ,तो शाम को तालाब के पास शौच वगैरह के लिए रुकते थे।मैंने वही अपनी योजना को सफल करने की सोची। शाम होने को थी हम मामा जी का इंतजार कर रहे थे। अचानक मामा जी नजर आए बाइक रोककर वे तालाब के किनारे खेत में शौच के लिए बैठ गए। हमारे मन में पूरी योजना काम कर रही थी। जैसे ही वहां से उठकर तालाब में धोने के लिए बैठे, हम तीनों ने उनको पकड़ कर पीछे से सुई लगा दिया।

कुछ देर तक उनको पकड़ कर रखा फिर वह खुद ही लुढ़क गए।हमने उनकी पैंट बंद कर उन्हें खींचकर थोड़ा दूर कर दिया। उनकी बाईक को हम लोगों ने तलाब में लुढ़का दिया। हम लोग बहुत डर गए थे। इसी बीच जब मैं घर आया तो, मेरे हाथ में रानी का घड़ी नहीं था। मुझे पुण: वहां घटनास्थल पर जाकर अपनी घड़ी ढूंढने की हिम्मत नहीं हुई।

"वाह बेटे ! वाह! अब तुम लोग पढ़ाई लिखाई छोड़ कर इस तरह शादियां रचाओगे !" राम सिंह ने चिंतित मुद्रा में कहा।आगे पुलिस ने लाल के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है।

आप सोच सकते हैं आगे लाल और उसके दोस्तों का तथा रानी का क्या हुआ होगा ?




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